Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
अस्सलामु अलैकुम दोस्तों,
आज हम मग़रिब की नमाज़ के बारे में आसान और तफ्सील से जानेंगे। पाँच वक़्त की नमाज़ों में मग़रिब की नमाज़ की अपनी एक खास अहमियत है। सूरज डूबने के बाद इसका वक़्त शुरू होता है और इसका वक़्त दूसरी नमाज़ों के मुकाबले कम होता है, इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि मग़रिब की नमाज़ वक़्त पर अदा करें।
कई बार हमें ये तो मालूम होता है कि मग़रिब की अज़ान कब होती है, लेकिन अगर हम सफ़र में हों या ऐसी जगह हों जहाँ मस्जिद की अज़ान सुनाई न देती हो, तो मग़रिब के सही वक़्त को लेकर परेशानी हो सकती है। इसी वजह से इस पोस्ट में हम मग़रिब की नमाज़ का वक़्त, इसमें कितनी रकअत होती हैं और इसे पढ़ने का आसान तरीका जानेंगे।
मग़रिब की नमाज़ में 3 रकअत फ़र्ज़, 2 रकअत सुन्नत और 2 रकअत नफ़िल पढ़ी जाती हैं। हम आपको इन सभी नमाज़ों का तरीका आसान अल्फ़ाज़ में समझाने की कोशिश करेंगे, ताकि जो लोग नमाज़ सीख रहे हैं उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
अगर आप मग़रिब की नमाज़ का सही तरीका सीखना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह आपको मग़रिब की नमाज़ से जुड़ी ज़रूरी मालूमात एक ही जगह पर आसानी से मिल जाएगी।
तो चलिए बिस्मिल्लाह करते हैं और जानते हैं मग़रिब की नमाज़ का वक़्त, रकअत और पढ़ने का पूरा तरीका। 🤲
इस्लाम में जो 5 नमाज़े पढ़ने का हुक्म हैं उन सभी को पाबंदियों से पढ़ना ज़रूरी हैं। ऐसा नहीं की आप पांचों में से कोई एक नमाज़ को पढ़ ले और बाकि को छोड़ दे। सारी नमाज़े वक़्त पर पढ़ना ज़रूरी हैं ताकि हम गुनाहों से बच सके और अपनी आख़िरत को सुधार सके।
मगरिब की नमाज़ का वक़्त
वैसे तो आजकल हमारे इलाको में मजीद से अज़ान की आवाज़ आ जाती हैं जिससे हमें मालूम चल जाता है की मगरिब की नमाज़ का वक़्त हो गया हैं लेकिन जब हम कहीं ऐसी जगह होते हैं जहाँ दूर दूर तक कोई मस्जिद नहीं हैं न ही अज़ान की आवाज़ की गुंजाईश रहती हैं उस दौरन हमें मगरिब की नमाज़ का वक़्त मालूम नहीं चल पाता। तब हम परेशान हो जाते है की आखिर मगरिब का सही वक़्त कब से कब तक रहता है?
मगरिब की नमाज़ का वक़्त सूरज डूबते वक़्त जब आसमान में सफ़ेद रौशनी दिखाई देती हैं तब तक रहता हैं। जब यह सफ़ेद रौशनी दिखना बंद हो जाती हैं तब मगरिब की नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाता हैं। मतलब सूरज डूबने का वक़्त जो हल्का अँधेरा रहता हैं तब आप मगरिब की नमाज़ पढ़ सकते हैं।
पूरा अँधेरा होने पर इस नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाता हैं। मगरिब की नमाज़ का वक़्त एक घंटे तक रहता हैं। लिहाज़ा आप कोशिश करिये की इस एक घंटे में आप मगरिब की नमाज़ अदा कर लें। कुछ लोग ये भी कहते है की जब ईशा की अज़ान होती हैं। उससे पहले तक मगरिब की नमाज़ का वक़्त रहता है लेकिन ये सही नहीं।
आप कोशिश करिये की पूरा अँधेरा होने से पहले मगरिब की नमाज़ अदा कर लें। अँधेरा होने के बाद फिर आपको इसकी कज़ा नमाज़ पढ़ने पड़ेगी।
मगरिब की नमाज़ में कितनी रकातें होती हैं?
मगरिब की नमाज़ में कुल 7 रकातें होती हैं ,जो इस तरह हैं,
3 फ़र्ज़, 2 सुन्नत और 2 नफ़िल ,अगर आप यह नमाज़ पढ़ने मस्जिद जा रहे हैं तो अज़ान होते ही जल्दी से मस्जिद पहुँच जाये क्यूंकि इस नमाज़ में अज़ान के बाद वक़्त बहुत कम मिलता हैं।
अगर मस्जिद आपके घर से थोड़ा दूर है तो हो सकता हैं जब आप जब मस्जिद पहुंचे उस वक़्त नमाज़ शुरू हो जाये और आप जमात के साथ नमाज़ न पढ़ सके। इसलिए बेहतर है अगर मस्जिद घर से दूर है तो घर पर ही नमाज़ अदा कर ले।अगर घर पर ही पढ़ रहे है तो कोई मसला नहीं।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
मगरिब की 3 रकात फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने का तरीका
सबसे पहले नियत करें, नियत की मैंने 3 रकात नमाज़ फ़र्ज़, वास्ते अल्लाह तआला के अगर आप मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे हैं तो पीछे इस इमाम के बोल सकते है घर पर पढ़ रहे हैं तो ये लाइन बोलने की ज़रूरत नहीं वक़्त मगरिब का,
मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले और सूरह सना पढ़े जो इस तरह हैं “सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका”
इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े। उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और सूरह जो आपको याद हो।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े। इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं।
इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे।
फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से सूरह फातेहा (अल्हम्दु शरीफ) पढ़े और उसके बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये।
रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा “सुबहाना रब्बी अल अज़ीम” पढ़े। इसके बाद वापिस आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये।
ये भी पढ़ें: ज़ोहर की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा।12 रकअत कैसे पढ़ें? 4 सुन्नत, 4 फ़र्ज़, 2 सुन्नत और 2 नफ़िल|
सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए सीधे पैर के पंजो के बल पर बैठ जाये।
ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं। अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं लेकिन जानबूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। फिर आप अल्लाहो अकबर बोलते हुए तीसरी रकात के लिए फिर से खड़े हो जाये।
फिर बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़कर सूरह फातेहा पढ़े। उसके बाद कोई सूरत आपको नहीं पढ़ना हैं, सिर्फ सूरह फातेहा पढ़ना हैं। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये। रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।
इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए बैठ जाये। फिर वापिस अत्तहिय्यात पढ़े अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद आप दरूदे इब्राहिम एक मर्तबा पढ़े। इसके बाद आप दुआ ए मसुरा पढ़े। ये दुआ पढ़ने के बाद सलाम फेर ले जैसे अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह पहले सीधे हाथ की तरफ फिर उलटे हाथ की तरफ सलाम फेर कर नमाज़ को पूरी करे। इस तरह आपकी 3 रकात नमाज़ फ़र्ज़ हो गयी
2 रकात सुन्नत पढ़ने का तरीका
नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त मगरिब का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले
ये भी पढ़ें: असर की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा।8 रकअत कैसे पढ़ें? 4 सुन्नत + 4 फ़र्ज़ | पूरी जानकारी
और सूरह सना पढ़े जो इस तरह हैं “सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका” इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े।
उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और जो आपको याद हो। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे।
फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।
आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से अल्हम्दु शरीफ पढ़े और उसके बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये।
रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा “सुबहाना रब्बी अल अज़ीम” पढ़े। इसके बाद वापिस आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए बैठ जाये।
ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं। अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं। लेकिन जानबूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं।
फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े। अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद आप दरूदे इब्राहिम एक मर्तबा पढ़े। इसके बाद आप दुआ ए मसुरा पढ़े।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
ये दुआ पढ़ने के बाद सलाम फेर ले जैसे अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह पहले सीधे हाथ की तरफ फिर उलटे हाथ की तरफ सलाम फेर कर नमाज़ को पूरी करे। इस तरह आपकी 2 रकत नमाज़ सुन्नत हो गयी।
2 रकात नमाज़ नफ़िल पढ़ने का तरीका
इस नमाज़ में सिर्फ आपको नियत में कुछ बदलाव करना हैं बाकि जैसे आपने 2 रकात सुन्नत पढ़ी वैसे ही 2 रकात नफ़िल पढ़नी है।
2 रकात नफ़िल नमाज़ की नियत
नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ नफ़्ल, वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त मगरिब का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले और सूरह सना पढ़े। बाकि जो तरीका ऊपर बताया हैं वही तरीका इस नमाज़ का ही हैं|Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
अल्लाह हम सबको पंजवक्ता नमाज़ पढ़ने की तौफीक अता फरमाए आमीन।
मग़रिब की नमाज़ — FAQ सवाल-जवाब
सवाल 1: मग़रिब की नमाज़ में कुल कितनी रकअत होती हैं?
जवाब: आम तौर पर मग़रिब में 7 रकअत पढ़ी जाती हैं — 3 रकअत फ़र्ज़, 2 रकअत सुन्नत और 2 रकअत नफ़िल।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 2: मग़रिब की नमाज़ का वक़्त कब शुरू होता है?
जवाब: सूरज पूरी तरह ग़ुरूब होने के बाद मग़रिब का वक़्त शुरू होता है।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 3: मग़रिब की नमाज़ का वक़्त कब तक रहता है?
जवाब: मग़रिब का वक़्त शफ़क़ के ख़त्म होने तक रहता है। सही वक़्त जगह और मौसम के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने इलाक़े की भरोसेमंद नमाज़ टाइमिंग देखना बेहतर है।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 4: मग़रिब की नमाज़ में पहले क्या पढ़ना चाहिए?
जवाब: पहले 3 रकअत फ़र्ज़, उसके बाद 2 रकअत सुन्नत और फिर 2 रकअत नफ़िल पढ़ी जाती हैं।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 5: मग़रिब की 3 रकअत फ़र्ज़ की नियत कैसे करें?
जवाब: दिल में मग़रिब की 3 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ अदा करने का इरादा करें। नियत के अल्फ़ाज़ ज़ुबान से बोलना ज़रूरी नहीं, दिल का इरादा काफ़ी है।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 6: मग़रिब की तीसरी रकअत में क्या पढ़ना होता है?
जवाब: फ़र्ज़ की तीसरी रकअत में क़िराअत के बारे में फ़िक़्ही मसालिक के मुताबिक़ तफ्सील अलग हो सकती है। अपने मस्लक के मुताबिक़ किसी भरोसेमंद आलिम से तरीका सीखना बेहतर है।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 7: क्या मग़रिब की नमाज़ घर पर पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, ज़रूरत होने पर घर पर भी मग़रिब की नमाज़ अदा की जा सकती है। मर्दों के लिए मस्जिद की जमाअत की अपनी अहमियत है।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 8: क्या मग़रिब की नमाज़ में देर करना सही है?
जवाब: मग़रिब का वक़्त अपेक्षाकृत कम होता है, इसलिए बेवजह देर नहीं करनी चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि नमाज़ वक़्त के अंदर अदा कर ली जाए।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 9: अगर मग़रिब की नमाज़ छूट जाए तो क्या करें?
जवाब: अगर नमाज़ छूट जाए तो क़ज़ा के बारे में अपने भरोसेमंद आलिम से सही मसला मालूम करके नमाज़ अदा करें। जान-बूझकर नमाज़ छोड़ने से बचना चाहिए।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 10: मग़रिब की 2 रकअत सुन्नत कब पढ़ी जाती है?
जवाब: 3 रकअत फ़र्ज़ अदा करने के बाद 2 रकअत सुन्नत पढ़ी जाती हैं।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 11: क्या मग़रिब के बाद 2 रकअत नफ़िल पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, 2 रकअत नफ़िल पढ़ सकते हैं। नफ़िल नमाज़ फ़र्ज़ नहीं होती, लेकिन इबादत के तौर पर पढ़ना सवाब का काम है।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
सवाल 12: मग़रिब की नमाज़ का सही वक़्त कैसे मालूम करें?
जवाब: अपने इलाक़े की मस्जिद की अज़ान, नमाज़ टाइमटेबल या किसी भरोसेमंद नमाज़ टाइमिंग स्रोत से वक़्त मालूम कर सकते हैं। नमाज़ के औक़ात शहर और तारीख़ के हिसाब से बदलते रहते हैं।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Magrib ki Namaz padhne ka Tariqa
जज़ाकल्लाह खैर….

maghrib ki namaz ke bare badi tafseeli baat aapne batai hai