09/08/2026
1786179116657

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम कौन थे? कुरआन में ज़िक्र, उनकी ज़िंदगी और अनमोल नसीहतें| Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The? Quran Mein Zikr, Unki Zindagi Aur Anmol Naseehatein amazing story

Share now
Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?
Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम अल्लाह तआला के उन बुज़ुर्ग और मुक़द्दस नबियों में से हैं जिनका ज़िक्र कुरआन मजीद में हुआ है। कुरआन में अल्लाह तआला ने उन्हें सच्चा नबी बताया और उनके ऊँचे मक़ाम का ज़िक्र फ़रमाया है।

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी के बारे में बहुत-सी बातें किताबों में मिलती हैं, लेकिन हर बात एक जैसी मज़बूत रिवायत से साबित नहीं है। इसलिए इस लेख में हम कोशिश करेंगे कि कुरआन और भरोसेमंद इस्लामी रिवायतों से साबित बातों को ही अहमियत दें और बाकी बातों को यक़ीनी हक़ीक़त के तौर पर पेश न करें।

आइए आसान भाषा में जानते हैं कि हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम कौन थे, कुरआन में उनका ज़िक्र कहाँ आया है और उनसे हमें क्या सीख मिलती है।

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम का जिक्र कुरआन में सिर्फ दो जगह आया है- सूरह मरयम में और सूरह अबिया में।

तर्जुमा – ‘और याद करो कुरआन में इदरीस को, बिला शुब्हा वह सच्चे नबी थे और बुलन्द किया है हमने उनका मुक़ाम ।'(सूरह मरयम 19:56)

तर्जुमा – और इस्माईल और इदरीस और जुलकिफ़्ल, इनमें से हर एक था सब्र करने वाला।(सूरह अंबिया 21 : 85)

नाम-नसब और ज़माना

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम के नाम-नसब और ज़माने के बारे में तारीख लिखने वालों को सख़्त इख़्तिलाफ़ है और तमाम इख़्तिलाफ़ी वजहों को सामने रखने के बाद भी कोई आख़िरी या तरजीह देने वाली राय क़ायम नहीं की जा सकती।

वजह यह है कि कुरआन करीम ने तो रुश्द व हिदायत के अपने मक्सद के पेशे नज़र, तारीख़ी बहस से जुदा होकर सिर्फ़ उनकी नुबूवत के रुत्बे की बुलन्दी और उनकी ऊंची सिफ़तों का ज़िक्र किया है और इसी तरह हदीस की रिवायतें भी इससे आगे नहीं जातीं। इसलिए इस सिलसिले में जो कुछ भी है, वे इसराईली रिवायतें हैं और वे भी आपसी टकराव और इख़्तिलाफ़ से भरी हुई हैं। इसीलिए थोड़े में लिखने के पेशेनज़र इन दूर-दराज से लाई गई बहसों से वचने की कोशिश की जा रही है।

एक जमाअत का यह ख़्याल है कि हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम बाबिल में पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े। उम्र के शुरूआती दिनों में उन्होंने हज़रत शीस बिन आदम अलैहिस्सलाम से इल्म हासिल किया। बहरहाल जब इदरीस अलैहिस्सलाम खुद से सोचने-समझने की उम्र को पहुंचे तो अल्लाह ने उनको नुबूवत से सरफ़राज़ फ़रमाया तब उन्हाने शरीरों (बदमाशों) और फ़सादियों के राहे हिदायत की तबलीग शुरू की, पर फ़सादियों ने उनकी एक बात न सुनी और हज़रत आदम व शीस अलैहिस्सलाम की शरीअत के मुखालिफ़ ही रहे,

अलबत्ता एक छोटी-सी जमाअत जरूर मुसुलमान हो गई।
हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम ने जब यह रंग देखा तो वहां से हिजरत का इरादा किया और अपने मानने वालों को हिजरत कर जाने के लिए कहा। इदरीस अलैहिस्सलाम की पैरवी करने वालों ने जब यह सुना तो उनको वतन का छोड़ना बहुत गरां गुजरा और कहने लगे कि बाबिल जैसा वतन हमको कहां नसीब हो सकता है?Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

हजरत इदरीस अलैहिस्सलाम ने तसल्ली देते हुए फ़रमाया कि अगर तुम यह तकलीफ़ अल्लाह के रास्ते में उठाते हो, तो उसकी रहमत बहुत फैली हुई है, उसका अच्छा बदला ज़रूर देगा, पस हिम्मत न हारो और अल्लाह के हुक्म के आगे सरे नियाज़ झुका दो।

मुसलमानों की रजामंदी के बाद हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम और उनकी जमाअत मिस्र की तरफ़ हिज़रत कर गई और नील के किनारे एक अच्छी जगह चुनकर के सकूनत अपना ली। हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम और उनकी पैरवी करने वाली जमाअत ने पैग़ामे इलाही और भलाई का हुक्म देने और बुराई रोकने वाले का फ़र्ज़ अंजाम देना शुरू कर दिया।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

कहा जाता है कि उनके ज़माने में बहत्तर जुबानें बोली जाती थीं और अल्लाह की अता व बख़्शिश से वह वक़्त की तमाम जुबानों को जानते थे और हर एक जमाअत को उसकी ज़बान में तब्लीग फ़रमाया करते. थे। एक रिवायत के एतबार से हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम पहले आदमी हैं जिन्होंने कलम को इस्तेमाल किया।

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम की ख़ास बातें

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम ने दीने इलाही के पैग़ाम के अलावा तमद्दुनी रियासत और शहरी जिंदगी, तमद्दुनी तौर-तरीक़ों की तालीम व तलक़ीन की और उनके ट्रेंड तालिब इल्मों ने कम व बेश दो सौ बस्तियां आबाद कीं। हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम ने इन तलबा को दूसरे इल्मों की भी तालीम की, जिसमें इल्मे हिक्मत और इल्मे नुजूम भी शामिल हैं।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम पहली हस्ती हैं जिन्होंने हिक्मत व नुजूम के इल्म की शुरूआंत की, इसलिए कि अल्लाह तआला ने उनको अफ़लाक और उनकी तर्कीब, कवाकिब और उनके जमा होने और अलग होने के नुक्तों और उनके आपसी कशिश के राज़ों की तालीम दी और उनको अदद व हिसाब के इल्म का आलिम बनाया और अगर ख़ुदा के उस पैग़म्बर के जरिए से इल्म सामने न आते, तो इन्सानी तबीयतों की वहां तक पहुंच मुश्किल थी।

उन्होंने अलग-अलग जातों और गिरोहों के लिए उनके मुनासिबे हाल क़ायदे क़ानून मुकर्रर किए और पूरी दुनिया को चार हिस्सों में बांट कर हर चौथाई के लिए एक हाकिम मुकर्रर किया जो जमीन के उस हिस्से की सियासत और बादशाही का ज़िम्मेदार क़रार पाया और इन चारों के लिए ज़रूरी क़रार दिया कि तमाम क़ानूनों से बढ़-चढ़कर शरीयत का वह क़ानून रहेगा, जिसकी तालीम अल्लाह की वह्य के जरिए मैंने तुमको दी है।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम की तालीम का खुलासा

अल्लाह की हस्ती और उसकी तौहीद पर ईमान लाना सिर्फ कायनात पैदा करने वाले की परस्तिश करना, आख़िरत के अज़ाब से बचाने के लिए भले अमलों को ढाल बनाना, दुनिया से बे-नियाज़ी, तमाम मामलों में अल व इंसाफ को सामने रखना, मुकर्रर किए हुए तरीकों पर अल्लाह की इबादत करना, अय्यामे बीज़ के रोज़े रखना, इस्लाम के दुश्मनों से जिहाद करना, ज़कात अदा करना, पाकी-सफाई के साथ रहना, ख़ास तौर से जनाबत, कुत्ते और सूअर से बचना, हर नशीली चीज़ों से परहेज़ करना।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

बाद में आने वाले नबियों के बारे में बशारत

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम ने अपनी उम्मत को यह भी बताया कि मेरी तरह इस दुनिया की दीनी व दुन्यवी इस्लाह के लिए बहुत-से नबी तशरीफ लाएंगे और उनकी नुमायां ख़ास बातें ये होंगी।

तो हर एक बुरी बात से दूर और पाक होंगे। तारीफ के काबिल और फज़ाइल में कामिल होंगे। ज़मीन व आसमान के हालात को और उन मामलों को कि जिनमें कायनात के लिए शिफा है या मरज़, वह्य इलाही के ज़रिए इस तरह जानते होंगे कि कोई मांगने वाला भूखा-प्यासा न रहेगा। वे दुआओं को सुनने वाले होंगे। उनके मज़हब की दावत का खुलासा कायनात की इस्लाह होगा।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम की ज़मीनी ख़िलाफत

जब हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम अल्लाह की ज़मीन के मालिक बना दिए गए, तो उन्होंने इल्म व अमल के एतबार से अल्लाह की मख़्लूक को तीन तबकों में वांट दिया – काहिन, बादशाह, रियाया और तर्तीब के एतबार के उनके दर्जे तै किए। काहिन सबसे पहला और ऊंचा दर्जा करार पाया, इसलिए कि वह अल्लाह तआला के सामने अपने नफ़्सं के अलावा बादशाह और रियाया के मामलों में भी जवाबदेह है।

ये भी पढ़ें: हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का मुकम्मल वाक़िआ | फिरऔन का अंजाम और दरिया के शक्क होने का हैरतअंगेज़ मोजिज़ा| 

‘बादशाह’ का दूसरा दर्जा रखा गया इसलिए कि वह नफ़्स और राज्य के मामलों के बारे में जवाबदेह है और रियाया सिर्फ अपने नफ़्स के लिए जवाबदेह है, इसलिए वह तीसरे तबके में शामिल है लेकिन ये तबके जिम्मेदारियों के एतबार से थे, नस्ल व ख़ानदान के आख़्तियारों के एतबार से नहीं। हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम शरीयत और सियासत के इन्हीं कानूनों की तब्लीग ‘अल्लाह तक जाने’ तक फरमाते रहे।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

हजरत इदरीस अलैहिस्सलाम से मुताल्लिक़ ख़ास बातें

उनकी अंगूठी पर यह इबारत खुदी हुई थी, ‘अल्लाह पर ईमान के साथ-साथ सब्र फतहमंदी की वजह है।’ उनके कमर से बंधने वाले पटके पर यह लिखा हुआ था, ‘सच्ची ईदें तो अल्लाह के फर्जों के अदा करने में छिपी हुई हैं। दीन का कमाल शरीअत से जुड़ा हुआ है और मुरव्वत में दीन के कमाल की तकमील है।’

नमाज़े जनाज़ा के वक़्त जो पटका बांधते थे, उस पर नीचे लिखे जुमले खुदे हुए थे। ‘सआदतमंद वह है जो अपने नफ़्स की निगरानी करे और परवरदिगार के सामने इंसान की शफ़ाअत करने वाले उसके नेक अमाल हैं।’

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम की नसीहतें

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम की बहुत-सी नसीहतें और आदाव व अख़लाक़ के जुम्ले मशहूर हैं, जो अलग-अलग जुबानों में जर्दुल मसल (कहावत) और रुमूज़ व अमार (गूढ़ रहस्य) की तरह इस्तेमाल में आते हैं और उनमें से कुछ नीचे दिए जाते हैं-Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

1. अल्लाह की बेपनाह नेमतों का शुक्रिया इंसानी ताक़त से बाहर है।

2. जो इल्म में कमाल और अमले सालेह का ख़्वाहिशमंद हो, उसको जिहालत के अस्बाब और बद-किरदारी के क़रीब भी न जाना चाहिए। क्या तुम नहीं देखते कि हरफ़न मौला कारीगर अगर सीने का इरादा करता है तो सूई हाथ में लेता है, न कि बर्मा । पस हर वक़्त यह उसूल नज़रों में रहना चाहिए। .

3. दुनिया की भलाई ‘हसरत’ है और बुराई ‘नदामत’ ।

4. अल्लाह की याद और अमले सालेह के लिए ख़ुलूसे नीयत शर्त है।

5. न झूठी क़स्में खाओ, न अल्लाह तआला के नाम को क़स्मों के लिए तख़्ता-ए-मश्क़ बनाओ और न झूठों को क़समें खाने पर आमादा करो, क्योंकि ऐसा करने से तुम भी गुनाह में शरीक हो जाओगे।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

6. जलील पेशों को अख़्तियार न करो (जैसे सींगी लगाना, जानवरों की जुफ़्ती पर उजरत लेना, वगैरह)

7. अपने बादशाहों की (जो कि पैग़म्बर की तरफ़ से शरीअत के हुक्मों के नाफ़िज़ करने के लिए मुक़र्रर किए जाते हैं) इताअत करो और अपने बड़ों के सामने पस्त रहो और हर वक़्त अल्लाह की तारीफ़ में अपनी जुबान को तर रखो।

8. हिक्मत रूह की जिंदगी है।

9. दूसरों की खुश ऐशी पर हसद न करो, इसलिए कि उनकी यह मस्रूर जिंदगी कुछ दिनों की है।

10. जो ज़िंदगी की ज़रूरतों की ज़्यादा तलब रखता हो वह कभी कानेअ नहीं रहा।

ये भी पढ़ें: हज़रत मरयम (अ.स.) की पूरी कहानी | हज़रत ईसा (अ.स.) की पैदाइश का हैरतअंगेज़ वाक़िआ |

नोट : कुछ तहक़ीक़ करने वालों और तज़्किरा लिखने वालों ने हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम और यूनानी फ़र्जी अफ़्सानवी (Greek Mythology) के (Hermes) हरमज़ में मुताबकत पैदा करने की कोशिश की है, जो सही नहीं है। हरमज़ (Hermes) को उन फ़र्ज़ी अफ़्सानों में हिक्मत व फ़साहत का देवता कहा जाता है। रूमी उसको ‘अतारद’ कहते हैं।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

FAQ – हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम

सवाल 1: हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम कौन थे?
जवाब: हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम अल्लाह तआला के नबी थे। कुरआन में अल्लाह तआला ने उन्हें सिद्दीक़ (सच्चा) और नबी बताया है।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

सवाल 2: कुरआन में हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम का ज़िक्र कहाँ आया है?
जवाब: उनका ज़िक्र कुरआन में दो जगह आया है—सूरह मरयम (19:56-57) और सूरह अल-अंबिया (21:85-86)।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

सवाल 3: हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम के बारे में कुरआन क्या कहता है?
जवाब: सूरह मरयम में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह सच्चे नबी थे और अल्लाह ने उन्हें बुलंद मक़ाम अता फ़रमाया।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

सवाल 4: क्या हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम सब्र करने वालों में से थे?
जवाब: जी हाँ। सूरह अल-अंबिया (21:85) में हज़रत इस्माईल और हज़रत ज़ुलकिफ़्ल के साथ हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम का ज़िक्र करते हुए उन्हें सब्र करने वालों में बताया गया है।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

सवाल 5: क्या हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम को आसमान पर उठाया गया था?
जवाब: कुरआन में इतना ज़रूर आया है कि अल्लाह तआला ने फ़रमाया: “और हमने उन्हें बुलंद मक़ाम पर उठाया।” (सूरह मरयम 19:57) इसकी विस्तृत कैफ़ियत के बारे में अलग-अलग रिवायतें मिलती हैं, इसलिए बिना पक्के सबूत के अतिरिक्त विवरण को निश्चित नहीं कहना चाहिए।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

सवाल 6: क्या हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम पहले व्यक्ति थे जिन्होंने कलम इस्तेमाल किया?
जवाब: यह बात कुछ इस्लामी किताबों और रिवायतों में मिलती है, लेकिन इसे कुरआन या सहीह हदीस से निश्चित रूप से साबित नहीं किया जा सकता। इसलिए इसे पक्की बात के तौर पर कहना उचित नहीं।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

सवाल 7: हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम से हमें क्या सीख मिलती है?
जवाब: सबसे बड़ी सीख सच्चाई, सब्र और अल्लाह की इताअत है। कुरआन में उन्हें सच्चा नबी और सब्र करने वालों में बताया गया है। यही हमारे लिए उनकी ज़िंदगी का सबसे भरोसेमंद सबक है।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

सवाल 8: हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम का ज़िक्र कुरआन में कितनी बार आया है?
जवाब: उनका नाम दो जगह आया है—सूरह मरयम और सूरह अल-अंबिया में।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hazrat Idris Alaihissalam Kaun The?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *