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दुआ कब क़ुबूल होती है? 15 मुबारक वक़्त जो हर मुसलमान को ज़रूर जानने चाहिए | कुरआन और हदीस की रोशनी में|Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt Jo Har Musalman Ko Zarur Janna Chahiye | Quran Aur Hadith Ki Roshni Mein amazing story

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Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt
Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे मुबारक वक़्त भी हैं जिनमें की गई दुआ के क़ुबूल होने की उम्मीद सबसे ज़्यादा होती है? कुरआन-ए-करीम और सहीह हदीसों में ऐसे कई ख़ास वक़्तों का ज़िक्र मिलता है, जैसे शब-ए-क़द्र, रमज़ान, जुमा का दिन, तहज्जुद का वक़्त, सहरी का समय और यौम-ए-अरफ़ा, जिनमें अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआओं को ख़ास तौर पर क़ुबूल फ़रमाते हैं।

इस आर्टिकल में हम दुआ क़ुबूल होने के 15 मुबारक वक़्त, उनकी फ़ज़ीलत, और कुरआन व हदीस की रोशनी में उनकी अहमियत को आसान भाषा में जानेंगे। अगर आप चाहते हैं कि आपकी दुआएँ अल्लाह तआला की बारगाह में ज़्यादा से ज़्यादा क़ुबूल हों, तो इस आर्टिकल को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। यह जानकारी हर मुसलमान के लिए बेहद क़ीमती और अमल करने लायक है।

उन वक़्तों का बयान जिन में दुआ क़बूल होती है

जिन वक्तों में दुआ कुबूल होती है वह यह हैं

शबे कद्र में और ज़्यादा उम्मीद यह है कि शबे कुद्र रमज़ान के आखिरी अशरे की ताक रातों में यानी 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं या 29वीं रात में आती है। 21वीं और 27 वीं के बारे में सब से ज़्यादा भरोसा है।

अरफात का पूरा दिन, ज़िल्हिज्जा की नवीं तारीख को।

रमज़ान का पूरा महीना।

जुमा की रात यानी जुमेरात और जुम्अः के बीच की जुमा का पूरा दिन।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

रोज़ाना रात का दूसरा आधा हिस्सा।

रोज़ाना रात का पहला तिहाई हिस्सा।

रोजाना रात का आखिरी तिहाई हिस्सा

रोज़ाना रात का आखिरी तिहाई का दर्मियान

रोज़ाना सहरी के समय।

सब से ज़्यादा दुआ के कबूल होने की आशा जुमा की दुआ कबूल होने की घड़ी है। यह घड़ी कब से कब तक रहती है? इस बारे में अहादीस में बहुत सी रिवायतें हैं, जैसे:

यह घड़ी इमाम के खुत्बा के लिये मिंबर पर बैठने से ले कर जुमा की नमाज़ खत्म होने तक है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

जमाअत खड़ी होने के समय से ले कर सलाम फेरने तक है।

दुआ करने वाला जब खड़ा हुआ जुमा की नमाज़ पढ़ रहा हो वह समय है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

कुछ उलमा का कहना है कि जुमा के दिन असर की नमाज़ के बाद से सूरज डूबने तक है।

ये भी पढ़ें:अल्लाह के ज़िक्र के 12 अहम आदाब: हर मुसलमान को ज़रूर जानने चाहिए | कुरआन और हदीस की रोशनी में|

कुछ उलमा ने कहा कि जुमा के दिन की अन्तिम घड़ी है।

कुछ और उलमा ने कहा कि जुमा के दिन सुबह सादिक से ले कर सूरज के निकलने के समय तक है।

कुछ उलमा ने कहा है कि जुमा के दिन सूरज निकलने के बाद है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

मशहूर सहाबी अबू ज़र गफ्फारी रज़ियल्लाहु अन्हु का’ मानना है कि दुआ कबूल होने की यह घड़ी जुमा के दिन दोपहर को सूरज ढ़लने के ज़रा देर बाद से एक हाथ बराबर ढ़लने तक है।

किताब “हिस्ने हसीन” के लिखने वाले इमाम जज़री रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मेरा तो अकीदा है कि दुआ के कबूल होने की वह घड़ी इमाम के जुमा की नमाज़ के सूरः फातिहा पढ़ने से ले कर आमीन कहने तक के दर्मियान है, ताकि जो हदीसें सहीह सनद के साथ नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से साबित हैं वह सब सूरतें जो ऊपर बयान हुई हैं जमा हो जायें, जैसा कि मैं ने एक दूसरे जगह पर उस को साफ सूरत से बयान किया है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

इमाम नववी रहमतुल्लाह अलैह का कहना है कि उस घड़ी के बारे में सही और ऐसा दुरुस्त समय कि उस के अलावा किसी कौल को इख़्तियार करना जाइज़ ही नहीं, वह है जो सहीह मुस्लिम शरीफ में हज़रत अबू मूसा अश-अरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि कबूल होने की उस घड़ी का समय इमाम के खुत्बा के लिये मिंबर पर बैठने से ले कर नमाज़ के ख़त्म होने तक है यही ऊपर बयान सब से पहला कौल है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

ये भी पढ़ें: अल्लाह पाक का ज़िक्र करने की फ़ज़ीलत: 30+ सहीह हदीसें जो हर मुसलमान को ज़रूर जाननी चाहिए|

FAQ (सवाल व जवाब)

1. दुआ कब सबसे ज़्यादा क़ुबूल होती है?

जवाब: कुरआन और हदीस की रोशनी में शब-ए-क़द्र, रमज़ान, जुमा का दिन, तहज्जुद का वक़्त, सहरी का समय, यौम-ए-अरफ़ा और अज़ान व इक़ामत के बीच का समय दुआ की क़ुबूलियत के बेहतरीन वक़्तों में शामिल हैं।

2. क्या जुमा के दिन दुआ ज़रूर क़ुबूल होती है?

जवाब: जी हाँ। सहीह हदीसों में जुमा के दिन एक ऐसी मुबारक घड़ी का ज़िक्र है जिसमें की गई दुआ अल्लाह तआला क़ुबूल फ़रमाते हैं। उलमा ने इसके बारे में अलग-अलग राय बयान की है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

3. तहज्जुद के वक़्त दुआ क्यों अहम है?

जवाब: रात के आख़िरी हिस्से (तहज्जुद) में अल्लाह तआला की रहमत ख़ास तौर पर नाज़िल होती है और यह दुआ की क़ुबूलियत का सबसे अफ़ज़ल वक़्त माना गया है।

4. क्या रमज़ान में हर दिन दुआ क़ुबूल होती है?

जवाब: रमज़ान का पूरा महीना रहमत, मग़फ़िरत और दुआ की क़ुबूलियत का महीना है। खास तौर पर शब-ए-क़द्र में दुआ की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

5. यौम-ए-अरफ़ा की दुआ की क्या फ़ज़ीलत है?

जवाब: 9 ज़िलहिज्जा (यौम-ए-अरफ़ा) दुआ के लिए सबसे मुबारक दिनों में से एक है। इस दिन अल्लाह तआला की रहमत और मग़फ़िरत बहुत ज़्यादा होती है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

6. दुआ क़ुबूल होने की क्या शर्तें हैं?

जवाब: इख़लास, हलाल रोज़ी, अल्लाह पर पूरा यक़ीन, गुनाहों से तौबा, अदब के साथ दुआ करना और जल्दबाज़ी न करना, दुआ की क़ुबूलियत के अहम असबाब हैं।

7. अगर दुआ तुरंत क़ुबूल न हो तो क्या करें?

जवाब: मायूस नहीं होना चाहिए। हदीस के मुताबिक़ अल्लाह तआला दुआ का बदला तीन तरीकों से देते हैं—या तुरंत क़ुबूल फ़रमा देते हैं, या किसी मुसीबत को टाल देते हैं, या आख़िरत के लिए बेहतर अज्र जमा कर देते हैं।

8. क्या हर दुआ क़ुबूल होती है?

जवाब: अल्लाह तआला हर दुआ को सुनते हैं। क़ुबूलियत उसकी हिकमत के मुताबिक़ होती है। इसलिए हमेशा उम्मीद और सब्र के साथ दुआ करते रहना चाहिए।

9. क्या बिना वुज़ू के दुआ माँगी जा सकती है?

जवाब: जी हाँ, बिना वुज़ू के भी दुआ माँगी जा सकती है। लेकिन वुज़ू के साथ, क़िबला रुख होकर और अदब के साथ दुआ करना ज़्यादा अफ़ज़ल है।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

10. दुआ करते समय कौन-सी गलती नहीं करनी चाहिए?

जवाब: हराम रोज़ी, गुनाह की दुआ, रिश्ते तोड़ने की दुआ, जल्दबाज़ी, अल्लाह की रहमत से मायूस होना और यक़ीन की कमी—इन बातों से बचना चाहिए ताकि दुआ की क़ुबूलियत की उम्मीद बढ़े।Dua Kab Qubool Hoti Hai? 15 Mubarak Waqt

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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