Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
मियाँ-बीवी का रिश्ता इस्लाम में बहुत पाक और अहम रिश्ता है। शरीअत ने जिस तरह निकाह के हक़ और ज़िम्मेदारियाँ बताई हैं, उसी तरह हमबिस्तरी के भी कुछ आदाब और ज़रूरी मसाइल बताए गए हैं, जिनका इल्म हर शादीशुदा मुसलमान के लिए फ़ायदेमंद है।
इस सिलसिले में एक अहम सवाल यह भी है कि हमबिस्तरी के दौरान मियाँ या बीवी एक-दूसरे की शर्मगाह को देख सकते हैं या नहीं? इस बारे में उलमा-ए-किराम ने अहादीस और फ़िक़्ह की किताबों की रोशनी में अलग-अलग बातें बयान की हैं।
इसलिए इस मसले को सिर्फ़ सुनी-सुनाई बातों की बुनियाद पर समझने के बजाय शरीअत के बताए हुए आदाब और भरोसेमंद इस्लामी किताबों के हवाले से समझना चाहिए। साथ ही मियाँ-बीवी के बीच पर्दा, हया, अदब और एक-दूसरे के हुक़ूक़ का भी ख़याल रखना चाहिए।
आइए जानते हैं कि हमबिस्तरी के दौरान शर्मगाह देखने के बारे में क्या हुक्म है और मियाँ-बीवी को कौन-कौन से ज़रूरी आदाब का ख़याल रखना चाहिए।
मसअला :- मियाँ बीवी का सोहबत के वक्त एक दूसरे की शर्मगाह को मस करना बेशक जाइज़ है बल्कि नेक नियत से हो तो मुस्तहब व सवाब है” ।(फतावा-ए-रज़वीया जिल्द 5 सफा 570, और जिल्द 9 सफा 72)
लेकिन सोहबत के वक़्त मर्द व औरत ने एक दूसरे की शर्मगाह नहीं देखना चाहिये क्योंकि इसके बहुत से नुकसानात है ।
हदीस :- उम्मुल मोमेनीन हज़रत आएशा सिद्दीका रजि अल्लाहो तआला अन्हा फरमाती हैं कि-“हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम की वफ़ात हो गई लेकिन न कभी आप ने मेरा सत्र (शर्मगाह को देखा और न मैंने आप का सत्र (शर्मगाह को ) देखा” ।(इब्ने माजा शरीफ, जिल्द 1, बाब नं. 616, हदीस नं. 1991, सफा 538)
सोहबत के आदाब में से एक येह भी है कि सोहबत के दौरान मर्द औरत की शर्मगाह की तरफ न देखे ।
हदीस:- हज़रत इब्ने अदी रजि अल्लाहो अन्हो हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रजि अल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत करते हैं—हज़रत इब्ने अब्बास (र.अ)ने फरमाया -“तुम में से कोई अपनी औरत से सोहबत करे तो उस की शर्मगाह को न देखे क्योंकि इस से आँखों की बीनाई यानी रौशनी ख़त्म हो जाती है”।यानी आदमी आँखो से अंधा हो जाता है। (हाशिया, मुस्नदे इमामे आजम, सफा नं. 225)
आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ रजिअल्लाहो तआला अहो नकल फरमाते हैं कि-“सोहबत के वक्त शर्मगाह देखने से हदीस में मुमानियत फरमाई और फरमाया– मोह अंधे होने का सबब होता है। ओलमा ने फरमाया है कि इस से अंधे होने का सबब या वोह औलाद अंधी हो जो उस सोहबत से पैदा हो, या मआजल्लाह दिल का अंधा होना के सब से बदतर है” । (फतावा-ए-रज़वीया, जिल्द 5 सफा 570)
ये भी पढ़ें: गुस्ल कब फ़र्ज़ होता है? | हैज़, निफ़ास, एहतिलाम और हमबिस्तरी के इस्लामी अहकाम
“कानूने शरीअत” में है कि- “औरत की शर्मगाह की तरफ़ नज़र न करे क्योंकि इस से निसयान यानी भूलने की बीमारी पैदा होती है और नज़र भी कमज़ोर होती है” ।
हमबिस्तरी के दौरान बात करना
सोहबत के दौरान बात चीत न करे ख़ामोशी से सोहबत करे, इमामे अहलेसुन्नत आला हज़रत रजि अल्लाहो तआला अन्हु इरशाद फ़रमाते हैं- “सोहबत के दौरान बात चीत करना मकरूह है बल्कि बच्चे के गूंगे (मूक्के, बेजुबान ) या तोतले होने का ख़तरा है”।(फतावा-ए-रज़वीया, जिल्द 9 सफा 76)
पिस्तान (स्तन, Breasts) चुमना
सोहबत करते वक्त औरत के पिस्तान (स्तन) चूमने या चूसने में कोई हर्ज नहीं, लेकिन ख़्याल रहे कि औरत का दूध हलक में न जाएं। अगर हल्क में दूध आ गया तो फौरन थूक दें जान बूझ कर दूध पीना ना जाइज़ व हराम है ।
“फ़्तावा-ए-रज़वीया” में आला हज़रत इमामे अहलेसुन्नत इमाम अहमद रज़ा रजिअल्लाहो तआला अन्हो नकल फरमाते है— “सोहबत के वक्त अपनी बीवी के पिस्तान मुँह में लेना जाइज़ है बल्कि नेक नियत से हो तो सवाब की उम्मीद है,
ये भी पढ़ें: क्या हैज़ (माहवारी) वाली औरत की गोद में कुरआन पढ़ सकते हैं? | सही हदीस से जानिए हक़ीक़त
जैसा कि हमारे इमामे आज़म रजिअल्लाहो तआला अन्हु ने मियाँ बीवी का एक दूसरे की शर्मगाह को मस करने के बारे में फ़रमाया यानी मैं उम्मीद करता हूँ कि वोह दोनों उस पर अज्र (सवाब) दिये जाएगे” हॉ अगर औरत दूध वाली हो तो ऐसा चूसना नही चाहिये ,
जिससे दूध हलक में चला जाए और अगर मुँह में आ जाए और हलक में न जाने दे तो हर्ज नहीं कि औरत का दूध हराम है नजिस नहीं, अलबत्ता रोज़े में इस ख़ास सूरत से परहेज़ करना चाहिये” ।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
कुछ लोगों में यह गलत फहमी है कि सोहबत करते हुए अगर औरत का दूध मर्द के मुँह में चला गया तो औरत मर्द पर हराम हो जाती है और खुद ब खुद तलाक (Divorce) हो जाती है, येह बात गलत है इस की शरीअत में कोई हैसियत नहीं।
“कानूने शरीअत” में है कि- “मर्द ने अपनी औरत की छाती (स्तन) चूसा तो निकाह में कोई ख़राबी नही आई चाहे दूध मुँह में आ गया हो बल्कि हलक से उतर गया हो तब भी निकाह न टूटेगा, लेकिन हलक में जान बूझ कर लेना जाइज़ नही” Donate Now
FAQ – हमबिस्तरी के दौरान शर्मगाह देखने के बारे में
सवाल 1: हमबिस्तरी के दौरान मियाँ-बीवी का एक-दूसरे की शर्मगाह देखना कैसा है?
जवाब: इस मसले में उलमा-ए-किराम ने अलग-अलग रिवायतों और फ़िक़्ही किताबों की रोशनी में चर्चा की है। इसलिए इसे समझने के लिए किसी भरोसेमंद आलिम या मुस्तनद फ़िक़्ही किताब की तरफ़ रुजू करना बेहतर है।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
सवाल 2: क्या मियाँ-बीवी एक-दूसरे की शर्मगाह को छू सकते हैं?
जवाब: निकाह के दायरे में मियाँ-बीवी के लिए एक-दूसरे को छूना जायज़ है। आपके दिए हुए हवाले के मुताबिक़, नेक नियत से इसे सवाब का सबब भी बताया गया है।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
सवाल 3: हमबिस्तरी के दौरान बातचीत करना कैसा है?
जवाब: आपके दिए हुए फ़िक़्ही हवाले में हमबिस्तरी के दौरान गैर-ज़रूरी बातचीत से बचने और ख़ामोशी के साथ हमबिस्तरी करने को बेहतर बताया गया है।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
सवाल 4: क्या हमबिस्तरी के दौरान बीवी के सीने को चूमना जायज़ है?
जवाब: निकाह के रिश्ते में मियाँ-बीवी के बीच मोहब्बत और क़ुर्बत जायज़ है। अगर बीवी दूध पिला रही हो तो इस बात का ख़ास ख़याल रखा जाए कि उसका दूध जान-बूझकर निगला न जाए।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
सवाल 5: अगर बीवी का दूध शौहर के मुँह में आ जाए तो क्या निकाह टूट जाता है?
जवाब: नहीं, इससे निकाह नहीं टूटता और तलाक़ भी नहीं होती। हालांकि जान-बूझकर दूध पीने से बचना चाहिए।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
सवाल 6: क्या हमबिस्तरी के भी इस्लामी आदाब होते हैं?
जवाब: जी हाँ। इस्लाम में मियाँ-बीवी के रिश्ते के लिए भी हया, पर्दा, पाकीज़गी, दुआ और एक-दूसरे के हक़ का ख़याल रखने की तालीम दी गई है।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
सवाल 7: हमबिस्तरी से जुड़े मसाइल कहाँ से सीखने चाहिए?
जवाब: ऐसे मसाइल किसी भरोसेमंद आलिम-ए-दीन से पूछकर या मुस्तनद फ़िक़्ही किताबों से सीखने चाहिए, ताकि गलत जानकारी या अधूरी बात पर अमल न हो।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
सवाल 8: क्या इन मसाइल को सीखना ज़रूरी है?
जवाब: जी हाँ, शादीशुदा ज़िंदगी से जुड़े ज़रूरी शरई मसाइल का इल्म हासिल करना फ़ायदेमंद और अहम है, ताकि इंसान हलाल-हराम और जायज़-नाजायज़ की सही पहचान कर सके।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Hambistari Ke Dauran Sharmgah Dekhna
खुदा हाफिज़…..
