सूरज
सूरज अल्लाह तआला की बनाई हुई एक जबरदस्त मख़्लूक़ है। उस से हमें रोशनी और गर्मी हासिल होती है, वह रोजाना मशरिक से निकलता है और मगरिब में डूबता है। लेकिन अल्लाह तआला क़यामत के क़रीब उसे अपनी कुदरत से मशरिक के बजाए मगरिब से निकालेगा, उस की लम्बाई चौड़ाई लाखों मील है और वजन के एतेबार से जमीन के मुक़ाबले में लाखों गुना ज्यादा है।
इतने वज़नी और बड़े सूरज का मुकर्ररा निज़ाम के तहत चलाना और करोड़ों मील की दूरी से पूरी दुनिया को रोशनी और गर्मी अता करना अल्लाह तआला की कुदरत की बड़ी निशानी है।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
