जब इंसान सोता है तो फरिश्ता शैतान से कहता है कि फरमाते हैं अपना सहीफा दे जिसमें गुनाह लिखे हुए हैं।
हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मैं उस शख़्स को पहचानता हूँ जो सबसे आख़िर में जहन्नम से निकलेगा और सबसे आख़िर में जन्नत में जाएगा। यह एक वह शख़्स होगा जिसे खुदा के सामने लाया जाएगा, अल्लाह तआला फरमाएगा इसके बड़े-बड़े गुनाहों को छोड़कर छोटे-छोटे गुनाहों के बारे में इससे पूछताछ करो, चुनांचे उससे सवाल होगा कि फ़्लां दिन तूने फ़्लां काम किया था?
फ़्लां दिन फ़्लां काम किया था? यह एक का भी इंकार न कर सकेगा, इक़रार करेगा। आख़िर में कहा जाएगा कि तुझे हमने हर गुनाह के बदले नेकी दी अब तो उसकी बांछें खिल जाएंगी और कहेगाः ऐ मेरे परवरदिगार ! मैंने और भी बहुत से बुरे
आमाल किए हैं जिन्हें यहाँ न पा रहा। यह फरमाकर हुज़ूर अक़्दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इस क़द्र हंसे कि आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मसूढ़े देखे जाने लगे।(मुस्लिम शरीफ)
आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि जब इंसान सोता है तो फरिश्ता शैतान से कहता है कि मुझे अपना सहीफा जिसमें उसके गुनाह लिखे हुए हैं दे। वह दे देता है तो एक-एक नेकी के बदले दस-दस गुनाह वह उसके सहीफे से मिटा देता है और उन्हें नेकियाँ लिख देता है, तो तुममें से जो भी सोने का इरादा करे तो वह 33 बार अल्लाहु अक्बर और 34 बार अलहम्दु लिल्लाह कहे और 33 बार सुब्हानल्लाह कहे, यह मिलाकर सौ मर्तबा हो गये। (इब्ने अबिद-दुनिया)(इब्ने कसीर, हिस्सा 4, पेज 21)
हज़रत सलमान फारसी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि इंसान को क़ियामत के दिन नाम-ए-आमाल दिया जाएगा। वह पढ़ना शुरू करेगा तो उस पर उसकी बुराइयाँ दर्ज होंगी, जिन्हें पढ़कर यह कुछ नाउम्मीद सा होने लगेगा। उसी वक़्त उसकी नज़र नीचे की तरफ पड़ेगी तो अपनी नेकियाँ लिखी हुई पाएगा जिससे कुछ ढारस बंधेगी ! अब दोबारा ऊपर की तरफ देखेगा तो वहाँ की बुराइयों को भी भलाइयों से बदला हुआ पाएगा।
खूबसूरत वाक़िआ:-जिन्न से हिफ़ाज़त का अज़ीम राज़।
हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि बहुत से लोग खुदा के सामने आएंगे जिनके पास बहुत कुछ गुनाह होंगे। पूछा गया वह कौन से लोग हैं? आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया वह जिनकी बुराइयों को अल्लाह तआला भलाइयों से बदलेगा ।(तफ्सीर इब्ने कसीर, हिस्सा 2, पेज 21)
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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