26/08/2026

हमबिस्तरी करने से पहले ख़ुशबू का इस्तेमाल।Hambistari karne se pahle Khushbu ka istemal.

सोहबत (हमबिस्तरी) से पहले खुशबू लगाना बेहतर है। खुशबू सरकारे मदीना सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम को बहुत पसंद थी । आप (स.व)हमेशा ख़ुशबू का …

हालते हैज़ में सोहबत (हमबिस्तरी) हराम ।Halte Haiz me Sohbat(Hambistari)Haram.

जब औरत हैज़ (माहवारी) की हालत में हो तो उस से सोहबत करना सख्त गुनाहे कबीरा, ना जाइज़ व सख्त हराम हराम हराम है। इस …

हज़रत हाजराؓ और हज़रत इस्माईलؑ का वाक़िआ: वीरान मक्का में कैसे निकला ज़मज़म का चश्मा?Hazrat Hajra (RA) Aur Hazrat Ismail (AS) Ka Waqia: Veeran Makkah Mein Kaise Nikla Zamzam Ka Chashma? Amazing story

Hazrat Hajra (RA) Aur Hazrat Ismail (AS) Ka Waqia हज़रत हाजरा रज़ियल्लाहु अन्हा और उनके साहबज़ादे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम का वाक़िआ ईमान, सब्र, तवक्कुल और …

कुर्बानी का सुन्नत तरीका: Qurbani ka sunnat tariqa.

नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: ईदुल अज़्हा के दिन कोई नेक अमल अल्लाह पाक के नज़दीक कुर्बानी का खून बहाने से ज़्यादा महबूब …

क़ियामत के दिन आपके हाथ, पैर और ज़मीन कैसे गवाही देंगे? | हदीस और क़ुरआन की रौशनी में|Qiyamat Ke Din Aapke Haath, Pair Aur Zameen Kaise Gawahi Denge? | Hadees Aur Quran Ki Roshni Mein

Qiyamat Ke Din Aapke Haath, Pair Aur Zameen Kaise Gawahi Denge? क्या आपने कभी सोचा है कि क़ियामत के दिन इंसान के खिलाफ सबसे बड़े …

हज़रत बिलाल हब्शी (रज़ि.) की ज़िंदगी: ईमान, सब्र और अज़ान की दिल छू लेने वाली कहानी |Hazrat Bilal Habshi (RA) Ki Zindagi: Imaan, Sabr Aur Azaan Ki Dil Chhoo Lene Wali Kahani amazing story

Hazrat Bilal Habshi (RA) Ki Zindagi: Imaan, Sabr हज़रत बिलाल हब्शी (रज़ि.) इस्लाम के सबसे बड़े सहाबा में से एक हैं। उनकी ज़िंदगी ईमान, सब्र …

500 साल की इबादत भी रद्द हो सकती है!500 Saal Ki Ibadat Bhi Radd Ho Sakti Hai!

  अल्लाह वालों का ख़ौफ़ कुछ और तरह का होता है। उनको तकलीफें तो छोटी नज़र आती हैं। उनके दिल में एक बड़ी ग़मनाक कैफियत …

माँ अपने बच्चे को आग में नहीं डाल सकती। Maa Apne Bache Ko Aag Me Nahi Daal Sakti.

यहाँ एक नुक्ता समझने का यह है कि जो परवर्दिगार दूसरों की नाराज़गी को बरदाश्त नहीं करता, वह अगर खुद किसी बात पर नाराज़ हो …

बेटियाँ अल्लाह की रहमत हैं, बोझ नहीं | Betiyan Allah Ki Rehmat Hain, Bojh Nahi.

एक बुज़ुर्ग बयान फरमाते हैं कि मैं ने एक शख़्स को मस्जिद के एक कोने में आह व ज़ारी के साथ गिड़गिड़ा कर आजज़ी से …