इफ़तार का बयान । Iftar Ka Bayan
जब बंदा दिन भर सब्र व ज़ब्त का मुज़ाहेरा करके रोज़ा को मुकम्मल करता है और मगरिब का वक़्त आता है तो वह हलाल चीजें …
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जब बंदा दिन भर सब्र व ज़ब्त का मुज़ाहेरा करके रोज़ा को मुकम्मल करता है और मगरिब का वक़्त आता है तो वह हलाल चीजें …
जंगे बद्र का सबबः “अम्र बिन अल हज़रमी” के कत्ल से कुफ्फारे कुरैश में फैला हुआ जबर्दस्त इशतेआल था जिस से हर काफिर की जुबान …
जिन चीज़ों से रोज़ा नहीं टूटता :- मस्अलाः- भूल कर खाना खाया, पिया, जिमा किया रोजा न टूटा। ख्वाह रोज़ा फर्ज़ हो या नफिल। मस्अला …
ज़कात हर उस मुसलमान पर वाजिब है जो आकिल, बालिग, आज़ाद, मालिके निसाब हो और निसाब का पूरे तौर पर मालिक हो, निसाबे दीन और …
मस्नून है कि 29 शाबानुल मुअज़्ज़म को बाद नमाज़े मगरिब चाँद देखा जाए, चाँद नज़र आ जाए तो दूसरे दिन से रोज़ा रखा जाए और …
हज़रत बरा बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हुमा फ़रमाते हैं कि हम लोग नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास बैठे हुए थे कि इतने में …
एक रोज़ हुज़ूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम मस्जिद से बाहर तशरीफ़ लाये तो आप सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने देखा कि शैतान दरवाज़े पर खड़ा …
अल्लाह तआला हकीमे मुतलक है और हर काम हिकमत से खाली नहीं होता। अल्लाह तआला ने जो कुछ भी पैदा फरमाया है, मब्नी बर हिकमत …
राहत-ए-क़ब्र की फज़ीलत :- नेक और आबिद मोमिनीन जब मुनकिर नकीर के सवाल के जवाबात दे चुकेंगे तो उनके लिये हुक्म होगा कि उनकी क़ब्र …
इश्के रसूल सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम में सहाबियात रज़ियल्लाहु अन्नाहुम ने भी आला और नुमाया मिसालें पेश कीं। उनके सीने इश्के नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम …