हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की खिलाफत। Hazrat Ali Raziallahu anhu ki khilafat.
सैयदना उस्मान गनी रजियल्लाहु अन्हु की शहादत के बाद ही बलवाई बुरी तरह से मदीना मुनव्वरा पर छा गये थे। ऐसा लगता था कि मदीना …
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Islamic History Islamic History, Ghazwat, Khilafat aur Islami tareekh ke aham waqiat Hindi me.
सैयदना उस्मान गनी रजियल्लाहु अन्हु की शहादत के बाद ही बलवाई बुरी तरह से मदीना मुनव्वरा पर छा गये थे। ऐसा लगता था कि मदीना …
शुजाअत व दिलेरी में सारे अरब में कोई भी हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु का मुकाबला नहीं कर सकता था। आपकी गैर मामूली जुर्रात ही की …
आपका शजरए नसब यह है अली इब्न अबी तालिब बिन अब्दुल मुत्तलिब बिन हाशिम बिन अब्द मोनाफ् बिन कसा बिन कलाब बिन मर्रा बिन कअब …
शरीअत ने जिमाअ के लिये कोई खास वक़्त मुकर्रर नहीं किया है। हाँ, बअज़ शरई अवारिज़ की मौजूदगी में जिमाअ करना मना है। जैसेः रोज़ा, …
नमाज़े जनाज़ा की नियत :- नियत की मैंने नमाज़े जनाज़ा पढ़ने की मय चार तकबीरों के, सना वास्ते अल्लाह तआला के, दुरूद शरीफ़ वास्ते रसूलुल्लाह …
(1) मुहर्रम (2) सफर (3) रबीउल अव्वल (4) रबीउल आखिर (5) जुमादल उला (6) जुमादल उखरा (7) रजब (8) शाबान (9) रमज़ान (10) शव्वाल (11) …
ज़मानए क़ह़त़ में रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भूक महसूस की तो बिन्ते रसूल हज़रते सय्यिदतुना फातिमा बतूल रजियल्लाहु अन्हा ने सीनी में एक …
फ़ज़ाइले नमाज़ :- कुरआनो हदीस में नमाज़ की बहुत ज़्यादा फ़ज़ीलत बयान की गई है, चुनाँचे खुदाए तआला इरशाद फ़रमाता है, बेशक नमाज़ बे हयाई …
बीमार की नमाज़ का बयान: अगर बीमारी के सबब खड़े होकर नमाज़ नहीं पढ़ सकता कि मर्ज़ बढ़ जाएगा या देर में अच्छा होगा या …
बिला उज़्रे शरई नमाज़ क़ज़ा करना सख़्त गुनाह है जल्द से जल्द अदा करना और तौबह करना फ़र्ज़ है। मकरूह वक़्त के अलावा किसी वक़्त …