आज की औरतें जितना वक़्त रोज़ाना अपने ज़ाहिरी जिस्म को खूबसूरत बनाने के लिए लगाती हैं, काश! कि इससे आधा वक्त अपने बातिन को खूबसीरत बनाने के लिए खर्च कर देतीं तो मेरे अंदाज़े से जहन्नम से बचकर जन्नत की हकदार बन जातीं।
अपने ज़ाहिर को खूबसूरत बनाने के लिए हर वक़्त सोचती फिर रही होती हैं मगर अपने बातिन की शक्ल क्या है? जिसको परवरदिगार देखता है उसकी तरफ गौर नहीं होता। वह सरापा जिस पर बंदों की नज़रें पड़नी हैं,
मेरी बहन तू उसे इतना संवारती फिरती है जबकि तेरे दिल पर तेरे रब की निगाहें पड़ती हैं, तुझे संवारने की फ़िक्र नहीं। जिस घर के अंदर तेरे दुनिया के मेहमान आते हैं तूने उसको नगीने की तरह चमका रखा है और तेरे दिल में तेरा परवरदिगार मेहमान बनकर आता है और तुझे इस घर की परवाह नहीं होती। वहाँ ख़्वाहिशें होती हैं, शहवतें होती हैं, वहाँ निजासत की बदबू होती है और हमें परवाह नहीं होती कि हमारे दिलं की क्या हालत बन गई।
लिहाज़ा अपने जिस्म को ज़रूर खूबसूरत बनाएं मगर इससे सीरत को खूबसूरत बनाइए। अल्लाह तआला की नज़र इंसान की सीरत पर होती है।
मेरी बहन! मेरी बातें ज़रा दिल की तवज्जेह से सुन लेना। याद रखना कद बगैर ऊँची हील के भी नज़र आ सकता है अगर इंसान की अपनी शख़्सियत बुलंद हो, इंसान की आँखें बगैर सुरमे के भी खूबसूरत लग सकती हैं अगर उन आँखों में हया हो, इंसान की पलकें बगैर मसकारें के भी दिलफ्रेब बन सकती हैं अगर वे पलकें शर्म से झुकी हुई हों,
इंसान की पेशानी बगैर बिंदियों के भी खूबसूरत लगती हैं अगर उस पर सज्दों के निशान हों तो क्यों न तू अपने आपको अल्लाह के हवाले कर दे। रब के महबूब सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्ल्म की सुन्नतों पर अमल कर ले, अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त तुझे लोगों में महबूबियत अता फरमा देंगे,
खूबसूरत वाक़िआ: ज़िंदगी बदल देने वाली एक मिसाल|Zindagi Badal Dene wali ek misal
लोग तेरे सामने बिछते फिरेंगे, तुझे दुनिया में भी इज़्ज़त मिलेगी। रब्बे करीम हमें इज़्ज़तों भरी ज़िंदगी नसीब फरमा दे। हमारी कोताहियों को माफ फरमाकर हमें अपने पसंदीदा बंदों में शामिल फरमा दे। आमीन सुम्मा आमीन।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
