Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
अल्लाह तआला ने इंसान को इस दुनिया में क्यों पैदा किया? हमारी ज़िंदगी का असली मक़सद क्या है? क्या सिर्फ़ खाना, कमाना और दुनिया की ज़िंदगी गुज़ारना ही इंसान की मंज़िल है, या इसके पीछे कोई बड़ा राज़ छुपा हुआ है? इन सवालों का जवाब हमें क़ुरआन, हदीस और बुज़ुर्गाने दीन की तालीमात में मिलता है।
इस बयान में हम जानेंगे कि अल्लाह तआला ने इंसान की पैदाइश का असली मक़सद क्या रखा, मुहब्बत और मारिफ़त का आपस में क्या रिश्ता है, और कैसे अल्लाह ने हर मख़लूक के दिल में मुहब्बत पैदा फ़रमाई। साथ ही बाप-बेटी की मुहब्बत जैसे दिल को छू लेने वाले वाक़ियात के ज़रिए यह समझेंगे कि सच्ची मुहब्बत भी अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है।
अगर आप भी अपनी ज़िंदगी का असली मक़सद समझना चाहते हैं और अल्लाह की पहचान (मारिफ़त) हासिल करने की अहमियत जानना चाहते हैं, तो इस पूरे बयान को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। शायद यही इल्म आपकी ज़िंदगी की सोच बदल दे और आपको अपने रब के और क़रीब कर दे।
हदीसे-कुदसी में अल्लाह तआला का इरशाद हैः मैं एक छुपा हुआ ख़ज़ाना था। मैंने पसन्द किया कि मैं पहचाना जाऊँ। पस मैंने मख्लूक को पैदा कर दिया।
मख़्लूक़ के पैदा होने का बुनियादी सबब यह रहा कि अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त को यह बात पसन्द आयी कि लोग मेरी मारिफ़त (पहचान) हासिल करें। मेरी बड़ाईयों से वाकिफ हों। चूँकि मख़्लूक की पैदाईश का सबब मुहब्बत बनी इसलिए हमारे बड़े मुहब्बत को पहला दर्जा देते हैं।
यह मुहब्बत अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त ने अपनी सारी मख़्लूक में तकसीम फ़रमाई। हर मख़्लूक ने अपनी-अपनी ताकत और सलाहियत के मुताबिक उसमें से हिस्सा पाया। यह मुहब्बत जानदार चीज़ों को भी मिली और जो गैर-जानदार हैं उनको भी मिली।
पूरी दुनिया में मुहब्बत का राज है। आपने देखा होगा कि लोहा मकनातीस की तरफ बेइख़्तियार खिंचता है। यह चीज़ों में मुहब्बत की दलील है। जो भी चीज़ ऊपर से फेंकें वह ज़मीन पर गिरती है। यह जमादात यानी बेजान चीज़ों में मुहब्बत की दलील है।
परिन्दों ने हिस्सा पाया, जानवरों ने हिस्सा पाया, इनसानों ने हिस्सा पाया, मिल-जुलकर रहना था। अगर दिलों में कोई ताल्लुक ही न होता, लोग एक दूसरे से अजनबी होते, एक की तकलीफ़ का दूसरा एहसास ही न करता, कोई किसी के साथ हमदर्दी न करता तो यह ज़िन्दगी इनसान के लिए गुज़ारनी मुश्किल हो जाती।
इस मुहब्बत के नमूने आपको घर-घर में देखने को मिलते हैं। हर बेटी को बाप से मुहब्बत होती है। बाप बीमार है, बेटी सारी रात पास कुर्सी पर बैठी जाग रही है, कि मेरे अब्बू आँख खोलेंगे तो मैं उन्हें दवाई पेश करूँगी।
खाने को कुछ माँगेंगे तो मैं खाना हाज़िर करूँगी। वह अपने आपको अपने बाप की बाँदी ख़ादिमा, सेविका समझती है। और इस रात भर की तकलीफ उठाने को वह अपना फर्ज़ और ज़िम्मेदारी समझती है।
बल्कि बहुत सी बार तो उसके दिल से दुआयें निकलती हैं कि मैं बीमार हो जाती, अल्लाह तआला मेरे अब्बू को शिफा अता कर देते। यह उस मुहब्बत की वजह से है जो अल्लाह ने बेटी के दिल में बाप के लिये डाल दी है।
वालिद की मुहब्बत जिस तरह बेटी के दिल में है उसी तरह बेटी की मुहब्बत अल्लाह तआला ने वालिद के दिल में डाली। इसका मन्ज़र आप उस वक़्त देखा करें जब किसी जवान बच्ची को घर से रुख़्सत किया जा रहा होता है।
उसका बाप अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा उसके दहेज पर ख़र्च कर देता है। और जब यह रुख़्सत हो रही होती है तो बाप की आँखों से आँसू जारी होते हैं। देखने से तो उसका बोझ कम हो रहा है, उसके सर से एक फरीज़ा अदा हो रहा है,
लेकिन वह समझता है कि यह मेरे जिगर का टुक्ड़ा है। मैंने इतनी मुहब्बतों से पाला। मालूम नहीं आगे इसकी ज़िन्दगी कैसी होगी। हमने बेटी और बाप को ऐसे लिपट कर रोते देखा कि शायद लोग किसी की मौत पर भी इतना न रोते हों।
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तो जुदाई के वक़्त बाप और बेटी का रोना इस मुहब्बत की दलील है।
FAQ – सवाल और जवाब
1. अल्लाह तआला ने इंसान को क्यों पैदा किया?
अल्लाह तआला ने इंसान को अपनी इबादत करने, अपनी पहचान (मारिफ़त) हासिल करने और अपनी रज़ा के मुताबिक ज़िंदगी गुज़ारने के लिए पैदा किया।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
2. मारिफ़त (Ma’rifat) का क्या मतलब है?
मारिफ़त का मतलब है अल्लाह तआला को उसकी सिफ़ात, कुदरत और रहमत के ज़रिए पहचानना और दिल से उसकी अज़मत को मानना।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
3. क्या मुहब्बत भी अल्लाह की नेमत है?
जी हाँ। इस्लामी तालीम के मुताबिक पाक और जायज़ मुहब्बत अल्लाह तआला की बहुत बड़ी नेमत है, जो इंसानों और दूसरी मख़्लूक में भी रखी गई है।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
4. माता-पिता और औलाद की मुहब्बत हमें क्या सिखाती है?
यह मुहब्बत अल्लाह की रहमत और हिकमत की निशानी है। इससे हमें रहम, ख़िदमत, एहसान और रिश्तों की अहमियत समझ में आती है।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
5. क्या हर रिश्ते की बुनियाद मुहब्बत होनी चाहिए?
जी हाँ। लेकिन वह मुहब्बत शरीअत की हदों के अंदर, अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत के साथ होनी चाहिए।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
6. इस्लाम में सबसे बड़ी मुहब्बत किससे होनी चाहिए?
सबसे पहले अल्लाह तआला से, फिर उसके प्यारे रसूल हज़रत मुहम्मद ﷺ से, और उसके बाद जायज़ तौर पर अपने वालिदैन, औलाद और दूसरे रिश्तेदारों से।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
7. क्या सिर्फ इंसानों में ही मुहब्बत होती है?
नहीं। अल्लाह तआला ने अपनी हिकमत से जानवरों और दूसरी मख़्लूक में भी मुहब्बत और अपनापन रखा है, जिसकी मिसालें हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में देखते हैं।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
8. इस बयान से हमें क्या सबक मिलता है?
हमें अल्लाह की पहचान हासिल करनी चाहिए, उसके हुक्मों पर अमल करना चाहिए, वालिदैन और रिश्तेदारों के हक़ अदा करने चाहिए, और अपनी ज़िंदगी को मुहब्बत, रहमत और नेक अख़लाक़ के साथ गुज़ारना चाहिए।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Allah Ne Insaan Ko Kyon Paida Kiya?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
