Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
अक्सर शादीशुदा लोगों के मन में यह सवाल आता है कि माहवारी (हैज़) के दिनों में मियाँ-बीवी के बीच बातों की इजाज़त है और किन बातों से बचना चाहिए? कई लोग सही जानकारी न होने की वजह से या तो ज़रूरत से ज़्यादा सख़्ती करते हैं, या फिर अनजाने में ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं जो शरीअत के खिलाफ होती हैं।
इस आर्टिकल में हम कुरआन करीम और सही हदीस की रोशनी में जानेंगे कि हैज़ के दौरान मियाँ-बीवी के रिश्ते की क्या हद है, कौन-से काम जायज़ हैं, कौन-से हराम हैं और इस्लाम इस बारे में क्या हिदायत देता है। अगर आप इस मसले की सही और आसान जानकारी चाहते हैं, तो इस लेख को आखिर तक ज़रूर पढ़ें।
हदीस
हज़रत ज़ैद बिन असलम रहमतुल्लाहि अलैहि (तबिई) का बयान है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक शख़्स ने दरियाफ्त किया कि जब मेरी बीवी के माहवारी के दिन हों उस वक़्त मेरे लिए उसके बीवी होने की हैसियत से उसके साथ ताल्लुकात की किस हद तक इजाज़त है? आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि उसके जिस्म पर तहबन्द बाँध दो, फिर उसके ऊपर के हिस्से में मशगूल हो सकते हो। यानी जैसे चूम सकते हो।(मिश्कात शरीफ पेज 56)
तशरीह
माहवारी के ज़माने के मुताल्लिक जो अहकाम हैं उनमें एक यह हुक्म भी है कि औरत का शौहर उससे लज़्ज़त हासिल न करे। लेकिन लज़्ज़त हासिल करने की कई सूरतें हैं, और हुक्म भी अलग-अलग है। मियाँ-बीवी का जो एक ख़ास काम है जिसमें शर्म की सब हदें टूट जाती हैं, यह माहवारी के ज़माने में बिल्कुल हराम है। अगर कभी ऐसा हो जाये तो तौबा करें। कुरआन शरीफ में इरशाद हैः
तर्जुमाः औरतें जब तक हैज़ से पाक न हो जायें अपने मख़्सूस काम के लिए उनके करीब तक न जाओ। (सूरः ब-करः आयत 222)
बाकी रहा माहवारी में हैज़ वाली औरत के साथ उठना-बैठना, खाना-पीना, तो यह सब जायज़ है। मगर इस बात का ख़्याल लाज़िम है कि नाफ से. लेकर घुटनों तक औरत के ज़िस्म का जो हिस्सा है, माहवारी के दिनों में उसका शौहर उस हिस्से को हाथ न लगाये, और न कोई दूसरा जिस्मानी अंग उससे छुवाए।
नाफ़ से ऊपर और घुटनों से नीचे औरत के जिस्म का जो हिस्सा है, माहवारी के दिनों में शौहर उसको हाथ लगा सकता है और चूम सकता है। ऊपर वाली हदीस में जो यह फरमाया कि “हैज़ की हालत में अपनी बीवी को तहबन्द बंधवाकर उससे ऊपर वाले हिस्से में मशगूल हो सकता है” इसका मतलब यह है कि चूम सकता है। सर, सीना, कमर छू सकता है।
मसलाः जो तफसील अभी बयान हुई है, औरत पर लाज़िम है कि ‘मर्द को उसके ख़िलाफ़ न करने दे। और ख़ास काम तो बिल्कुल ही न होने दे। अगर औरत की रज़ामन्दी से गुनाह का काम हो गया तो वह भी गुनाहगार होगी। जहाँ तक मुमकिन हो मर्द को गुनाह से बाज़ रखे।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और जवाब
1. क्या माहवारी (हैज़) के दौरान मियाँ-बीवी एक साथ बैठ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ। इस्लाम में हैज़ वाली औरत के साथ बैठना, बात करना, खाना-पीना और सामान्य व्यवहार करना पूरी तरह जायज़ है।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
2. क्या हैज़ के दिनों में शौहर अपनी बीवी को छू सकता है?
जवाब: जी हाँ। नाफ़ (नाभि) से ऊपर और घुटनों से नीचे के हिस्से को छूना, प्यार करना और मोहब्बत का इज़हार करना जायज़ है। लेकिन शरीअत की बताई हुई हदों का ख़्याल रखना ज़रूरी है।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
3. क्या माहवारी के दौरान हमबिस्तरी करना जायज़ है?
जवाब: नहीं। हैज़ की हालत में हमबिस्तरी (जिमा) करना कुरआन और सही हदीस की रोशनी में हराम है। अगर ऐसा हो जाए तो अल्लाह तआला से सच्चे दिल से तौबा करनी चाहिए।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
4. क्या हैज़ वाली औरत का खाना या पानी इस्तेमाल किया जा सकता है?
जवाब: जी हाँ। उसका बनाया हुआ खाना खाना, उसके इस्तेमाल किए हुए बर्तन या पानी का उपयोग करना बिल्कुल जायज़ है। वह नापाक नहीं होती।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
5. क्या माहवारी वाली औरत के साथ एक ही बिस्तर पर सो सकते हैं?
जवाब: जी हाँ। एक ही बिस्तर पर सोना जायज़ है, लेकिन हमबिस्तरी से बचना ज़रूरी है।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
6. क्या हैज़ वाली औरत को अछूत समझना सही है?
जवाब: बिल्कुल नहीं। इस्लाम में हैज़ वाली औरत को अछूत नहीं माना गया है। उसके साथ सम्मान और मोहब्बत से पेश आने की शिक्षा दी गई है।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
7. क्या निफ़ास (बच्चे की पैदाइश के बाद आने वाला ख़ून) का भी यही हुक्म है?
जवाब: जी हाँ। निफ़ास के दौरान भी वही अहकाम लागू होते हैं जो हैज़ के दौरान होते हैं।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
8. क्या शौहर और बीवी को इन मसाइल का इल्म होना ज़रूरी है?
जवाब: जी हाँ। हर शादीशुदा मुसलमान के लिए निकाह और मियाँ-बीवी से जुड़े शरीअत के अहकाम जानना बहुत ज़रूरी है, ताकि वह सही तरीके से अपनी ज़िंदगी गुज़ार सके और गुनाह से बच सके।
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अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Mahawari Ke Dino Mein Miya-Biwi Ke Rishte Ki Kya Had Hai?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
