27/01/2026
हज़रत अली रजिअल्लाहो अन्हो की ज़िन्दगी। 20250509 005231 0000

हज़रत अली रज़िअल्लाहो अन्हो की ज़िन्दगी। Hazrat Ali Raziallahu anhu ki zindagi.

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Hazrat Ali Raziallahu anhu ki zindagi.
Hazrat Ali Raziallahu anhu ki zindagi.

आपका शजरए नसब यह है अली इब्न अबी तालिब बिन अब्दुल मुत्तलिब बिन हाशिम बिन अब्द मोनाफ् बिन कसा बिन कलाब बिन मर्रा बिन कअब बिन लुई बिन ग़ालिब बिन फहरा इब्न मालिक बिन नज़र इब्न कनाना।

अबुल हसन व अबू तोराब कुनीयत हैं जो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का अता करदा है। माँ का नाम फातमा बिन्त असद बिन हाशिम है। आप बच्चों में सबसे पहले ईमान लाये।

अशरए मोबश्शिरा में से एक हैं। सैयदतुन निसा अलआलमीन सैय्यदा फातिमा रजियल्लाहु अन्हा के शौहर मोहतरम, रसूलल्लाह के दामाद, साबिकीन अव्वलीन में से एक। आपने अपने बचपन में भी बुत परस्ती न की। हिजरत की रात अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी जगह लिटा दिया कि लोगों की अमानतें वगैरह उनके हवाले कर के फिर हिजरत करना।

नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के साथ तमाम ग़ज़वात में शरीक हुए। सिवाए तबूक के क्योंकि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इस मौके पर उन्हें मदीना का ख़लीफा बना दिया था।

तमाम गज़वात में नुमायाँ खिदमात अन्जाम दीं। मुख्तलिफ मौकों पर लवाए इस्लाम उन्हीं को दिया गया।

आपकी फज़ीलत अहादीस की रौशनी में :-

हज़रात शेखैन ने सऊद इब्ने अबी वकास से रिवायत किया कि जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने ग़ज़वए तबूक में आपको मदीना का खलीफा बना दिया तो अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ किया। “तख्लपनी फिन्निसाये वस्सिबयान”। मुझे बच्चों और औरतों में आप छोड़ रहे हैं।

क्या तुम इस बात पर राजी नही कि जिस तरह मूसा अलैहिस्सलाम के बाद हारून अलैहिस्सलाम ने मर्तबा लिया। ऐसे तुम रहो। सिवाए इसके कि मेरे बाद कोई नबी नहीं। और बुखारी व मुस्लिम ने तखरीज की सहल इब्न सअद से कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने खैबर के दिन फरमाया कि कल ऐसे को झण्डा दूंगा जिसके हाथ पर अल्लाह फतह देगा। बरकत वाली सीनी। Barkat wali sini.

अल्लाह व रसूल उससे मुहब्बत करते हैं वह अल्लाह व रसूल से मुहब्बत करता है। रात भर लोग इस फिक्र में रहे कि सुबह झण्डा किसको दिया जाता है और सब के सब उसकी उम्मीद रखते थे तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया अइना अली। अली कहाँ हैं। कहा गया कि उनकी आँखें दुख रही हैं तो वह तशरीफ़ लाये तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने लोआबे दहन उनकी आँखों में डाला और उनके लिए दुआ की तो उन्हें शिफा मिल गयी।

गोया उन्हें कोई तकलीफ़ न थीं चुनान्चे आपको झण्डा दिया गया और फतह हुई।

मुस्लिम ने सअद बिन वकास से तखरीज की। जब आयत मुबाहिला नाज़िल हुई तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने अली, फातिमा, हसन व हुसैन को बुलाया। “फकाला अल्लाहुम्मा हाऊलाये अहली”।

तिर्मिजी ने अबू सरहहा व जैद इब्न अरकम से रिवायत की है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया “मन कुन्तो मौलाहो फअली मौलाहो। जिसका मैं मौला हूँ अली उसके मौला हैं। और तिबरानी ने यूँ रिवायत की ऐ अल्लाह जो उन से मोहब्बत रखे तू उस से मोहब्बत कर और जो उनसे दुश्मनी करे उसको दुश्मन रख।

तिर्मिज़ी ने इब्न उमर से रिवायत की। यानी तुम दुनिया व आखिरत में मेरे भाई हो।

मुस्लिम ने हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से तखरीज की। यानी मुझसे मोमिन मोहब्बत रखेगा और मुनाफिक बोग्ज़ रखेगा। यह ही नबी उम्मी ने मुझसे फरमाया।

तिर्मिजी व हाकिम ने अली से रिवायत की। नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया मैं इल्म का शहर हूँ। अली उसके दरवाज़े हैं।

अबू यअला और बज़ार ने सअद बिन वकास से तख़रीज जिस ने अली को अज़ियत दी उसने मुझे तकलीफ पहुँचाया।

दूसरी हदीस में यूँ भी आया है कि दो जमाअतें अली की मोहब्बत में हलाक होंगी। एक हद से ज़्यादा मोहब्बत करने की वजह से और एक अदावत रखने की वजह से।

तिबरानी औसत ने उम्मे सलमा से तखरीज की। कालत समेअता रसूलल्लाहे सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम बकौले अली. अली कुरआन के साथ हैं और कुरआन अली के साथ। दोनों एक दूसरे से अलग न होंगे यहाँ तक कि हौज़ पर मुलाकात करेंगे। (तारीखुल खोलफा)

अल्लाह रब्बुल इज्ज़त हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे, हमे एक और नेक बनाए, सिरते मुस्तक़ीम पर चलाये, हम तमाम को नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और इताअत की तौफीक़ आता फरमाए, खात्मा हमारा ईमान पर हो। जब तक हमे ज़िन्दा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखे, आमीन ।

इस बयान को अपने दोस्तों और जानने वालों को शेयर करें। ताकि दूसरों को भी आपकी जात व माल से फायदा हो और यह आपके लिये सदका-ए-जारिया भी हो जाये।

क्या पता अल्लाह ताला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए । आमीन ।

खुदा हाफिज…

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