हम कहाँ जा रहे हैं?
एक बुजुर्ग फरमाते थेः ऐ दोस्त ! तेरा उठने वाला हर कदम या तुझे जन्नत के करीब कर रहा है या तुझे जहन्नम के करीब कर रहा है।
अगर अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त के हुक्मों को मानने के लिए कदम उठ रहा है तो जन्नत के करीब, और अगर गुनाहों के लिए कदम उठ रहा है तो जहन्नम के करीब। तो हमारी ज़िन्दगी की तरतीब से पता चल सकता है कि हम किस रास्ते पर चल रहे हैं।
दो रास्ते बहुत वाज़ेह हैं- एक रास्ते पर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत वाली ज़िन्दगी को अपनाना पड़ता है। पर्दे के साथ ज़िन्दगी गुज़ारनी होती है। पाकदामनी की ज़िन्दगी गुज़ारनी होती है। सच्ची ज़िन्दगी गुज़ारनी होती है। अच्छे अख़लाक़ वाली ज़िन्दगी गुज़ारनी होती है। ऐसे लोग जन्नत के रास्ते पर चल रहे हैं।
और दूसरी ज़िन्दगी बेपर्दगी की ज़िन्दगी, बेहयाई की ज़िन्दगी, टी० वी० गाना बजाना, इनमें मसरूफियत की ज़िन्दगी, इधर-उधर के ताल्लुकात जोड़ना, आख़िरत की तरफ से बिल्कुल ग़ाफ़िल रहना, दुनिया में अपनी ख़्वाहिशों, शहवतों को पूरा करने के लिए मस्त रहना, यह जहन्नमियों की ज़िन्दगी है।
खूबसूरत वाक़िआ:जब फ़रिश्ते क़ुरआन सुनने ज़मीन पर उतर आए |Jab farishte Quran sunane jameen per utar Aaye.
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
