सिद्दीके अकबर के सिक व वफा की इन्तिहा
जब गारे सौर में पहुँचने के लिए पहाड़ पर चढ़ने का वक़्त था तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु ताआला अलैहि वसल्लम पाँव के पंजे लगा रहे थे और हाथों के बल ऊपर चढ़ रहे थे।
पूरा पाँव नहीं लगा रहे थे। इस तरह चढ़ने का मकसद यह था कि कदमों के निशान न लगें ताकि दुश्मन कदमों के निशान देखकर पीछे न आ जाएं।
जब हज़रत सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु ने यह देखा कि महबूब ज़मीन पर पाँव नहीं लगा रहे हैं सिर्फ पंजे लगा रहे हैं तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अर्ज़ किया, ऐ अल्लाह के महबूब ! अबूबक्र हाज़िर है, मेहरबानी फमाइए।
आप मेरे कंधों पर सवार हो जाइए। चुनाँचे नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम उनके कंधों पर सवार हुए और वह नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को लेकर गारे सौर तक पहुँचे।
यह मैराजे मुहब्बत है यह ऐजाज़े मुहब्बत है
हज़ारों ज़ख़्म खाकर मुस्कराना शादमा रहना
खूबसूरत बयान:सहाबा में सबसे बढ़कर आशिक़-ए-रसूल |Sahaba mein Sabse badhkar Aashique rasul
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
