हदीसः- हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा से रिवायत है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जब औरत अपने शौहर के खाने में से ख़र्च करे और बिगाड़ का तरीक़ा इख़्तियार करने वाली न हो तो उसको ख़र्च करने की वजह से सवाब मिलेगा और शौहर को कमाने की वजह से सवाब मिलेगा।
और जो ख़ज़ानची है जिसके पास रकम और माल सुरक्षित रहता है अगरचे वह मालिक नहीं है मगर उस माल में से मालिक के हुक्म के मुताबिक जब अल्लाह की राह मे खर्च करेगा तो उसको भी उसी तरह से सवाब मिलता है जैसे मालिक को मिला।
गरज़ एक माल से तीन शख़्सों को सवाब मिल गया कमाने वाला, उसकी बीवी जिसने सदका किया और उसका ख़ज़ानची और कैशियर जिसने माल निकाल कर दिया और एक की वजह से दूसरे के सवाब में कोई कमी न होगी, यानी सवाब बटकर नहीं मिलेगा बल्कि हर एक को अपने अमल का पूरा सवाब दिया जाएगा। (मिश्कात शरीफ)
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु पर जुब्बे का असर| Hazrat Umar Raziallahu anhu par jubbe ka asar.
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