इस्लामी तारीख
कुरआन व हदीस मे जिन्नों का तजकेरा कसरत से आया है, इन्सानों से पहले ही उन की पैदाइश हो चुकी थी, अल्लाह तआला ने इन को आग से पैदा फ़रमाया, एक तवील जमाने तक वह जमीन में आबाद रहे, फिर उन्होंने फसाद मचाना और खून बहाना शुरू किया, तो अल्लाह तआला ने फरिश्तों के जरिये उन्हें समन्दर के जजीरों और दूर दराज पहाड़ों की तरफ भगा दिया।
इबलीस भी जिन्नात में से था लेकिन कसरते इबादत की वजह से फरिश्तों का सरदार बना दिया गया था। लेकिन जब अल्लाह तआला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के सामने सज्दा करने का हुक्म दिया तो उस ने तकब्बुर किया और सज्दा करने से इन्कार कर दिया। चूनान्चे अल्लाह तआला ने धुतकार कर उस को दुनिया में भेज दिया और उस से तमाम नेमतें छीन ली।
इस तरह तकब्बुर ने उसे हमेशा के लिये जलील व रुस्वा कर दिया। हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इस दुनिया में इन्सान व जिन्नात दोनों की हिदायत व रहेनुमाई के लिये भेजे गए थे। चुनान्चे अहादीस में जिन्नों को इस्लाम की दावत देने का जिक्र मौजूद है और कुरआने करीम में जिन्नात की एक जमात के ईमान लाने का भी तजकेरा मौजूद है।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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