इस मुहब्बत के नमूने आपको घर-घर में देखने को मिलते हैं। हर बेटी को बाप से मुहब्बत होती है। बाप बीमार है, बेटी सारी रात पास कुर्सी पर बैठी जाग रही है, कि मेरे अब्बू आँख खोलेंगे तो मैं उन्हें दवाई पेश करूँगी। खाने को कुछ माँगेंगे तो मैं खाना हाज़िर करूँगी।
वह अपने आपको अपने बाप की बाँदी (ख़ादिमा, सेविका) समझती है। और इस रात भर की तकलीफ़ उठाने को वह अपना फर्ज़ और ज़िम्मेदारी समझती है। बल्कि बहुत सी बार तो उसके दिल से दुआयें निकलती हैं कि मैं बीमार हो जाती, अल्लाह तआला मेरे अब्बू को शिफा अता कर देते। यह उस मुहब्बत की वजह से है जो अल्लाह ने बेटी के दिल में बाप के लिये डाल दी है।
वालिद (बाप) की मुहब्बत जिस तरह बेटी के दिल में है उसी तरह बेटी की मुहब्बत अल्लाह तआला ने वालिद (बाप) के दिल में डाली। इसका मन्ज़र आप उस वक़्त देखा करें जब किसी जवान बच्ची को घर से रुख़्सत किया जा रहा होता है। उसका बाप अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा उसके दहेज पर खर्च कर देता है।
और जब यह रुख़्सत हो रही होती है तो बाप की आँखों से आँसू जारी होते हैं। देखने से तो उसका बोझ कम हो रहा है, उसके सर से एक फरीज़ा अदा हो रहा है, लेकिन वह समझता है कि यह मेरे जिगर का टुक्ड़ा है। मैंने इतनी मुहब्बतों से पाला। मालूम नहीं आगे इसकी ज़िन्दगी कैसी होगी।
हमने बेटी और बाप को ऐसे लिपट कर रोते देखा कि शायद लोग किसी की मौत पर भी इतना न रोते हों। तो जुदाई के वक़्त बाप और बेटी का रोना इस मुहब्बत की दलील है।
खूबसूरत वाक़िआ:-मुहब्बत से बनी दुनिया
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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