जब औरत हैज़ (माहवारी) की हालत में हो तो उस से सोहबत करना सख्त गुनाहे कबीरा, ना जाइज़ व सख्त हराम हराम हराम है।
इस बात का ख्याल रखे कि जब कभी भी सोहबत का इरादा हो तो पहले औरत से पूछ लें और औरत का भी फर्ज है कि अगर वोह हालते हैज़ में हो तो मर्द को ख़बरदार करदें और किसी भी हालत में मर्द को सोहबत न करने दे वरना सख्त गुनाहगार होगी ।
अक्सर मर्द ख़ास कर शादी की पहली रात (सुहागरात) को अपने आप पर काबू नहीं रख पाते हैं और बावजूद औरत के हैज़ की हालत में होने के सोहबत कर बैठते हैं। Halte Haiz me Sohbat(Hambistari)Haram.
याद रखिये अगर औरत हालते हैज़ में हो तो उस से किसी भी तरह सोहबत करना जाइज नहीं चाहे शादी की पहली ही रात क्यों न हो ।
इस लिए मर्द की ज़िम्मेदारी है कि वाह शादी की पहली ही रात से अपनी बीवी को हैज़ के मुल्अल्लिक दीनी मालूमात से आगाह (अवगत )कराए ।
इमाम गजाली रजि अल्लाहो तआला अन्हो इरशाद फ़रमाते है-“इल्मे दीन जो नमाज़ तहारत वग़ैरा में काम आता है औरत को सिखाए अगर न सिखाएगा तो औरत को बाहर जा कर आलिमे दीन से पूछना वाजिब और फर्ज है।
अगर शौहर ने सिखा दिया है तो उस की बे इजाजत बाहर जाना और किसी से पूछना औरत को दुरूस्त नहीं । अगर दीन सिखाने में कुसूर करेगा तो खुद गुनाहगार होगा कि हक़ तआला ने फरमाया है- तर्जमा :- अए ईमान वालों अपनी जानों और अपने घर वालों को आग से बचाओ ।(कीम्या-ए-सआदत, सफा नं. 266)
हैज़ में सोहबत (हमबिस्तरी) करने से नुकसान :- हकीमों ने लिखा है कि औरत से हैज़ की हालत में सोहबत करने से मर्द और औरत को जुज़ाम (कोड़, score) की बीमारी हो जाती है। और कुछ हकीमों ने कहा है कि हैज़ की हालत में सोहबत किया और अगर हमल ठहर गया तो औलाद नाकिस (अधूरी, Un complite ) या फिर कोड़ी पैदा होंगी ।
हालते हैज़ में सोहबत करने से औरत को बहुत तकलीफ होती है क्योंकि औरत का उस जगह से लगातार गन्दा खून निकलता रहता है जिस की वजह से वोह जगह नर्म और नाजुक हो जाती है।
और जब मर्द अपना आला ऊजू-ए-तनासूल (sex part) उस में दाखिल करता है तो वहाँ ज़ख़्म बन जाता है जिस से तखलीफ होती है और जख्म में गर्मी की वजह से उस में पीप भर जाता है और फिर बाद में लेने के देने पड़ जाते है।
जरा खुद ही सोचिये उस घर में इन्सान क्या रह सकता है जहाँ गन्दगी और बदबू हो । फिर भला उस मुकाम से उसे कैसे फायदा हो सकता है जहाँ गन्दगी का बसेरा है हाँ उस मुकाम से उसी वक्त फायदा हासिल किया जा सकता है जब वोह साफ व पाक हो। Halte Haiz me Sohbat(Hambistari)Haram.
लिहाजा चन्द दिनों का सब्र बेहतर है इससे कि सब्र न कर के जिन्दगी भर पछताया जाए ।
मस्अला :- औरत हैज की हालत में है और मर्द को शहवत ( sex) का जोर है, और डर येह है कि सोहबत न किया तो किसी से जिना (बलत्कार) कर बैठूंगा तो ऐसी हालत में अपनी औरत के पेट पर अपने आले (ऊजू-ए-तनासूल, लिंग) को मस कर के इन्जाल कर सकता है,
यानी मनी निकाल सकता है जो जाइज है लेकिन रान पर ना जाइज़ है कि हालते हैज़ में नाफ (बोनी, The Navel) के नीचे से घुटने तक अपनी औरत के बदन से सोहबत नहीं कर सकता। (फतावा-ए-अफरीका, सफा नं. 171 )
याद रहे येह मस्अला ऐसे शख्स के लिए है जिसे जिना हो जाने का पूरा यकीन हो तो वोह इस तरह से मनी निकाल कर सूकून हासिल कर सकता है। लेकिन सब्र करना और उन दिनों सोहबत से बचना ही अफज़ल है। (बहारे शरीअत जिल्द 42)
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क्या पता अल्लाह तआला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए ।आमीन।
खुदा हाफिज…
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