22/08/2026
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अल्लाह की मोहब्बत में ऐसा था जुनून! | हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का ईमान अफ़रोज़ वाक़िया| Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon! | Hazrat Ibrahim Alaihissalam Ka Imaan Afroz Waqia amazing story

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Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon.
Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

आज हम एक ऐसे ईमान अफ़रोज़ वाक़िये के बारे में बात करेंगे, जिसे पढ़कर दिल में अल्लाह तआला की मोहब्बत और उसकी याद और भी ज़्यादा बढ़ सकती है। अक्सर हम कहते हैं कि हमें अल्लाह से मोहब्बत है, लेकिन सच्ची मोहब्बत क्या होती है और अल्लाह वाले अपने महबूब रब से किस क़दर मुहब्बत करते थे, इसका अंदाज़ा हमें बुज़ुर्गों और नेक लोगों के वाक़ियात से होता है।

इस बयान में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और ईमान को ताज़ा कर देने वाला वाक़िया बयान किया गया है। जब उन्होंने अल्लाह तआला की तारीफ़ में कुछ प्यारे अल्फ़ाज़ सुने तो उनका दिल इस क़दर खुश हुआ कि अपनी बकरियों का पूरा रेवड़ तक उस ज़िक्र के बदले देने को तैयार हो गए।

आगे हम सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम की अल्लाह तआला से मोहब्बत, सदक़ा करने में उनके एहसास और अपने रब की बात पर उनके यक़ीन से जुड़े कुछ ऐसे वाक़ियात भी पढ़ेंगे, जो इंसान को अपने ईमान और अपनी इबादत के बारे में सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

हमारी कोशिश सिर्फ़ एक वाक़िया सुनाना नहीं, बल्कि इससे अपने लिए इबरत और नसीहत हासिल करना है। क्या हमारी नमाज़ में भी ऐसी मोहब्बत है? क्या हमारा ज़िक्र सिर्फ़ ज़ुबान तक है या दिल भी अपने रब को याद करता है?

तो आइए, बिस्मिल्लाह करते हैं और पढ़ते हैं अल्लाह की मोहब्बत में डूबे हुए ये ईमान अफ़रोज़ वाक़ियात, जो इंशाअल्लाह हमारे दिल को भी अल्लाह तआला की मोहब्बत से रोशन करने का ज़रिया बनेंगे। 🤲

एक बार हज़रत इब्राहीम अलैहिरसालम अपनी बकरियों का रेवड़ चरा रहे थे। एक आदमी करीब से गुज़रा। गुज़रते हुए उसने अल्लाह तआला की शान में ये अल्फाज़ ज़रा बुलंद आवाज़ से कहे,

पाक है वह ज़मीन की बादशाही और आसमान की बादशाही वाला। पाक है वह इज्ज़त, बुजुर्गी, हैबत और कुदरत वाला और बड़ाई दबदबे वाला ।

हज़रत इब्राहीम अदिस्सलाम ने जब अपने महबूबे हकीकी की तारीफ़ इतने प्यारे अल्फाज़ से सुनी तो दिल मचल उठा। फ़रमाया कि ऐ भाई ये अल्फाज़ एक बार और कह देना। उसने कहा कि मुझे इसके बदले में क्या देंगे।

आपने फ़रमाया आधा रेवड़। उसने ये अल्फाज़ दोबारा कह दिए। आपको इतना मज़ा आया कि बेकरार होकर फ़रमाया ऐ भाई ये अल्फ़ाज़ एक बार फिर कह दीजिए। उसने कहा अब इसके बदले में मुझे क्या दोगे? फ़रमाया बाकी आधा रेवड़ । उसने ये अल्फाज़ तीसरी बार कह दिए।

आपको इतना सुरूर मिला कि एकदम कहा ऐ भाई ये अल्फाज़ एक बार और कह दीजिए। उसने कहा अब तो आपके पास देने के लिए कुछ बचा नहीं, अब आप क्या देंगे? फ़रमाया कि ऐ भाई मैं तेरी बकरियाँ चराया करूँगा, तुम एक बार मेरे महबूब की तारीफ और कर दो।

उसने कहा हज़रत इब्राहीम ख़लीलुल्लाह आपको मुबारक हो, मैं तो फरिश्ता हूँ। मुझे अल्लाह तआला ने भेजा है कि जाओ और मेरा नाम लो और देखो कि वह मेरे नाम के क्या दाम लगाता है।

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की रूह लेने के लिए मौत के फ़रिश्ते आए। उन्होंने फरमाया : क्या आपने किसी ऐसे दोस्त को देखा जो अपने ख़लील की रूह कब्ज़ कर रहा हो ?

उन्होंने कहा अच्छा मैं अल्लाह तआला से पूछता हूँ। मौत के फ़रिश्ते ने अल्लाह तआला के हुजूर में अर्ज़ किया। अल्लाह तआला ने फरमाया कि जाओ मेरे हबीब को पैग़ाम दे दो,

क्या तुमने किसी दोस्त को देखा कि अपने दोस्त की मुलाकात से इंकार करे? जैसे ही उनको पता चला कि मौत अल्लाह तआला की मुलाकात का तरीका है, कहने लगे जल्दी कर, जल्दी रूह कब्ज़ कर, मुझे अपने मालिक से मिला दे।

यह थी तमन्ना हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कि अब तो जल्द से जल्द अपने प्यारे अल्लाह के हुजूर में जा पहुँचें और मुलाकात हबीब से लुत्फ़अंदोज़ हों। इसीलिए हदीस पाक में फ़रमाया, हदीसे क़ुदसी है :

मुलाकात कर, कि मेरे नेक लोगों का शौक मेरी मुलाकात के लिए बढ़ गया और मैं उनकी मुलाकात के लिए उनसे भी ज़्यादा मुश्ताक हूँ। उलफत में जब मज़ा है के हों वह भी बेकरार दोनों तरफ हो आग बराबर लगी हुई

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने देखा कि हज़रत आएशा रज़ियल्लाहु अन्हा बैठी हुई दिरहम धो रही हैं। नबी अलैहिस्सलाम हैरान हुए। फ़रमाया, हुमैरा । जवाब दिया लब्बैक या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। आपने फरमाया यह क्या कर रही हो? कहने लगीं ऐ अल्लाह के नबी दिरहम धो रही हूं।

फरमाया किस लिए? ऐ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मैंने आपकी ज़बाने मुबारक से यह बात सुनी है कि जब अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करने वाला किसी सवाली को देता है तो वह पैसे सवाली के हाथ में पहुँचने से पहले अल्लाह तआला के हाथ में पहुँच जाते हैं। जब से मैंने यह बात सुनी,

मैं हमेशा सदका उन पैसों का देती हूँ जिनको पहले से धो लेती हूँ ताकि मेरे आका के हाथों में साफ और पाक माल पहुँच जाए। अल्लाहु अकबर! यह मुहब्बत देखिए। जिससे मुहब्बत होती है उसको फलों की टोकरी भी भेजता है तो उसको गिफ्ट पैक करके के भेजता है।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

मंगनी और ईद पर अगर बिस्कुट का डिब्बा हो तो उसको भी गिफ्ट पैक करके भेजता है। अल्लाह वाले भी इसी तरह अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त की इबादत करते हैं तो वह भी अपनी नमाज़ों को मुहब्बत की गिलाफ में पैक करके अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त के हुज़ूर में भेज रहे होते हैं ।

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एक सहाबी बकरियाँ चराते थे। जब कभी मदीना तैय्यबा वापस होते तो पूछते कि क़ुरआन पाक की कौन सी नई आयतें उतरी हैं? नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कोई ख़ास बात इर्शाद फ़रमाई ? उनको बता दिया जाता।

एक दफा वापस आकर पूछा तो उन्हें बता दिया गया कि यह आयत उतरी है जिनमें अल्लाह तआला ने कसम खाकर फ़रमाया मेरे बंदो! मैं ही तुम्हें रिज़्क देने वाला हूँ ।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

जब उन्होंने यह बात सुनी तो वह नाराज़ होने लगे और कहने लगे कि वह कौन है जिसको यकीन दिलाने के लिए मेरे अल्लाह को कसम खानी पड़ी? सुबहान अल्लाह ! यह मुहब्बत की बात है।

❤️ अल्लाह की मोहब्बत — FAQ सवाल-जवाब

सवाल 1: अल्लाह तआला से सच्ची मोहब्बत का मतलब क्या है?
जवाब: अल्लाह तआला से सच्ची मोहब्बत का मतलब है कि इंसान अपने रब को सबसे ज़्यादा अज़ीज़ रखे, उसकी इताअत करे, उसकी नाफ़रमानी से बचे और उसकी रज़ा हासिल करने की कोशिश करता रहे।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 2: अल्लाह से मोहब्बत कैसे बढ़ाई जा सकती है?
जवाब: क़ुरआन की तिलावत, ज़िक्र, दुआ, नमाज़, सदक़ा और नेक आमाल के ज़रिए अल्लाह तआला से मोहब्बत बढ़ाई जा सकती है। साथ ही अल्लाह की नेमतों पर गौर करना भी दिल में शुक्र और मोहब्बत पैदा करता है।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 3: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के इस वाक़िये से हमें क्या सबक मिलता है?
जवाब: इस वाक़िये से यह एहसास मिलता है कि अल्लाह तआला का ज़िक्र और उसकी तारीफ़ सुनना नेक दिल लोगों के लिए कितनी बड़ी खुशी का सबब था। हमें भी अल्लाह के ज़िक्र की क़द्र करनी चाहिए।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 4: क्या सिर्फ़ ज़ुबान से अल्लाह का ज़िक्र करना काफी है?
जवाब: ज़िक्र बहुत बड़ी इबादत है, लेकिन सच्ची मोहब्बत का असर इंसान के आमाल में भी दिखाई देना चाहिए। नमाज़ की पाबंदी, नेक काम और गुनाहों से बचने की कोशिश भी अल्लाह से मोहब्बत की निशानी है।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 5: अल्लाह से मोहब्बत की सबसे बड़ी निशानी क्या है?
जवाब: अल्लाह तआला की रज़ा को अपनी ख्वाहिश पर तरजीह देना, उसके हुक्मों की पैरवी करना और नाफ़रमानी से बचना सच्ची मोहब्बत की अहम निशानियों में से है।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 6: क्या अल्लाह की मोहब्बत पाने के लिए बहुत ज़्यादा मालदार होना ज़रूरी है?
जवाब: नहीं। अल्लाह तआला के नज़दीक इंसान की क़ीमत सिर्फ़ उसके माल से नहीं होती। इख़लास, तक़वा, नेक अमल और सच्ची नीयत बहुत अहम हैं।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 7: सदक़ा और अल्लाह की मोहब्बत का क्या ताल्लुक है?
जवाब: अल्लाह की रज़ा के लिए सदक़ा करना ईमान और नेक अमल की अच्छी निशानी है। इंसान जब अपनी पसंदीदा चीज़ भी अल्लाह की राह में खर्च करता है तो उसके दिल में ईसार और अल्लाह की मोहब्बत बढ़ती है।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 8: क्या अल्लाह की मोहब्बत सिर्फ़ बुज़ुर्गों और नेक लोगों के लिए है?
जवाब: नहीं, हर मुसलमान अल्लाह तआला से मोहब्बत बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। इसके लिए इंसान को अपनी ज़िंदगी में नमाज़, ज़िक्र, तौबा और नेक आमाल को बढ़ाना चाहिए।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 9: अगर किसी इंसान से गुनाह हो जाए तो क्या अल्लाह की मोहब्बत खत्म हो जाती है?
जवाब: इंसान से गुनाह हो सकता है, लेकिन उसे मायूस नहीं होना चाहिए। सच्चे दिल से तौबा करके अल्लाह तआला की तरफ़ लौटना चाहिए और आइंदा गुनाह से बचने की कोशिश करनी चाहिए।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 10: अल्लाह की मोहब्बत इंसान की नमाज़ पर कैसे असर डालती है?
जवाब: जब दिल में अल्लाह की मोहब्बत बढ़ती है तो नमाज़ सिर्फ़ एक ज़िम्मेदारी नहीं रहती, बल्कि बंदा अपने रब के सामने हाज़िरी को खुशी और इत्मीनान के साथ अदा करने की कोशिश करता है।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 11: क्या अल्लाह की मोहब्बत के साथ अल्लाह का ख़ौफ़ भी होना चाहिए?
जवाब: जी हाँ। इस्लामी तालीमात में अल्लाह की मोहब्बत के साथ उसकी अज़मत और ख़ौफ़ भी दिल में होना चाहिए। मोहब्बत इंसान को अल्लाह की तरफ़ खींचती है और ख़ौफ़ उसे नाफ़रमानी से बचाता है।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

सवाल 12: इस बयान से हमें सबसे बड़ी नसीहत क्या मिलती है?
जवाब: सबसे बड़ी नसीहत यह है कि हम अपने दिल में अल्लाह तआला की मोहब्बत पैदा करें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, नमाज़ और ज़िक्र की पाबंदी करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारने की कोशिश करें।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Allah Ki Mohabbat Mein Aisa Tha Junoon
खुदा हाफिज़…..

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