18/06/2026
1781773529860

अगर अली न होते तो उमर हलाक हो जाता|Agar Ali na hote to umar halaq ho jata.

Share now
Agar Ali na hote to umar halaq ho jata.
Agar Ali na hote to umar halaq ho jata.

हज़रत अली कर्रमल्लाहु तआला वज्हहुल करीम इल्म के ऐतबार से उलमाए सहाबा में बहुत ऊंचा मकाम रखते हैं। सरकारे अक्दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बहुत सी हदीसें आप से मरवी हैं।

आप के फतावा और फैसले इस्लामी उलूम के अन्मोल जवाहिर पारे हैं। हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हुमा फरमाते हैं कि हम ने जब भी आप से किसी मस्अला को दरियाफ्त किया तो हमेशा दुरुस्त ही जवाब पाया। हज़रत आइशा सिद्दीका रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के सामने जब हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का ज़िक्र हुआ तो आप ने फरमाया कि अली से ज़्यादा मसाइले शरइय्या का जानने वाला कोई और नहीं है।

और हज़रत इब्ने मस्ऊद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि मदीना तैयिबा में इल्मे फराइज़ और मुकद्दमात के फैसले करने में हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से ज़्यादा इल्म रखने वाला कोई दूसरा नहीं था। और हज़रत सईद बिन मुसैय्यिब रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के सहाबा में सिवाए हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के कोई यह कहने वाला नहीं था कि जो कुछ पूछना हो मुझ से पूछ लों।

और हज़रत सईद बिन मुसैय्यिब रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से यह भी मरवी है कि जब हज़रत उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की खिदमत में कोई मुश्किल मुकद्दमा पेश होता और हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु मौजूद न होते तो अल्लाह तआंला की पनाह मांगा करते थे कि मुकद्दमा का फैसला कहीं गलत न हो जाए।

मशहूर है कि हज़रत उमर फारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के सामने एक ऐसी औरत पेश की गई कि जिसे ज़िना का हमल था, सबूते शरई के बाद आप ने उस के संगसार (पत्थर मारने) का हुक्म फरमाया। हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने याद दिलाया कि हुजूर सैयिदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम का फरमान है कि हामिला औरत को बच्चा पैदा होने के बाद संगसार किया जाए।

ये भी पढ़ें:जब गोश्त पत्थर बन गया | Jab gosht pathar ban gaya.

इस लिये ज़िना करने वाली औरत अगर्चे गुनहगार होती है मगर उस के पेट का बच्चा बेकुसूर होता है। हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की याद देहानी के बाद हज़रत उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने अपने फैसले से रुजू कर लिया और फरमायाः अगर अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हुमा न होते तो उमर हलाक हो जाता। अली की मौजूदगी ने उमर को हलाकत से बचा लिया।

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *