बनी इसराईल की एक अक्लमंद दीनदार खातून का ज़िक्र
मुहम्मद बिन काब का बयान है कि बनी इस्राईल में एक आदमी बड़ा आलिम और बड़ा इबादत गुज़ार था। उसको अपनी बीवी के साथ बहुत मुहब्बत थी। इत्तिफ़ाक़ से वह मर गयी। उस आलिम पर ऐसा गम सवार हुआ कि दरवाज़ा बंद करके बैठ गये और सबसे मिलना-जुलना छोड़ दिया।
बनी इसराईल में एक औरत थी। उसने यह किस्सा सुना, उसके पास गयी और घर में आने वालों से कहा कि मुझको एक मस्अला पूछना है और वह जुबानी ही पूछ सकती हूं। और दरवाज़े पर जम कर बैठ गयी। आख़िर उसको ख़बर हुई और अंदर आने की इजाज़त दी।
आकर कहने लगी कि मुझको एक मस्अला पूछना है। उसने कहा, बयान करो। कहने लगी कि मैंने अपनी पड़ोसिन से कुछ ज़ेवर मांगे के तौर पर लिया था और मुद्दत तक उसको पहनती रही। फिर उसने आदमी भेजा कि मेरा जेवर दे दो, तो क्या उसका ज़ेवर दे देना चाहिए? आलिम ने कहा, बेशक दे देना चाहिए।
वह औरत बोली, वह तो मेरे पास मुद्दत तक रहा है तो कैसे दे दूं। आलिम ने कहा, तब तो वह और भी खुशी से दे देना चाहिए, क्योंकि एक मुद्दत तक उसने नहीं मांगा, यह उसका एहसान है। औरत ने कहा, खुदा तुम्हारा भला करे, फिर तुम क्यों गम में पड़े हो ? खुदा-ए-तआला ने एक चीज़ मांगे दी थी, जब चाहा ले ली, उसकी चीज़ थी। यह सुनकर उस आलिम की आंखें-सी खुल गयीं और इस बात से उसको बड़ा फायदा पहुंचा।
खूबसूरत बयान:हुक़ूक़ का बयान। Huqooq ka Bayan.
देखो, कैसी औरत थी जिसने मर्द को अक़्ल दी और मर्द भी कैसा आलिम’ । तुमको चाहिए कि मुसीबत में यही समझा करो, दूसरों को भी समझा दिया करो।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
