इस्लामी तारीख
क़ाबील और हाबील हजरत आदम अलैहिस्सलाम के दो बेटे थे। दोनों के दर्मियान एक बात को लेकर झगड़ा हो गया। क़ाबील ने हाबील को क़त्ल कर डाला, जमीन पर यह पहली मौत थी और इस बारे में अभी तक आदम की शरीअत में कोई हुक्म नहीं मिला था। इस लिये क़ाबील परेशान था के भाई की लाश को क्या किया जाए।
अल्लाह तआला ने एक कव्वे के जरिये उस को दफन करने का तरीका सिखाया। यह देख कर क़ाबील कहने लगा : हाए अफसोस ! क्या मैं ऐसा गया गुज़रा हो गया के इस कव्वे जैसा भी न बन सका। फिर उस ने अपने भाई को दफन कर दिया। यहीं से दफन करने का तरीक़ा चला आ रहा है।
हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने काबील के मुतअल्लिक़ फरमाया: “दुनिया में जब भी कोई शख़्स जुल्मन क़त्ल किया जाता है तो उस का गुनाह हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के बेटे (क़ाबील) को जरूर मिलता है, इस लिये के वह पहेला शख़्स है जिस ने जालिमाना क़त्ल की इब्तेदा की और यह नापाक तरीक़ा जारी किया”। (मुस्नदे अहमद : 3623)
इसी लिये इन्सान को अपनी ज़िन्दगी में किसी गुनाह की इजाद नही करनी चाहिये ताकि बाद में उस गुनाह के करने वालों का बवाल उस के सर न आए।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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