
जब आप शराफ में पहुंचे तो मुहर्रम 61/ हिजरी का ख़ूनी साल शुरूअ हुवा और उसी मकाम पर हुर बिन यज़ीद तमीमी एक हज़ार सवारों के साथ आप के मुकाबिल आ ठहरा । नमाज़े जुहर के वक़्त आप ने हुर के लश्कर के सामने ख़ुत्बा इर्शाद फरमाया कि : “मैं तुम्हारी दावत और अहदो पैमान के मुताबिक यहां आया हूं । मेरे पास इस मज़मून के तुम्हारे ख़ुतूत और कासिद आए कि हमारा कोई इमाम नहीं, आप आईये शायद ख़ुदा आप ही के ज़रीए हमें सीधे रास्ते लगा दे।
चुनांचे अब मैं आ गया हूं, अगर तुम लोग मेरे साथ पुख़्ता वादा कर के मुझे यकीन दिला दो तो मैं तुम्हारे शहर में चलुं । लेकिन अगर तुम ऐसा नहीं करते और तुम्हें हमारा आना नापसंद हो तो मैं जहां से आया हूं वहीं लौट जाउंगा” ।
नमाज़े असर के बाद आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने फिर इसी मज़मून पर तक़रीर की तो हुर ने जवाब दिया कि हमारा ख़त लिखने वालों से कोई ताल्लुक नहीं। हम इब्ने ज़ियाद के सिपाही हैं और हमें येह हुक्म है कि आप के साथ लगे रहे यहां तक कि कूफा में आप को इब्ने ज़ियाद के पास पहुंचा दें। इस मौकाअ पर सख्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने काफिला अहले बैत को वापस लौटाना चाहा मगर हुर ने रास्ता रोक लिया।
आप मदीना तैय्यबा की तरफ जाना चाहते थे मगर हुर चाहता था कि आप को कूफा ले जाया जाए । मज़ीद गुफ़्तगु के बाद हुर ने येह इजाज़त दी के अगर आप कूफा नहीं जाना चाहते तो आप ऐसा रास्ता इख़्तियार करें जो न कूफा को जाए और न मदीना को । इसी दौरान में मैं इब्ने ज़ियाद को लिखता हूं और आप यज़ीद को लिखे, मुमकिन है आफियत की कोई सूरत पैदा हो जाए। इस करारदाद के बाद आप एक ऐसे रास्ते पर रवाना हुए जिस की आखरी अलमनाक मंज़िल ‘करबला’ थी ।
मैदाने करबला अज़ वाकेआ शहादत सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु इब्ने ज़ियाद की तरफ से हुक्म दिया गया कि काफिलाए अहले बैत को एक ऐसे मैदान में घेर कर ले जाओ जहां कोई किल्आ और पानी का चश्मा न हो । इस हुक्म के बाद हुर ने मज़ाहमत की। येह 2 मुहर्रम 60 हिजरी का वाकिआ है कि काफिलाए अहले बैत अपने आखरी मुस्तकिर यानी ‘नैनवां’ के ‘मैदान करबो बला’ में खैमाज़न हो गया। जुहैर बिन कैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा या इब्ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम आइन्दा जो वक़्त आएगा, वोह इस से भी ज़ियादा सख़्त होगा, अभी लड़ना आसान है, इस रास्ते के बाद ख़ौफ़ो जैस आएंगे, हम इन के साथ लड़ न सकेंगे, लेकीन इस उस मुजस्समाए शराफतो ईषार ने जवाब में फरमाया कि “मैं अपनी तरफ से लड़ाई की इब्तिदा न करूंगा” ।
3 मुहर्रम 61 हिजरी को उमर बिन साद चार हज़ार फौज के साथ आप के मुकाबिल आ खड़ा हुआ । उमर बिन सा’द ने कुर्रह बिन सअ’द हन्ज़ली को मुलाकात के लिये भेजा तो सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया कि मुझे तुम्हारे शहरवालों ने ख़ुतूत लिख कर बुलाया है, अब अगर मेरा आना तुम को पसंद न हो तो मैं लौट जाता हूं।
इब्ने साद इस जवाब से बहोत मुतअस्सिर हुवा और तमाम वाकेआ इब्ने ज़ियाद को लिख कर भेजा, उस ने जवाब दिया कि तुम हुसैन और उस के साथीयों से यज़ीद की बैत लो। अगर वोह बैत कर लें तो फिर देखा जाएगा ।
इस के बाद ही दूसरा हुक्म येह पहुंचा कि क़ाफ़िलाए अहले बैत पर पानी बंद कर दिया जाए । इस हुक्म पर इब्ने साद ने पांच सौ सवारों का एक दस्ता दरियाए फुरात पर पानी रोकने के लिए मुतअय्यन कर दिया। इस दस्ते ने सातवीं मुहर्रम से पानी रोक दिया। अब्दुल्लाह बिन अबू हुसैन शामी ने सख्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु से मुखातिब होकर कहा हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु पानी देखते हो, कैसा आसमान के जिगर की तरह छलक रहा है लेकिन ख़ुदा की कसम तुम्हें एक कतरा भी नहीं मिल सकता, तुम इसी तरह प्यासे मरोगे ।
इस के बाद 9 मुहर्रम को असर के वक़्त उस ने फौज को तैय्यारी का हुक्म दे दिया, हज़रत हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया कि मैं नमाज़ो दुआ के लिये एक रात की इजाज़त चाहता हूं ।
रात के वक़्त हज़रत हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने अपने साथीयों को एक दर्दनाक खुत्बा दिया । आप ने फ़रमाया “इलाही ! तेरा शुक्र है कि तूने हमारे घराने को नुबुव्वत से मुशर्रफ फ़रमाया और दीन की समझ और कुरआन का फहम अता फरमाया । लोगो ! मैं नहीं जानता कि आज रूए ज़मीन पर मेरे साथीयों से अफज़ल और बेहतर लोग भी मौजूद हैं या मेरे अहले बैत से ज़ियादा हमदर्द व ग़मगुसार किसी के अहले बैत हैं, अय लोगो ! ख़ुदा तुम्हें जज़ाए खैर दे, कल मेरा और उन का फैसला हो जाएगा, गौरो फिक्र के बाद मेरी राए है कि रात के अंधेरे में तुम सब ख़ामोशी से निकल जाओ और मेरे अहले बैत को साथ ले जाओ। मैं खूख़ुशी से तुम्हें रुख़सत करता हूं, मुझे कोई शिकायत न होगी, येह लोग सिर्फ मुझे चाहते हैं और मेरी जान ले कर तुम से ग़ाफ़िल हो जाएंगे ।”
हज़रत सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु के इन अल्फाज़ से अहले बैत फ़र्ते बेकरारी से तड़प उठे और सब ने बिल इत्तिफाक आप से वफादारी और जांनिसारी का अहद किया । जब वफ़ादारों की गर्म जोशीयां ख़त्म हुईं तो नमाज़ के लिये सफें आरास्ता की गईं, सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु और उन के रुफ़्क़ा सारी रात नमाज़, इस्तिग़फार, तिलावते कुरआन, दुआ व तज़रुअ में मश्गूल रहे और दुश्मन के तैग बकफ सवार रात भर लश्करे हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु के गिर्द चक्कर लगाते रहे ।
10 मुहर्रम 61 हिजरी को जुम्आ के दिन नमाज़े फजर के बाद उमरो बिन साद चार हज़ार सवारों को लेकर निकला। हज़रत हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने भी अपने असहाब की सफें काइम की, लश्करे हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु महज़ गिनती के सवारों और चंद पैदल अफ़राद पर मुश्तमिल था ।
सय्यिदिना हुसैन का दर्दनाक ख़ुत्बा:
जब दुश्मन की फौज ने पेश कदमी की तो इस मुजस्समे ईसारो कुरबानी और सब्र व इस्तिकामत के पैकर ने उन के सामने ब आवाज़े बलंद मुन्दर्जा जैल ख़ुत्बा इरशाद फरमाया : “लोगो ! मेरा हसबो नसब याद करो, सोचो ! मैं कौन हूं, फिर अपने गिरेबानों में नज़र डालो और अपने ज़मीर का मुहासबा करो, क्या तुम्हारे लिये मुझे कत्ल करना और मेरी हुरमत का रिश्ता तोड़ना जाइज़ है?
क्या मैं तुम्हारे नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की लड़की का बेटा, उन के चचेरे भाई अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का फरज़न्द नहीं हूं ? क्या तुमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को मेरे और मेरे भाई के हक़ में येह फरमाते हुए नही सुना : जवानाने जन्नत के सरदार अगर मेरा बयान सच्चा है और ज़रूर सच्चा है, क्यूंकि मैंने अब तक झूट नहीं बोला तो बताओ क्या तुम बरहना तलवारों से मेरा मुकाबला करना चाहते हो ? क्या येह बात भी तुम्हें मेरा खून बहाने से नहीं रोक सकती ?
खूबसूरत वाक़िआ:-कर्बला की सच्ची दास्तान इमाम हुसैन।1
वल्लाह इस वक़्त रूए ज़मीन पर बजुज़ मेरे, किसी नबी की लड़की का बेटा मौजूद नहीं। मैं तुम्हारे नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का बिलावास्ता नवासा हूं। क्या तुम मुझे इसलिये हलाक करना चाहते हो कि मैं ने किसी की जान ली है ? किसी का खून बहाया है ? किसी का माल छीना है। कहो क्या बात है….. आख़िर मेरा कुसूर क्या है”।
आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने बार बार पूछा मगर किसी ने जवाब न दिया फिर आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने बड़े बड़े कूफ़ीयों को नाम ले कर पुकारना शुरू किया, अय शीष बिन रबीअ, अय हिज्जाज़ बिन बजुज़, अय कैस बिन अशअष, अय यज़ीद बिन हारिष क्या तुमने मुझे नहीं लिखा था कि फल पक गए, ज़मीन सरसब्ज़ हो गई, नहरे उबल पड़ी, अगर आप आएंगे तो अपनी जरार फौज के पास आएंगे सो जल्द आ जाएं ।
इस पर उन लोगों ने इन्कार किया तो आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने चिल्ला कर कहा वल्लाह ! तुम ही ने लिखा था । आख़िर में आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा अगर मुझे पसंद नहीं करते तो छोड़ दो मैं यहां से वापिस चला जाता हूं ।
कैस बिन अशअष ने कहा आप अपने आप को अपने अम्ज़ादों के हवाले कर दें, इस के जवाब में आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया “वल्लाह ! मैं ज़िल्लत के साथ कभी अपने आप को उन के हवाले न करूंगा” ।

जिस वक़्त इब्ने साद ने फौज को हरकत दी तो हुर उन से कट कर अलेहदा होने लगा तो जर बिन ओस ने उस से कहा मुझे तुम्हारी हालत मुश्तबा मालूम होती है। हुर ने संजीदगी से जवाब दिया ख़ुदा की कसम ! मैं जन्नत या दोज़ख का इन्तिख़ाब कर रहा हूं। बख़ुदा मैंने जन्नत मुन्तख़ब कर ली है। येह कहा और घोड़े को ऐड़ लगाकर लश्करे हुसैन में पहुंच गया और निहायत आजिज़ी और इन्किसारी से मुआफी का ख़्वास्तगार हुवा, आप ने उसे मुआफ फरमा दिया ।
जंग की इब्तिदा :-
इस वाकिए के बाद उमरो बिन साद ने कमान उठाई और लश्कर की तरफ येह केह कर तीर फेंका कि गवाह रहो, सब से पेहला तीर मैंने चलाया है। मुख़्तसर सी मुबारज़त तलबी के बाद उमरो बिन साद की फौज लश्करे हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु पर टूट पड़ी, हर तरफ जंग का मैदान गर्म हो गया और खून के फव्वारे उबलने लगे । सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु के शेर दिल सिपाही जिस तरफ रुख करते, सफों को उलट देते थे। मगर कसीर तादाद दुश्मन ज़रा सी देर में फिर हुजूम कर आता था, चन्द घंटों में लश्करे हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु के बड़े बड़े नामवर बहादुर मुस्लिम बिन औसजा, हुर और हबीब बिन मज़ाहिर शहीद हो गए।
जब दुश्मन के सिपाही सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु के करीब पहुंचे तो नमाज़ का वक़्त करीब था। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने अबू समामा से फरमाया दुश्मनों से कहो कि हमे नमाज़ की मोहलत दें, मगर दुश्मन ने येह दरख्वास्त मंजूर न की और लड़ाई बदस्तूर जारी रही ।
सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु के सब रुफ़्क़ा यक बाद दीगरे शहीद हो चुके तो बनी हाशिम खानदाने नबुव्वत की बारी आई । सब से पहले सय्यिदिना अली अकबर रजियल्लाहु तआला अन्हु शहीद हुए, सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने सय्यिदिना अली अकबर रजियल्लाहु तआला अन्हु की लाश उठाई और खैमे के पास रख दी, इस के बाद सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु मैदाने जंग से सय्यिदिना कासिम बिन हसन रजियल्लाहु तआला अन्हु की लाश उठा कर खैमें के पास लाए और सय्यिदिना अली अकबर के पेहलू में लिटा दिया ।
अहले बैत के रोने की आवाज़ आप रजियल्लाहु तआला अन्हु को सुनाई दी तो आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने अहले बैत को मुखातिब कर के फ़रमाया : “अय अहले बैत ! सब्र करो, अय मेरे चचा की अवलाद ! सब्र करो इस के बाद कोई तक़लीफ न देखोगे” ।
जिस वक़्त सय्यिदिना अब्दुल्लाह बिन हसन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने अपने चचा सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु पर दुश्मन को वार करते देखा तो उस पैकरे वफ़ाने लपक कर अपने हाथ से तलवार के वार को रोका, उन का दायां बाजू शाने से कट कर जुदा हो गया । सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने अपने नौ जवान भतीजे को छाती से लगाया और फ़रमाया : “अय भतीजे ! जो मुसीबत इस वक़्त तुम पर आई है, इस पर सब्र करो और सवाब के उम्मीदवार रहो बहोत जल्द ख़ुदा तुझे तेरे सालेह बाप दादा से मिलायेगा।
इस के बाद सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु का साहबज़ादा सख्यिदिना अली असगर जब शिद्दते प्यास से तड़पने लगे तो आप रजियल्लाहु तआला अन्हु उन को गोद में उठा कर लाए और दुश्मनो को मुखातिब कर के फ़रमाया :
“तुम्हें मुझ से तो अदावत हो सकती है लेकिन इस मासूम बच्चे के साथ तुम्हें क्या दुश्मनी है ? इस को तो पानी दो कि शिद्दते प्यास से दम तोड़ रहा है।”
इस के जवाब में दुश्मन की तरफ से एक तीर आया जो उस बच्चे के हलक में पैवस्त हो गया और वोह मासूम वही जां बहक हो गया। सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु ने इस कदर होशरुबा सानिहा पर भी कमाले सब्र व सुकून का मुज़ाहरा किया यानी उस के ख़ून से चुल्लुभर कर आसमान की तरफ़ फेंका और फ़रमाया : “या अल्लाह ! जो मुसीबत इस वक़्त इस पर नाज़िल है, उस को तू आसान कर, मुझे उम्मीद है के इस मासूम बच्चे का ख़ून तेरे नज़दीक हज़रत सालेह की उंटनी से कम नहीं होगा” ।

नवासाए रसूल का बेमिषाल सब्र व इस्तिकलाल : जब अहले बैत एक एक कर के शहीद हुए तो हज़रत सय्यिदुश्शोहदाअ की बारी आई और दुश्मन की तलवार नवासए रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के जिस्मे अतहर पर टूट पड़ीं। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने निहायत सब्र व इस्तिकामत से दुश्मनों के हमलों का मुकाबला किया। बेशुमार दुश्मनों को मौत के घाट उतारा । तने तन्हा हज़ारों का मुकाबला कर रहे थे। शिद्दते प्यास से ज़बान सूख कर कांटा हो चुकी थी, तीन रोज़ से पानी की एक बूंद लबों तक न पहोंची थी, उपर से झुल्सा देनेवाली धूप, नीचे से तपती हुई रेत, अरब की गर्मी, मौसम की सख़्ती और बादे समूम का ज़ोर, रेत के ज़र्रों की परवाज़ जो चिन्गारीयां बन कर जिस्म से लिपटे थे ।
हज़रत साद बिन वक़्क़ास रजियल्लाहु तआला अन्हु फातेहे ईरान का बदनिहाद बेटा हुकूमत की लालच से अन्धा हो कर अब खानदाने रिसालत के आखरी चराग़ हज़रत हुसैन की शम्ए हयात को भी बुझाने के लिये बेताब नज़र आ रहा है। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के जिस्मे अतहर में तीरों और नेज़ों के 80 ज़ख़्म पड़ चुके थे। तमाम बदन छलनी बना हुवा था मगर आप फिर भी निहायत शुजाअत और साबित क़दमी से दुश्मन का मुकाबल कर रहे थे ।
शिम्र बिन ज़ीलजोशन हज़रत हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु की पामर्दी और इस्तिकामत देख कर बहोत हैरानो सरासीमा हो गया और उस ने सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु की तवज्जोह मैदाने जंग से हटाने के लिये येह चाल चली कि फौज से एक दस्ता अलाहिदा कर के अहले बैत के खैमो का मुहासरा कर लिया, इस पर आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने झल्लाकर फरमाया : “अय लोगो शर्म करो ! तुम्हारी लड़ाई मुझ से है या बे कस व बेकुसूर औरतो से कमबख़्तों कम अज कम मेरी जिंदगी में तो अपने घोड़ों की बागें उधर न बढ़ाओ”।
शिम्र नाबिकार ने शर्मिदा हो कर अहले बैत से मुहासरा उठा लिया और हुक्म दिया कि आखरी हल्ला बोल दो । आख़िर पूरी की पूरी फौज दरिन्दों की तरह सय्यिदिना हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु पर टूट पड़ी। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु सफों को चीरते हुए फ़रात पर पहोंच गए और येह केह कर घोड़े को दरिया में डाल दिया कि मैं भी प्यासा हूं और तू भी प्यासा है। जब तक तू अपनी प्यास न बुझाएगा, मैं पानी को हाथ न लगाउंगा । घोड़ा पानी पी चुका तो आप रजियल्लाहु तआला अन्हु ने पीने के लिये पानी चुल्लू में लिया और चाहते थे के उस से अपना हलक तर करें के यकायक तीर सामने से आ कर लबहाए मुबारक में पैवस्त हो गया।
आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने पानी हाथ से फेंक दिया, तीर खींच कर निकाला और मुंह खून से लबरेज़ हो गया। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ख़ून की कुल्लीयां करते हुए बाहर निकले और फरमाया : “बारे इलाहा ! तू देख रहा है के येह लोग तेरे रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के नवासे पर क्या क्या ज़ुल्म कर रहे हैं”।
इतने में आवाज़ सुन कर सराअत से आप रजियल्लाहु तआला अन्हु खैमों की तरफ पल्टे । रास्ते में दुश्मनों के पारे के पारे लगे खड़े थी। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु उन्हें चीरते हुए खैमों में पहोंच गए। हज़रत हुसैन को मजरूह और खून में शराबोर देख कर खैमों में कोहराम मच गया। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उन्हें सब्र की तल्कीन की और बाहर निकल आए एक तीर आप रजियल्लाहु तआला अन्हु की पेशानी पर लगा जिस से सारा चेहरा मुबारक लहूलुहान हो गया।
चंद लम्हों के बाद एक तीर सीनए अतहर में आ कर पैवस्त हो गया जिस के ख़िचते ही एक खून का फव्वारा जारी हो गया । आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उस खून को अपने चेहरे पर मल लिया और फ़रमाया कि इसी हालत में अपने जद्दे अमजद रसूले करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के पास जाउंगा ।
जन्नत के नौजवानों के सरदार की शहादत :-
ताक़त जवाब दे चुकी थी, चारों तरफ से तलवारों और नेज़ों की बारिश हो रही थी। आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु घोड़े पर न संभल सके। तपती हूई रेत पर गिर पड़े। दुश्मन अगर चाहता तो आप रजियल्लाहु तआला अन्हु को उस से बहोत पेहले शहीद कर देता मगर कोई शख़्स नबी-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का खून अपने ज़िम्मे नहीं लेना चाहता था। अब शिम्र बिन ज़ीलजोशन चल आया और ज़रआ इब्ने शरीक तमीमी ने आगे बढ़ कर आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के दाएं हाथ को ज़ख़्मी किया फिर शाने पर तलवार मारी। आप जोअफ से लड़खड़ाए तो सनान बिन अनस नखईने आगे बढ़ कर नेज़ा मारा और आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु बेहोश हो कर गिर पड़े ।

आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के लिये जन्नतुल फिरदौस के तमाम दरवाज़े खुल चुके थे । हूराने फ़िरदौस आप को फिरदौस के झोंको से झांक रही थी। हामलाने उस आप की आमद के मुंतज़िर थे। सालेहीन, सिद्दीकीन और अंबिया अलैहिस्सलाम रूहें इस्तक्बाले नवासाए सरवरे अंबिया सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के लिये तैय्यार थी। मलाए आला में एक शोर बरपा था, जब मैकी तज़ईनो आराईश की जा रही थी कि जवानाने जन्नत का सरदार आने वाला है।
आप ने वफूरे इन्तिशार हवास में करवट बदली और आंख खोल कर देखा तो नमाज़े असर का वक्त था । फौरन सजदे में झूक गए और नमाज़े असर अदा की। इसके बाद शिम्र ने हुक्म दिया कि सर काट लो। मगर उस वक़्त भी आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के चेहरे पर रोबो जलाल की येह कैफियत कि किसी को सर काटने की जुरअत न हूई । शीष बिन रबिआ आगे बढ़ा, उस की भी यही हालत हुई । आख़िर शिम्र दौड़ कर आप के सीने अतहर पर सवार हो गया और जिस्म औंधा कर के सर तन से जुदा कर दिया । दुनिया ने शकावत, जुल्म और बरबरियत के बहोत से मनाज़िर देखें होंगे, लेकिन ऐसा खौफनाक सानिहा न देखा और न देखेगी । इन्ना लिल्लाहि व इन्ना अलैहि राजिऊन।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….