सदक़े की बरकत और अल्लाह की रहमत
हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि किसी जंगल में एक शख़्स रहता था। बदली में उसने यकायक यह आवाज़ सुनी कि फ़्लां शख़्स के बाग को पानी दे।
इस आवाज़ के साथ वह बदली चली और एक कंकरीले-पथरीले इलाके में खूब पानी बरसा और तमाम एक नाले में जमा हो कर चला। यह शख़्स उस पानी के पीछे हो लिया। देखता क्या है कि एक शख़्स अपने बाग में खड़ा हुआ बेलचे से पानी भर रहा है।
उसने बाग वाले से पूछा कि ऐ अल्लाह के बन्दे ! तेरा क्या नाम है ? उसने वही नाम बताया, जो उसने बदली से सुना था। फिर बाग वाले ने उससे पूछा, ऐ खुदा के बन्दे ! तू मेरा नाम क्यों पूछता है? उसने कहा कि मैंने उस बदली में, जिसका यह पानी है, एक आवाज़ सुनी कि तेरा नाम लेकर कहा कि इसके बाग को पानी दे, तू ऐसा क्या काम करता है कि इतना मक़बूल यानी कुबूल किया गया, यानी अपनाया गया है ?
उसने कहा, जब तूने पूछा, तो मुझको कहना ही पड़ा कि मैं इसकी कुल पैदावार को देखता हूं और एक तिहाई खैरात कर देता हूं एक तिहाई अपने बाल-बच्चों के लिए रख लेता हूं और एक तिहाई फिर इस बाग़ में लगा देता हूं।
फायदा-सुब्हानल्लाह’, खुदा की क्या रहमत है है कि जो उसके कहे पर चलता है, उसके अनजाने ही काम इस तरह पूरे हो जाते हैं कि उसे ख़बर भी नहीं होती। सच है, जो अल्लाह का हो गया, उसका अल्लाह हो गया।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
खूबसूरत बयान:रोज़े का बयान | Roze ka Bayan.
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
