इस्लामी तारीख
हाबील के क़त्ल के बाद अल्लाह तआला ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम को हजरत शीस अलैहिस्सलाम जैसा नेक फ़रजन्द अता फरमाया। वह हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के सच्चे जानशीन हुए और आगे चल कर पूरी नस्ले इन्सानी का सिलसिला इन्हीं से चला, अल्लाह तआला ने उन को नुबुव्वत से नवाज़ा और पचास सहीफे उन पर नाज़िल फ़रमाए।
जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का इन्तेक़ाल हुआ तो हज़रत जिब्रईल अलैहिस्सलाम के हुक्म से हजरत शीस अलैहिस्सलाम ही ने नमाज़े जनाजा पढ़ाई, उन्होंने हजूरा नामी औरत से निकाह किया और उन से एक लड़का और एक लड़की पैदा हुई, हजरत शीस अलैहिस्सलाम ने अपनी ज़िन्दगी मक्का में गुजारी और हर साल हज व उमरा करते रहे।
उन को दिन रात में मुख्तलिफ इबादतों का तरीक़ा सिखाया गया था और एक बड़े तूफान के आने और सात साल तक रहने की खबर दी गई थी। हजरत शीस अलैहिस्सलाम ने नौ सौ बारा साल की उम्र पाई, जब इन्तेकाल का वक़्त क़रीब आया, तो अपने बेटे अनूश को अल्लाह के अहकाम के मुताबिक़ जिन्दगी गुजारने की वसिय्यत फरमाई, वफात पाने के बाद अपने वालिदैन के पहलू में जबले अबी कुबैस के गार में दफ्न किए गए।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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