15/04/2026
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दीन में नमाज़ की अहमियत | Deen me Namaaz ki Ahmiyat.

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Deen me Namaaz ki Ahmiyat
Deen me Namaaz ki Ahmiyat

एक फ़र्ज के बारे में

एक आदमी ने नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से अर्ज़ किया ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम! इस्लाम में अल्लाह के नज़दीक सब से ज्यादा पसन्दीदा अमल क्या है? आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नमाज को उस के वक़्त पर अदा करना और जो शख़्स नमाज को जान बूझ कर छोड़ दे उस का कोई दीन नहीं है और नमाज़ दीन का सुतून है।”
(बैहकी फी शोअबिल ईमान: 2683 अन उमर रजि०)

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….

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