28/01/2026
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वो माँ जिसने वुज़ू की हालत में दूध पिलाया | vah man jisne vaju ki halat mein dudh pilaya.

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vah man jisne vaju ki halat mein dudh pilaya.
vah man jisne vaju ki halat mein dudh pilaya.

एक अमीर काबुल के बादशाह गुज़रे हैं जिनका नाम था दोस्त मुहम्मद। उनके बारे में आता है कि एक बार दुश्मन ने हमला किया, उन्होंने बेटे को भेजा कि अपनी फौज लेकर जाओ और जाकर उनके साथ जंग करो। अब जब वह जंग हुई कुछ दिनों के बाद उनकी एजेन्सी ने उनको आकर इत्तिला दी कि शहज़ादा भागा और दुश्मन ने उस पर वार किया, उसकी पीठ पर ज़ख़्म भी आये मगर वह बच निकला और कहीं छुप गया और उसको शिकस्त हो गयी।

अब यह सुनकर काबुल के अमीर का दिल बड़ा गमगीन हुआ, बड़ा परेशान हुआ। घर आया बीवी नेक थी, पहचान गयी कि शौहर को कोई सदमा है। नेक बीवियाँ ऐसे वक़्त में अल्लाह की रहमत की प्यामबर बनकर आती हैं और अपने शौहर के दुख बाँट लेती हैं। उसने प्यार से पूछा आज मैं आपको ग़मज़दा पाती हूँ क्या बात है?

शौहर ने बताया कि इत्तिला आई है कि मेरे बेटे ने शिकस्त खायी, उसकी पीठ पर ज़ख़्म आये, ज़ख़्मी हालत में बच निकला और कहीं छुप गया है। मेरी एजेन्सियों ने इत्तिला दी है। जब उसने यह सुना कहने लगी आपकी बात ठीक होगी मगर मेरे नज़दीक यह बात गलत है, यह बात कभी ठीक नहीं हो सकती। शौहर ने कहा वह क्यों?

कहने लगी बस मैं कह रही हूँ मैं उसकी माँ हूँ मैं उस बेटे को जानती हूँ। यह ख़बर बिल्कुल गलत है। आप तसल्ली रखिये ग़मज़दा होने की ज़रूरत नहीं, हमारा बेटा ऐसा कभी नहीं कर सकता। काबुल के अमीर हैरान हैं। वह कहने लगे तुझे क्यों नहीं समझ आ रही मुझे कितने लोगों ने इत्तिला दी है। यह कहने लगी हरगिज़ नहीं!

यह बात बिल्कुल गलत है, चाहे सैकड़ों लोग आकर कहें मगर फिर भी यह बात गलत है। उस शौहर ने सोचा औरतों की आदत होती है। मुर्गे की एक टाँग हाँकती रहती हैं। और यह बात मानती नहीं, ज़िद करके रह जाती हैं। मेरी बीवी भी शायद यही कर रही है। मगर तीसरे दिन इत्तिला मिली क वह पहली ख़बर तो बिल्कुल गलत थी, शहजादे को अल्लाह ने फतह अता फरमा दी, और वह फातेह बनकर वापस लौट रहा है।

जब काबुल के बादशाह को इत्तिला मिली उसने घर आकर बताया कि वह तो बात वाकई ग़लत निकली, मेरी एजेन्सियों की बात ठीक नहीं थी, मगर यह तो बातओ कि तुम्हारा मामला क्या है? तुमने कैसे कह दिया कि यह बात गलत है। तुम्हें कैसे पता चल गया? वह कहने लगी यह एक राज़ है। मैंने अपने और अल्लाह के दरमियान रखा था, सोचा था किसी को नहीं बताऊँगी। कहने लगा मैं शौहर हूँ मुझे ज़रूर बता दो।

कहने लगी राज़ यह है कि जब यह बच्चा मेरे पेट में आया मैंने उस वक़्त से कोई संदिग्ध लुक्मा अपने मुँह में नहीं डाला, और जब बच्चे की पैदाईश हुई मैंने नीयत कर ली कि मैं अपने इस बच्चे को हमेशा वुजू की हालत में दूध पिलाऊँगी, मैंने उसको कभी बेवुजू दूध नहीं पिलाया। इसकी बरकत थी जिसकी वजह से बच्चे के अन्दर बहादुरी आई, अच्छे अख़्लाक आये।

यह कैसे मुम्किन है कि मेरा बच्चा शिकस्त खाता, यह शहीद हो सकता था, यह दुश्मन के सामने कट सकता था मगर पीठ फेरकर नहीं भाग सकता था। यह तो बुज़दिलों का काम होता है। अल्लाह ने मेरे गुमान को सच्चा कर दिया।

खूबसूरत वाक़िआ:-जंगे-उहुद का वाक़िआ |

देखिये ! पहले वक़्त की मलिका (रानी) भी ऐसी नेक होतीं थीं, अपने बेटों को वुज़ू करके दूध पिलाती थीं, और आजकल की बच्चियों का तो यह हाल है कि सीने से लगाकर बच्चों को दूध पिला रही होती हैं और सामने टी० वी० पर ड्रामे देख रही होती हैं, गाने सुन रही होती हैं। थिरकते जिस्मों को देख रही होती हैं।

ऐ माँ! तू जब बच्चे को दूध पिलाती है तो यह तेरा बेटा बड़ा होकर इमाम ग़ज़ाली कैसे बनेगा? तूने तो बचपन में ही इसकी रूहानियत का गला घोंट कर रख दिया कि ऐसी हालत में दूध पिलाया, यह दूध उसके अन्दर जाकर क्या फ़साद (बिगाड़) मचायेगा। इसलिए चाहिये कि हम अपने बच्चों की अच्छी तरबियत करें।

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….

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