28/01/2026
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चुगलखोरी का नुक्सान। Chugalkhori ka nuksan.

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Chugalkhori ka nuksan.
Chugalkhori ka nuksan.

चुगलखोरी का नुक्सान बयान करते हुए इमाम ग़ज़ाली रहमतुल्लाहि ताअला अलैह ने यह वाक़िआ नकल किया है कि एक शख़्स बाज़ार में गुलाम ख़रीदने गया।

एक गुलाम पसन्द आ गया। बेचने वाले ने कहा कि इस गुलाम में कोई ऐब नहीं है बस यह है कि इसमें चुगली की आदत है। ख़रीदार राज़ी हो गया और गुलाम ख़रीद कर घर ले आया। अभी कुछ ही दिन हुए थे कि गुलाम की चुगलखोरी की आदत ने यह गुल खिलाया कि उसने उस शख़्स की बीवी से तन्हाई में जाकर कहा कि तुम्हारा शौहर तुम्हें पसन्द नहीं करता और अब उसका इरादा बांदी रखने का है।

लिहाज़ा रात को जब वह सोने आये तो उस्तरे से उसका कुछ बाल काटकर मुझे दे दो ताकि मैं उसपर जादू कराकर तुम दोनों में दोबारा मुहब्बत का इन्तिज़ाम कर सकूँ। बीवी इस पर तैयार हो गई और उसने उस्तरे का इन्तिज़ाम कर दिया। इधर गुलाम ने अपने आक़ा से जाकर यूँ बात बनाई कि तुम्हारी बीवी ने किसी गैर मर्द से ताल्लुक़ात पैदा कर लिए हैं और अब वह तुम्हें रास्ते से हटा देना चाहती है, इसलिए होशियार रहना।

रात को जब वह बीवी के पास गया तो देखा कि बीवी उस्तरा ला रही है। वह समझ गया कि गुलाम ने जो ख़बर दी थी वह सच्ची थी। इसलिए इससे पहले कि बीवी कुछ कहती उसने उसी उस्तरे से बीवी का काम तमाम कर दिया। जब बीवी के घर वालों को इस वाक़िए का इल्म हुआ तो उन्होंने आकर शौहर को क़त्ल कर दिया। इस तरह अच्छे खासे ख़ानदानों में खूँ-रेज़ी की नौबत आ गई। (इहयाउल-उलूम, पेज 903)

अल्-गरज़ गीबत और चुगली ऐसी बद्तरीन बीमारियाँ हैं जिससे समाज फसाद की आमाजगाह बन जाता है।

खूबसूरत वाक़िआ:-जब एक आवाज़ ने बदल दी तक़दीर।

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….

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