04/02/2026
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चांद देखने की दुआ और बयान| Chand Dekhne ki Dua aur Bayan.

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Chand Dekhne ki Dua aur Bayan.
Chand Dekhne ki Dua aur Bayan.

चांद देखने की दुआ :-

अल्लाहुम्मा अहिल्हू अलयना बिल-युमनी वल-ईमानि वस-सलामती वल-इस्लामि, रब्बी व रब्बुका अल्लाह।

तर्जुमा- “ऐ अल्लाह! इस चांद को हम पर बरकत, ईमान और सलामती वाला बना दे। हमें ऐसी नेकियां करने की तौफीक दे जो तुझे पसंद हों। ऐ चांद ! मेरा और तेरा रब अल्लाह ही है।”

मस्अला : 1- अगर आसमान पर बादल है या गर्द है, इस वजह से रमज़ान का चांद नहीं आया, लेकिन एक दीनदार परहेज़गार सच्चे आदमी ने आकर गवाही दी कि मैंने रमज़ान का चांद देखा है, तो चांद का सबूत हो गया, चाहे वह मर्द हो या औरत।

मस्अला 2 अगर बदली की वजह से ईद का चांद नहीं दिखायी दिया, तो एक आदमी की गवाही का एतबार नहीं है, चाहे जितना बड़ा एतबार वाला आदमी हो, बल्कि दो एतबार वाले और परहेज़गार मर्द या एक दीनदार मर्द और दो दीनदार औरतें अपने चांद की गवाही दें, तब चांद का सबूत होगा, वरना अगर चार औरतें अपने चांद देखने की गवाही दें, तो भी कुबूल नहीं है।

मस्अला 3 जो आदमी दीन का पाबंद नहीं, बराबर गुनाह करता रहता है जैसे नमाज़ नहीं पढ़ता या रोज़ा नहीं रखता या झूठ बोला करता है या और कोई गुनाह करता है, शरीअत की पाबंदी नहीं करता, तो शरीअत में उसकी बात का कुछ एतबार नहीं है, चाहे जितनी कस्में खा कर बयान करे. बल्कि ऐसे अगर दो-तीन आदमी हों, उनका भी एतबार नहीं।

मस्अला 4- यह मशहूर बात है कि जिस दिन रजब की चौथी होती है, उस दिन रमज़ान की पहली होती है। शरीअत में इसका कोई एतबार नहीं है। अगर चांद न हो, तो रोज़ा नहीं रखना चाहिए।

मस्अला 5- चांद देख कर यह कहना कि बहुत बड़ा है, कल का मालूम होता है, यह बुरी बात है। हदीस में आया है कि कियामत की निशानी है, जब कियामत नज़दीक होगी तो लोग ऐसा कहा करेंगे। खुलासा यह है कि चांद के बड़े-छोटे होने का भी एतबार न करो, न हिन्दुओं की इस बात का एतबार करो कि आज दूज है, आज ज़रूर चांद है, शरीअत से ये बेकार की बातें हैं।

मस्अला 6 अगर आसमान बिल्कुल साफ हो तो दो चार आदमियों के कहने और गवाही देने से भी चांद साबित न होगा, चांद रमज़ान का हो या ईद का। हां, अगर इतनी कसरत से लोग अपना चांद देखना बयान करें कि दिल गवाही देने लगे कि सबके सब बात बना कर नहीं आये, इतने लोगों का झूठा होना किसी तरह नहीं हो सकता, तब साबित होगा।

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शहर में यह ख़बर मशहूर है कि कल चांद हो गया बहुत लोगों ने देखा, बहुत ढूंढा, खोजा, लेकिन फिर भी कोई ऐसा आदमी नहीं मिला, जिसने खुद चांद देखा हो, तो ऐसी खबर का कुछ ऐतबार नहीं है।

मस्अला 7 किसी ने रमज़ान शरीफ का चांद अकेले देखा,अलावा उसके शहर भर में किसी ने नहीं देखा, लेकिन यह शरअ का पाबंद नहीं है, तो उसकी गवाही से शहर वाले तो रोज़ा न रखें, लेकिन वह खुद रोज़ा रखे और अगर उस अकेले देखने वाले ने तीस रोज़े पूरे कर लिए लेकिन अभी ईद का चांद नहीं दिखायी दिया, तो 31 वां रोज़ा रखे और शहर वालों के साथ ईद करे।

मस्अला 8 अगर किसी ने ईद का चांद अकेले देखा, इसलिए उसकी गवाही का शरीअत ने एतबार नहीं किया, तो इस देखने वाले आदमी को भी ईद करना दुरुस्त नहीं है। सुबह को रोजा रखे और अपने चांद देखने का एतबार न करे और रोज़ा न तोड़े।

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….

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