Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
कभी-कभी इंसान ऐसी मुसीबत में फँस जाता है जहाँ उसे हर तरफ़ से कोई रास्ता नज़र नहीं आता। लेकिन जब बंदा सच्चे दिल से अल्लाह तआला की तरफ़ रुजू करता है और अपने नेक आमाल को याद करके दुआ करता है, तो अल्लाह तआला उसके लिए ऐसी राह खोल देता है जिसका उसे गुमान भी नहीं होता।
ऐसा ही एक हैरतअंगेज़ और सबक़-आमोज़ वाक़िया बनी इसराईल के तीन आदमियों का है। सफ़र के दौरान तेज़ बारिश से बचने के लिए तीनों एक ग़ार में दाख़िल हुए, लेकिन अचानक एक बड़ी चट्टान लुढ़ककर ग़ार के मुँह पर आ गिरी और बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
अब तीनों ने अपनी-अपनी ज़िंदगी के ऐसे नेक अमल अल्लाह तआला की बारगाह में पेश किए, जो उन्होंने सिर्फ़ उसकी रज़ा के लिए किए थे। किसी ने माँ-बाप की खिदमत की, किसी ने अल्लाह के ख़ौफ़ से गुनाह छोड़ दिया, और किसी ने मज़दूर की पूरी मज़दूरी ईमानदारी से अदा की।
फिर जो हुआ, वह हमारे लिए ईमान, तक़वा, पाकदामनी और नेक अमल की बड़ी अहम सीख रखता है। आइए इस पूरे वाक़िए को जानते हैं और देखते हैं कि अल्लाह तआला ने उन तीनों को इस मुश्किल मुसीबत से किस तरह निजात अता फ़रमाई।
ग़ार का मुँह खुल गया
हदीसे मुबारका में बनी इसराईल के तीन आदमियों का वाक़िआ मंकूल है। एक सफ़र के दौरान सख्त बारिश होने लगीं तो वह बचने के लिए एक गार के अन्दर छिप गए।
अल्लाह तआला की शान देखिए कि तूफ़ानी बारिश की वजह से एक बड़ी चट्टान लुढ़कती हुई गार के मुँह पर आ पड़ी। चट्टान इतनी बड़ी थी कि ये तीनों मिलकर ज़ोर लगाते तो भी न हिला सकते। बाहर निकलने का रास्ता बिलकुल नहीं था। तीनों को मौत सामने खड़ी मुस्कराती नज़र आई।
इस परेशानी, ग़म और ख़ौफ़ की हालत में तीनों ने फ़ैसला किया कि अपनी-अपनी जिन्दगी का कोई अमल अल्लाह ताआल की बारगाह में पेश करके निजात की दुआ मांगे। एक ने कहा मैंने माँ-बाप की बहुत खिदमत की। मैं बकरियों का दूध पहले माँ को पेश करता बाद में सोया करता था।
एक रात जब मैं दूध लेकर हाज़िर हुआ तो मेरी माँ सो चुकी थी। मैंने जगाना मुनासिब न समझा और दूध हाथ में लेकर खड़ा इंतेज़ार करता रहा यहाँ तक कि सुबह हो गई। ऐ अल्लाह मेरे इस अमल को क़बूल कर के हमें निजात अता फ़रमा। चट्टान एक तिहाई सरक गई फिर भी अभी निकलने का रास्ता न बना था।
दूसरे ने कहा ऐ अल्लाह मैं अपनी भरपूर जवानी की उम्र में अपनी खूबसूरत चचाज़ाद बहन पर आशिक़ था। मैंने उसे फुसलाने के लिए कई हीले बहाने किए मगर वह पाक-साफ़ रही और मेरे जाल में न फँसी। एक मर्तबा तंगदस्तती के हालात में मजबूर होकर यह मुझ से क़र्ज़ लेने आई। मैंने उसे इस शर्त पर पैसे देने का वादा किया कि वह मेरी ख़्वाहिश पूरी करे। मरती क्या न करती, उसने हामी भर दी।
जब मैं जिमाअ के लिए उसके क़रीब आया तो उसने कहा, अल्लाह से डर और इस मोहर को न तोड़। उसके अल्फ़ाज़ बिजली बनकर गिरे। मुझपर अल्लाह तआला का ख़ौफ़ तारी हो गया। मैंने उसे पैसे भी दे दिए और बुराई भी न की। ऐ अल्लाह ! अगर यह मेरा अमल आपके यहाँ मक़बूल हैं तो हमें इस मुसीबत से निजात अता फ़रमाइए।
चट्टान दूसरी तहाई भी सरक गई। फिर भी निकलने का रस्ता न बना। तीसरे ने कहा ऐ अल्लाह ! मेरा एक मज़दूर मज़दूरी लिए बगैर किसी वजह से नाराज़ होकर चला गया। मैंने उसके पैसों से बकरी खरीदी। वक़्त गुज़रने के साथ वह भरपूर रेवड़ बन गया। काफ़ी मुद्दत के बाद वह अपनी मज़दूरी लेने के लिए आया तो मैंने पूरा रेवड़ उसे पेश कर दिया।
ये भी पढ़ें: दुरूद शरीफ की ऐसी बरकत! 3000 दीनार का कर्ज़ कैसे उतरा? | हैरतअंगेज़ वाक़िया
ऐ अल्लाह ! अगर मेरा यह अमल आपके यहाँ मक़बूल है तो हमें इस मुसीबत से निजात अता फ़रमा। चट्टान मज़ीद हट गई और हम तीनों दोस्त गार से बाहर निकल आए।
इस वाकिए में हमारे उनवान से मुताल्लिक दूसरे आदमी का अमल है जिसने ख़ौफ़े ख़ुदा की वजह से गुनाह को छोड़ा और उसका अमल अल्लाह तआला के यहाँ मक्बूल हुआ। इससे सबक मिला कि पाकदामन इनसान अल्लाह तआला का मक़बूल बंदा होता है। अल्लाह तआला उसको दुनिया के गर्मी से भी बचाते हैं और क़दम-क़दम पर उसकी पुश्तपनाही भी फ़रमाते हैं।
FAQ – ग़ार में फँसे तीन आदमियों का वाक़िया
सवाल 1: ग़ार में कितने आदमी फँसे थे?
जवाब: हदीस में तीन आदमियों का वाक़िया बयान हुआ है, जो सफ़र के दौरान बारिश से बचने के लिए एक ग़ार में दाख़िल हुए थे।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 2: ग़ार का रास्ता कैसे बंद हुआ?
जवाब: एक बड़ी चट्टान लुढ़ककर ग़ार के मुँह पर आ गिरी, जिससे बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 3: उन तीनों ने मुसीबत से निकलने के लिए क्या किया?
जवाब: उन्होंने अपने उन नेक आमाल का ज़िक्र करके अल्लाह तआला से दुआ की, जो उन्होंने सिर्फ़ उसकी रज़ा के लिए किए थे।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 4: पहले आदमी ने कौन सा नेक अमल किया था?
जवाब: उसने अपने माँ-बाप की खिदमत की थी। वह अपनी मेहनत से हासिल किया हुआ दूध पहले अपने वालिदैन को देता था और उनकी वजह से अपने आराम को भी पीछे रखता था।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 5: दूसरे आदमी का नेक अमल क्या था?
जवाब: वह एक औरत को गुनाह की तरफ़ बुलाने की हालत में था, लेकिन जब उस औरत ने उसे अल्लाह से डरने की याद दिलाई तो उसने ख़ौफ़-ए-ख़ुदा की वजह से गुनाह छोड़ दिया।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 6: तीसरे आदमी ने क्या नेक काम किया था?
जवाब: उसके एक मज़दूर की मज़दूरी उसके पास रह गई थी। उस रकम को उसने ईमानदारी से संभालकर रखा और जब मज़दूर वापस आया तो उसकी मज़दूरी से बढ़ने वाला पूरा माल उसे दे दिया।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 7: क्या उनके नेक आमाल की वजह से चट्टान हट गई?
जवाब: जी, उन्होंने अपने नेक आमाल का वास्ता देकर अल्लाह तआला से दुआ की। हर दुआ के बाद चट्टान कुछ-कुछ हटती गई, आखिरकार रास्ता खुल गया और तीनों बाहर निकल आए।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 8: इस वाक़िए से सबसे बड़ी सीख क्या मिलती है?
जवाब: इससे पता चलता है कि इख़लास के साथ किया हुआ नेक अमल बहुत बड़ी नेमत है। मुसीबत के वक्त अल्लाह तआला से सच्चे दिल से दुआ करनी चाहिए और अपने नेक आमाल को दिखावे के लिए नहीं बल्कि उसकी रज़ा के लिए करना चाहिए।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 9: क्या इस वाक़िए में वालिदैन की खिदमत की अहमियत भी पता चलती है?
जवाब: जी हाँ। वालिदैन की खिदमत बहुत बड़ी नेकी है। इंसान को उनकी इज़्ज़त, खिदमत और जायज़ बातों में फरमाबरदारी का ख़ास ख़याल रखना चाहिए।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
सवाल 10: इस वाक़िए में गुनाह छोड़ने से क्या सबक मिलता है?
जवाब: जब इंसान अल्लाह तआला के ख़ौफ़ से गुनाह करने का मौक़ा होने के बावजूद उसे छोड़ देता है, तो यह उसके तक़वा और ईमान की बड़ी निशानी है।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Ghaar Ka Muh Band Ho Gaya
खुदा हाफिज़…..
