Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
इस्लाम हमें पाकीज़गी, तहारत और अल्लाह की रहमत हासिल करने वाले कामों की तालीम देता है। हदीस शरीफ़ में कुछ ऐसे अमल भी बताए गए हैं जिनकी वजह से रहमत के फ़रिश्ते किसी घर में दाख़िल नहीं होते। इन्हीं में जुनुबी (जिस पर गुस्ल फ़र्ज़ हो), जानदार की तस्वीरें और बिना शरई ज़रूरत के कुत्ता रखना शामिल है।
इस आर्टिकल में हम हदीस की रौशनी में जानेंगे कि जुनुबी हालत में देर तक रहना क्यों मकरूह है, फ़रिश्ते किन घरों में नहीं आते, तस्वीर और कुत्ता रखने का इस्लामी हुक्म क्या है, और अगर किसी पर गुस्ल फ़र्ज़ हो जाए तो उसे क्या करना चाहिए। साथ ही यह भी समझेंगे कि इन अहकाम का सही मतलब क्या है और एक मुसलमान को अपनी ज़िंदगी में किन बातों का ख़ास ख़याल रखना चाहिए।
अगर आप फ़रिश्तों की रहमत पाने और शरीअत के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारने की सही जानकारी चाहते हैं, तो इस लेख को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह, आपको इस विषय से जुड़े अहम इस्लामी मसाइल आसान भाषा में समझ में आ जाएंगे।
हदीस
हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि जिस घर में तस्वीर या कुत्ता हो या जुनुबी यानी ऐसा मर्द या औरत हो जिस पर गुस्ल फर्ज़ हो, ऐसे घर में फरिश्ते दाखिल नहीं होते। (मिश्कात शरीफ पेज 50)
तशरीहः जिस पर गुस्ल फर्ज़ हो उसके लिए यह जायज़ तो है कि नमाज़ पढ़ने का वक़्त होने तक गुस्ल न करे, लेकिन बेहतर यही है कि जल्द से जल्द गुस्ल कर ले। और वजह इसकी यह है कि फरिश्तों को जुनुबी यानी नापाक आदमी, जिस पर गुस्ल फर्ज़ हो से ज़िद है।
जिस घर में जुनुबी हो उसमें जाने से फरिश्तों को तकलीफ महसूस होती है। इसलिए उस घर में नहीं जाते. जिसमें जुनुबी हो। इस हदीस में यह बात बतायी है, अलबत्ता एक हदीस में यह आया है कि जुनुबी अगर वुजू कर ले तो फरिश्तों को उसके करीब जाने से गुरेज़ नहीं होता, लिहाज़ा गुस्ल फ़र्ज़ हो जाने के बाद अगर अगर गुस्ल करने में नफ़्स सुस्ती करने लगे तो कम-से-कम वुजू ही कर लें।
खुसूसन रात को अगर ऐसी सूरत पेश आ जाये तो वुज़ू करके सो जायें और फिर फज्र की अज़ान हो जाने पर गुस्ल करके फज्र की नमाज़ अदा कर लें। गुस्ल फर्ज़ हो जाने की हालत में अगर कुछ खाना चाहे तो वुजू करके खाना-पीना बेहतर है।
इस हदीस में यह भी है कि फरिश्ते उस घर में भी दाखिल नहीं होते जिसमें तस्वीर हो या कुत्ता हो। तस्वीर अगर किसी पेड़ या इमारत की हो तो घर में रख सकते हैं, बशर्तेकि कुफ्र व फिस्क (बुराई और गुनाह) की निशानी न हो और उसके साथ किसी जानदार की तस्वीर न बनी हुई हो। और जानदार की तस्वीर बनाना या घर, दफ़्तर वगैरह में लगाना और सजाना सब हराम है।
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इसी तरह कुत्ता पालने के बारें में भी सख़्त वईद (तंबीह और डॉट) आयी है। शौकिया कुत्ता पालने की सख़्त मनाही है, अलबत्ता खेती की हिफाज़त और घर की हिफाज़त और शिकार के लिए कुत्ता पाल सकते हैं।
हदीस शरीफ में जो यह फरमाया कि फरिश्ते उस घर में दाखिल नहीं होते जिसमें तस्वीर या कुत्ता या जुनुबी हो, इससे रहमत के फरिश्ते मुराद हैं। जो फरिश्ते आमाल लिखने की ड्यूटी अन्जाम देते हैं या जान निकालने के काम पर लगाये गये हैं, उनको हर घर में जाना पड़ता है, मगर नागवारी के साथ जाते हैं।
आजकल मुसलमानों पर यह मुसीबत सवार है कि दुश्मनों की देखा-देखी तस्वीरों से घर भरा रखते हैं और शौकिया कुत्ते भी पालते हैं, और अपने अमल से रहमत के फरिश्तों को घर में आने से रोकते हैं।
एक कुत्ता पालने वाला जाहिल कहने लगा कि जब फरिश्ते कुत्ता होते हुए घर में दाखिल नहीं होते तो हम हर वक़्त कुत्ता घर में रखेंगे, फिर हमारी रूह फरिश्ता कैसे कब्ज़ करेगा? एक आलिम ने जवाब दिया कि जो फरिश्ता कुत्ते की रूह कब्ज़ करता है वही उसकी रूह कब्ज़ करेगा जो मौत से बचने के लिए कुत्ते को घर में घुसाये रहेगा।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और जवाब)
1. जुनुबी किसे कहते हैं?
जवाब: जिस मर्द या औरत पर गुस्ल फ़र्ज़ हो गया हो, उसे जुनुबी कहा जाता है। जब तक वह गुस्ल नहीं करता, वह जुनुबी की हालत में रहता है।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
2. क्या जुनुबी के घर में फ़रिश्ते नहीं आते?
जवाब: हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ जिस घर में जुनुबी, जानदार की तस्वीर या बिना शरई ज़रूरत के कुत्ता हो, वहाँ रहमत के फ़रिश्ते दाख़िल नहीं होते। इसलिए गुस्ल में बेवजह देर नहीं करनी चाहिए।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
3. अगर तुरंत गुस्ल करना मुमकिन न हो तो क्या करें?
जवाब: अगर किसी वजह से तुरंत गुस्ल नहीं कर सकते, तो कम से कम वुज़ू करके रहना और वुज़ू करके सोना बेहतर है। फिर मौका मिलते ही गुस्ल कर लेना चाहिए।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
4. क्या जुनुबी हालत में खाना-पीना जायज़ है?
जवाब: जी हाँ, खाना-पीना जायज़ है, लेकिन पहले वुज़ू कर लेना सुन्नत और बेहतर माना गया है।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
5. क्या हर तस्वीर की वजह से फ़रिश्ते घर में नहीं आते?
जवाब: हदीस में जानदार (इंसान या जानवर) की तस्वीरों का ज़िक्र है। पेड़, पहाड़ या ऐसी चीज़ों की तस्वीरें जिनमें जान न हो, उनका हुक्म अलग है।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
6. क्या हर तरह का कुत्ता पालना मना है?
जवाब: शौक़ के लिए कुत्ता पालना मना है। लेकिन खेती, घर की हिफाज़त या शिकार जैसी शरई ज़रूरत के लिए कुत्ता रखना जायज़ है।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
7. क्या गुस्ल में जानबूझकर देर करना सही है?
जवाब: नमाज़ का वक़्त आने से पहले तक गुस्ल में देर करना जायज़ हो सकता है, लेकिन बिना वजह देर करना मकरूह है। बेहतर यही है कि जल्द से जल्द गुस्ल कर लिया जाए।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
8. क्या आमाल लिखने वाले फ़रिश्ते भी ऐसे घर में नहीं आते?
जवाब: नहीं। उलमा ने बयान किया है कि हदीस में रहमत के फ़रिश्ते मुराद हैं। आमाल लिखने वाले और दूसरे फ़रिश्ते अपनी ड्यूटी के मुताबिक़ आते हैं।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
9. क्या वुज़ू करके सोना सुन्नत है?
जवाब: जी हाँ। अगर गुस्ल फ़र्ज़ हो गया हो और तुरंत गुस्ल न कर सकें, तो वुज़ू करके सोना सुन्नत और बेहतर अमल है।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
10. इस हदीस से हमें क्या सीख मिलती है?
जवाब: हमें हमेशा पाकीज़गी का ख़याल रखना चाहिए, गुस्ल में बेवजह देर नहीं करनी चाहिए, घर में गैर-ज़रूरी जानदार तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए और शरई ज़रूरत के बिना कुत्ता नहीं पालना चाहिए, ताकि अल्लाह की रहमत हमारे घर पर बनी रहे।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Farishte Aapke Ghar Kyon Nahi Aate?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
