01/08/2026
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गुस्ल कब फ़र्ज़ होता है? | हैज़, निफ़ास, एहतिलाम और हमबिस्तरी के इस्लामी अहकाम| Ghusl Kab Farz Hota Hai? | Haiz, Nifas, Ehtilam Aur Hambistari Ke Islami Ahkaam

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Ghusl Kab Farz Hota Hai?
Ghusl Kab Farz Hota Hai?

Ghusl Kab Farz Hota Hai?

पाकी और नापाकी इस्लाम का एक बहुत अहम हिस्सा है। नमाज़, तिलावत-ए-क़ुरआन और कई दूसरी इबादतों के लिए पाक होना ज़रूरी है। इसलिए हर मुसलमान मर्द और औरत को यह मालूम होना चाहिए कि गुस्ल कब फ़र्ज़ होता है, किन हालात में गुस्ल करना लाज़िम है, और किन सूरतों में सिर्फ़ वुज़ू काफ़ी होता है।

इस आर्टिकल में हम हैज़, निफ़ास, एहतिलाम, हमबिस्तरी और जनाबत से जुड़े उन सभी अहम इस्लामी अहकाम को क़ुरआन और हदीस की रौशनी में आसान हिन्दी में समझेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि औरत पर गुस्ल किन चार वजहों से फ़र्ज़ होता है और कौन-सी गलतियाँ हैं जिनसे हर मुसलमान को बचना चाहिए।

अगर आप गुस्ल, पाकी और नापाकी के सही इस्लामी मसाइल जानना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह, यह जानकारी आपकी इबादत को सही तरीके से अदा करने और शरीअत के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारने में मददगार साबित होगी।

हदीस

हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा फरमाती हैं कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दरियाफ्त किया गया कि अगर कोई मर्द सोकर उठने के बाद कपड़े पर तरी यानी गीलापन देखे मगर एहतिलाम होना याद न हो तो क्या उसपर गुस्ल फ़र्ज़ है?

इसके जवाब में सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि वो शख़्स गुस्ल करे। फिर यह दरियाफ़्त किया गया कि एक मर्द को एहतिलाम हो गया यानी ख़्वाब में उसने देख लिया कि मनी ख़ारिज हुई मगर जागा तो कोई तरी नज़र न आयी, क्या उस शख़्स पर गुस्ल फ़र्ज़ है?

इसके जवाब में नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम करीम ने फरमाया कि उस शख़्स पर गुस्ल नहीं है। यानी जब मर्द के बारे में यह सवाल-जवाब हो गया तो हज़रत उम्मे सुलैम रज़ियल्लाहु अन्हा ने औरत के बारे में भी यही मसला दरियाफ्त कर लिया और अर्ज किया कि अगर औरत ख़्वाब से जागने के बाद कपड़े या बिस्तर पर तरी देखे तो क्या उसपर भी गुस्ल फ़र्ज़ है?

इसके जवाब में सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि हाँ ! उस सूरत में औरत पर भी गुस्ल फ़र्ज़ है। क्योंकि औरतें मर्दों की बहनें हैं। (मिश्कात शरीफ पेज 48)

तशरीहः कभी-कभी नफ़्सानी उभार की वजह से मर्द व औरत को सोने की हालत में नहाने की ज़रूरत पेश आ जाती है और मनी निकल जाती है। अगर मनी ख़ारिज हो जाये तो गुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है। उसपर नापाक आदमी के अहकाम जारी हो जाते हैं। अगर सिर्फ ख़्वाब नज़र आये और जागने पर कोई तरी गीलापन मालूम न हो तो सिर्फ ख़्वाब की वजह से गुस्ल फ़र्ज़ न होगा। इस हदीस में यही मसला बयान किया गया है।

हदीस

हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा फरमाती हैं कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जब मर्द की ख़तना की जगह यानी आगे का वह हिस्सा जिसकी ख़तना होती है, जिसे सुपारी कहते हैं औरत के ख़ास मुकाम में पहुँच जाये तो दोनों पर गुस्ल फ़र्ज़ हो गया। रिवायत बयान करके हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया कि मैंने रसूले खुदा ने ऐसा किया, फिर हम दोनों ने गुस्ल किया। (मिश्कात पेज 48 जिल्द 1)

तशरीहः एहतिलाम से गुस्ल होने के बारे में तो वही मसला है जो अभी ऊपर पिछली हदीस से मालूम हुआ कि ख़्वाब में मनी ख़ारिज हो गयी तो गुस्ल फ़र्ज़ होगा, महज़ ख़्वाब से गुस्ल फ़र्ज़ न होगा। और अगर मियाँ-बीवी आपस में वह काम करें जिसमें शर्म की सब हदें ख़त्म हो जाती हैं तो इस सूरत में गुस्ल फर्ज़ होने के लिए मर्द या औरत की मनी ख़ारिज होना ज़रूरी नहीं है, बल्कि जब मर्द ने अपने ख़ास जिस्म का अगला हिस्सा यानी सुपारी दाखिल कर दी तो मर्द व औरत दोनों पर गुस्ल फ़र्ज़ हो गया, मनी ख़ारिज हो या न हो।

फायदाः औरत पर गुस्ल चार वजहों से फर्ज़ होता है। खूब याद रखो
(1) माहवारी ख़त्म होने से।
(2) निफ़ास यानी बच्चे की पैदाईश के बाद जो खून आता है उसके ख़त्म होने से।
(3) ख़्वाब में मनी ख़ारिज होने से।
(4) मर्द की हमबिस्तरी से मनी निकले या न निकले जिसकी तशरीह अभी गुज़री ।

मसला

अगर किसी बेहूदा मर्द ने गैर-फितरी मुकाम में सोहबत की, यानी पीछे के रास्ते से अपनी ख़्वाहिश पूरी की और सुपारी अन्दर चली गयी, तब भी दोनों पर गुस्ल फर्ज़ हो गया, मनी ख़ारिज हो या न हो, और यह सख़्त गुनाह है और हराम है। ऐसा करने पर हदीस शरीफ में लानत आयी है।

ये भी पढ़ें:निफास क्या है? | बच्चे की पैदाइश के बाद खून, गुस्ल, नमाज़ और पाकी के सभी इस्लामी मसाइल|

FAQ (सवाल और जवाब)

1. गुस्ल कब फ़र्ज़ होता है?

जवाब: गुस्ल उस समय फ़र्ज़ होता है जब जनाबत की हालत हो, जैसे एहतिलाम (ख़्वाब में मनी निकलना), मियाँ-बीवी की हमबिस्तरी, हैज़ खत्म होना या निफ़ास खत्म होना।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

2. क्या सिर्फ़ एहतिलाम का ख़्वाब देखने से गुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है?

जवाब: नहीं। अगर सिर्फ़ ख़्वाब देखा हो लेकिन जागने पर मनी का कोई निशान न मिले, तो गुस्ल फ़र्ज़ नहीं होता। लेकिन अगर मनी निकलने का निशान मिले, तो गुस्ल फ़र्ज़ होगा।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

3. क्या औरत पर भी एहतिलाम की वजह से गुस्ल फ़र्ज़ होता है?

जवाब: जी हाँ। अगर औरत को भी एहतिलाम हो और मनी का निशान मिले, तो उस पर भी गुस्ल फ़र्ज़ है।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

4. हमबिस्तरी के बाद कब गुस्ल फ़र्ज़ होता है?

जवाब: जब मियाँ-बीवी के बीच हमबिस्तरी हो जाए, तो दोनों पर गुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है, चाहे मनी निकले या न निकले।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

5. औरत पर गुस्ल किन वजहों से फ़र्ज़ होता है?

जवाब: आम तौर पर चार वजहों से:

हैज़ (माहवारी) खत्म होने पर।

निफ़ास (बच्चे की पैदाइश के बाद आने वाला खून) खत्म होने पर।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

एहतिलाम में मनी निकलने पर।

हमबिस्तरी होने पर।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

6. क्या गुस्ल के बिना नमाज़ पढ़ी जा सकती है?

जवाब: नहीं। जिस व्यक्ति पर गुस्ल फ़र्ज़ हो, उसके लिए गुस्ल किए बिना नमाज़ पढ़ना जायज़ नहीं है।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

7. जनाबत की हालत में क़ुरआन शरीफ़ पढ़ सकते हैं?

जवाब: जनाबत की हालत में पहले गुस्ल करके पाक होना चाहिए। इसके बाद ही क़ुरआन की तिलावत की जाए।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

8. क्या हैज़ और निफ़ास के दौरान नमाज़ और रोज़ा होता है?

जवाब: नहीं। हैज़ और निफ़ास की हालत में नमाज़ नहीं पढ़ी जाती और रोज़ा भी नहीं रखा जाता। पाक होने के बाद गुस्ल करके इबादत शुरू की जाती है।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

9. अगर गुस्ल करने से बीमारी या जान का खतरा हो तो क्या करें?

जवाब: ऐसी शरई मजबूरी में तयम्मुम का हुक्म लागू हो सकता है। जब मजबूरी खत्म हो जाए, तो गुस्ल कर लेना चाहिए।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

10. गुस्ल और पाकी के मसाइल कहाँ से सीखने चाहिए?

जवाब: गुस्ल, पाकी और नापाकी के मसाइल हमेशा क़ुरआन, सहीह हदीस और भरोसेमंद उलेमा से सीखने चाहिए। किसी भी शंका की सूरत में योग्य आलिम या मुफ्ती से रहनुमाई लेना बेहतर है।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Ghusl Kab Farz Hota Hai?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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