29/07/2026
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निफास क्या है? | बच्चे की पैदाइश के बाद खून, गुस्ल, नमाज़ और पाकी के सभी इस्लामी मसाइल|Nifas Kya Hai? | Bachche Ki Paidaish Ke Baad Khoon, Ghusl, Namaz Aur Paaki Ke Sabhi Islami Masail

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Nifas Kya Hai?
Nifas Kya Hai?

Nifas Kya Hai?

निफ़ास वह खून है जो बच्चे की पैदाइश के बाद औरत को आता है। इस दौरान इस्लाम ने नमाज़, रोज़ा, गुस्ल, पाकी और इबादत से जुड़े कुछ खास अहकाम बताए हैं, जिन्हें हर मुसलमान औरत के लिए जानना बहुत ज़रूरी है। सही इल्म न होने की वजह से कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं जिनसे बचा जा सकता है।

इस आर्टिकल में हम निफ़ास क्या है, इसकी मुद्दत कितनी होती है, बच्चे की पैदाइश के बाद कब गुस्ल करना चाहिए, कब नमाज़ शुरू करनी चाहिए, अगर खून न आए तो क्या हुक्म है, गर्भ गिर जाने की सूरत में क्या मसला है, और निफ़ास के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इन सभी अहम मसाइल को आसान हिन्दी में समझेंगे।

अगर आप निफ़ास से जुड़े इस्लामी अहकाम को सही तरीके से जानना चाहते हैं, तो इस लेख को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह, यह जानकारी आपके लिए और आपके परिवार की मुस्लिम बहनों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।

मसला

अगर किसी औरत को विलादत यानी बच्चे की पैदाईश के बाद ही खून न आये तो पैदाईश के बाद ही गुस्ल करके नमाज़ शुरू करे। अगर गुस्ल करने से जान का खतरा हो या किसी सख़्त बीमारी में मुब्तला होने का अन्देशा हो, और गर्म पानी भी ऐसा ही नुकसान दे तो गुस्ल की जगह तयम्मुम कर ले और नमाज़ के लिए वुजू और यानी तयम्मुम जायज़ होने की सूरत में तयम्मुम कर लिया जाये।

फिर जब हलाक होने या सख़्त बीमारी में मुब्तला होने का अन्देशा जाता रहे जिसकी वजह से गुस्ल की जगह तयम्मुम किया था तो गुस्ल कर ले। नमाज़ की ताक़त खड़े होकर या बैठकर न हो तो लेटे-लेटे पढ़े।

मसला

यह कोई ज़रूरी नहीं है कि निफास का खून हर वक़्त आता ही रहे, बल्कि निफास की मुद्दत के अन्दर जो खून आयेगा वह निफास होगा, अगरचे दरमियान में दो-चार घण्टे या एक दो दिन तक न आये।

मसला

अगर किसी का नामुकम्मल बच्चा जाता रहा यानी गर्भ गिर गया तो देखा जायेगा कि उसका कोई-आध अंग यानी उंगली, नाखुन वगैरह बन चुका था तो जो खून जारी होगा उसपर निफास के अहकाम जारी होंगे। और अगर कोई अंग न बना था तो जो ख़ून आये वह निफास के हुक्म में न होगा। अलबत्ता बाज़ सूरतों में उसे इस्तिहाज़ा और बाज़ सूरतों में हैज़ कह सकते हैं। ज़रूरत के वक़्त किसी आलिम से मसला दरियाफ्त कर लें।

मसला

अगर एक हमल (गर्भ) से किसी औरत के दो बच्चे पैदा हुए और दोनों की पैदाईश के दरमियान घण्टे दो घण्टे या एक दो दिन या एक माह से ज़्यादा वक़्फ़ा हुआ बशर्तेकि छह माह से कम हो तो पहले ही बच्चे की पैदाईश के बाद से जारी हुआ खून निफास माना जायेगा।

मसला

हमल की हालत में जो ख़ून आये वह हैज़ या निफास नहीं है बल्कि इस्तिहाज़ा है। इसी तरह पैदाईश से पहले जो खून या पानी वगैरह जारी होता है वह भी हैज़ व निफास नहीं है बल्कि इस्तिहाज़ा है। बच्चे का अकसर हिस्सा बाहर आने के बाद जो खून जारी होगा वह निफास होगा।

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मसला

हैज़ और निफास के ज़माने में काबा शरीफ का तवाफ करना हराम है। बहुत-सी औरतें हज को जाती हैं. और मसला मालूम न होने की वजह से ऐसी गलती कर बैठती हैं, फिर जहालत की वजह से उसकी शरई तलाफी भी नहीं करती हैं। अगर किसी ने ऐसा किया हो तो आलिमों से मालूम करके तलाफी करे।

मसला

पैदाईश से छठे दिन जो औरत को गुस्ल देना ज़रूरी समझा जाता है, शरीअत में इसकी कुछ असल नहीं है।

हदीस शरीफ के आख़िर में यह भी फरमाया कि निफास के ज़माने में नहाने-धोने का मौका न मिलने की वजह से जो चेहरे पर झाइयाँ पड़ जाती हैं और मुरझाने का जो असर आ जाता है, उसके लिए चेहरे पर ‘वर्स’ मला करते थे।

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यह एक घास होती थी जिसके मलने से खाल दुरुस्त हो जाती थी जैसा कि बाज़ इलाकों में सन्तरे के छिलकों से यह काम लिया जाता है, और अब इसकी जगह बहुत-से पाउडर और क्रीम चल गयी हैं। इससे मालूम हुआ कि चेहरे को साफ-सुथरा रखना और अच्छा बनाना भी अच्छी बात है मगर काफिरों और फासिकों के ढंग और तर्ज पर न हो।

FAQ (सवाल और जवाब)

1. निफ़ास क्या होता है?

जवाब: बच्चे की पैदाइश के बाद जो खून औरत को आता है, उसे निफ़ास कहा जाता है। इस दौरान नमाज़ और रोज़ा जैसे कुछ अहकाम अलग होते हैं।Nifas Kya Hai?

2. अगर बच्चे की पैदाइश के बाद खून बिल्कुल न आए तो क्या करना चाहिए?

जवाब: अगर पैदाइश के बाद खून न आए, तो औरत गुस्ल करके नमाज़ शुरू कर सकती है। यदि किसी वजह से गुस्ल करना मुमकिन न हो और जान या सेहत का खतरा हो, तो शरई उस्र की हालत में तयम्मुम का हुक्म लागू हो सकता है।Nifas Kya Hai?

3. क्या निफ़ास का खून लगातार आना ज़रूरी है?

जवाब: नहीं। निफ़ास के दौरान बीच-बीच में कुछ घंटों या कुछ दिनों तक खून बंद हो जाए, तब भी निफ़ास के अहकाम जारी रह सकते हैं।Nifas Kya Hai?

4. गर्भ गिर जाने (Miscarriage) की सूरत में क्या निफ़ास होता है?

जवाब: यह इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भ में बच्चे के अंग बने थे या नहीं। अलग-अलग सूरतों में अलग हुक्म हो सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में किसी भरोसेमंद आलिम या मुफ्ती से मसला पूछना चाहिए।Nifas Kya Hai?

5. हमल (गर्भ) के दौरान आने वाला खून क्या है?

जवाब: आम तौर पर हमल के दौरान आने वाला खून हैज़ या निफ़ास नहीं होता, बल्कि इस्तिहाज़ा माना जाता है।Nifas Kya Hai?

6. निफ़ास के दौरान नमाज़ और रोज़ा का क्या हुक्म है?

जवाब: निफ़ास की हालत में नमाज़ नहीं पढ़ी जाती और रोज़ा भी नहीं रखा जाता। पाक होने के बाद गुस्ल करके इबादत शुरू की जाती है।Nifas Kya Hai?

7. क्या निफ़ास की हालत में काबा शरीफ़ का तवाफ़ करना जायज़ है?

जवाब: नहीं। निफ़ास की हालत में तवाफ़ करना जायज़ नहीं है। अगर किसी से ऐसी गलती हो जाए, तो किसी योग्य आलिम से उसका शरई हुक्म मालूम करना चाहिए।Nifas Kya Hai?

8. क्या बच्चे की पैदाइश के छठे दिन गुस्ल करना शरई तौर पर ज़रूरी है?

जवाब: नहीं। शरीअत में ऐसा कोई हुक्म नहीं है कि छठे दिन गुस्ल करना ज़रूरी हो। गुस्ल का हुक्म निफ़ास खत्म होने पर होता है।Nifas Kya Hai?

9. क्या निफ़ास के दौरान सफ़ाई और सेहत का ख़याल रखना चाहिए?

जवाब: जी हाँ। इस्लाम पाकी और सफ़ाई की तालीम देता है। निफ़ास के दौरान भी अपनी सेहत, सफ़ाई और ज़रूरी एहतियात का ख़याल रखना चाहिए।Nifas Kya Hai?

10. निफ़ास के मसाइल कहाँ से सीखने चाहिए?

जवाब: निफ़ास और दूसरे शरीअत के मसाइल हमेशा क़ुरआन, सहीह हदीस और भरोसेमंद उलेमा से सीखने चाहिए। किसी भी शंका की सूरत में योग्य आलिम या मुफ्ती से रहनुमाई लेना बेहतर है।Nifas Kya Hai?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Nifas Kya Hai?

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Nifas Kya Hai?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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