29/07/2026
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कब्रों पर औरतों का जाना, चिराग़ जलाना और सज्दा करना | हदीस की रौशनी में इस्लाम का सही हुक्म | Kabron Par Auraton Ka Jana, Chirag Jalana Aur Sajda Karna | Hadees Ki Roshni Mein Islam Ka Sahi Hukm

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Kabron Par Auraton Ka Jana
Kabron Par Auraton Ka Jana

Kabron Par Auraton Ka Jana

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह।

कब्रों की ज़ियारत से जुड़े कई मसले ऐसे हैं जिनके बारे में लोगों के बीच अलग-अलग बातें सुनने को मिलती हैं। खास तौर पर औरतों का कब्रिस्तान जाना, कब्रों पर चिराग़ जलाना और सज्दा करना जैसे मुद्दों पर सही जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।

इस आर्टिकल में हम कुरआन और सही हदीस की रौशनी में जानेंगे कि इन मामलों में इस्लाम क्या हुक्म देता है, किन कामों से बचने की ताकीद की गई है और कब्रों की ज़ियारत का सही तरीका क्या है। आइए, इल्म हासिल करें और अपने दीन को सही समझ के साथ अपनाने की कोशिश करें। अल्लाह तआला हमें सही बात समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

औरतों को कब्रों पर जाने, उनपर चिराग़ जलाने और सज्दा की जगह बनाने की मनाही

हदीसः हज़रतं अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कब्रों की ज़ियारत के लिए जाने वाली औरतों पर और उन लोगों पर लानत की जो कब्रों को सज्दा-गाह यानी सज्दे का जगह बनायें, और जो कब्रों पर चिराग़ जलायें।(मिश्कात शरीफ पेज 71)

तशरीहः इस हदीस में कब्रों की ज़ियारत करने वाली औरतों और उन लोगों पर लानत फरमायी जो कब्रों को सज्दा-गाह बनायें और जो कब्रों पर चिराग़ जलायें। मालूम हुआ कि कब्रों पर औरतों का जाना सख़्त मना है। और वजह इस मनाही की और लानत की यह है कि औरतें अव्वल तो बेपर्दा होकर जाती हैं, दूसरे कब्रों पर तरह-तरह की बिद्धतें करती हैं और शिर्क के काम करती हैं- जैसे कब्र वाले की मन्नत मानती हैं, और उसे पूरा करने के लिए उसकी कब्र पर जाती हैं, और अल्लाह को छोड़कर कब्र वाले से औलाद माँगती हैं। ये दोनों चीजें शिर्क हैं। और भी इसी तरह की बहुत-सी बिदअतें अन्जाम देती हैं।

ऊपर वाली हदीस से कब्रों को सज्दा-गाह (सज्दे की जगह) बनाने और उनपर चिराग़ जलाने की मनाही भी साबित हुई। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी उस बीमारी में जिसमें आपकी वफात हुई, यह फरमायाः

हदीसः अल्लाह की लानत हो यहूदियों और ईसाइयों पर जिन्होंने अपने नबियों की कब्रों को सज्दा-गाह बना लिया। (बुख़ारी व मुस्लिम)

मालूम हुआ कि कब्रों को सज्दा-गाह बनाने का काम यहूदी व ईसाई किया करते थे। हदीस के आलिमों ने लिखा है कि इन लोगों पर इसलिए लानत फ़रमायी कि वे लोग नबियों की कब्रों को अदब के तौर पर सज्दा किया करते थे जो कि खुला हुआ शिर्क है। और या नमाज़ तो अल्लाह की पढ़ते लेकिन सज्दा नबियों की कब्रों पर करते थे, और नमाज़ की हालत में कब्रों की तरफ मुतवज्जह होते थे।

पहली उम्मतों की तरह उम्मते मुहम्मदिया में भी कब्रों को अदब व सम्मान के लिए सज्दा करने का रिवाज सदियों से चला आ रहा है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जिस चीज़ से सख्ती से रोका और जिसको लानत का सबब बताया, अफसोस कि नाम के पीर व फकीर और कब्रों के मुजाविर लोग वहाँ पर ज़ियारत के लिए आने वाले हज़रात से ऐसे शिर्क भरे आमाल कराते हैं।

इन दीन के दुश्मनों ने सज्दे को ज़ियारत के लिए एक लाज़िमी चीज़ बना रखा है। औलिया-अल्लाह के किसी मज़ार पर अगर जाकर देखा जाये तो बहुत-से मर्द व औरत मज़ार को सज्दा करते हुए नज़र आयेंगे। अल्लाह अपनी पनाह में रखे।

हदीस शरीफ में उन लोगों पर भी लानत फरमायी जो कब्रों पर चिराग़ जलाते हैं। हदीस की किताब मिरकात शरह मिश्कात में लिखा है किः

तर्जुमाः कब्रों पर चिराग़ जलाने की मनाही इस वजह से है कि इसमें माल का ज़ाया करना है जो कि फुजूलखर्ची है, जिसकी वजह यह है कि चिराग़ से किसी (मय्यित) को कोई नफा नहीं। और मनाही की एक वजह यह है कि आग दोज़ख के आसार में से है लिहाज़ा मोमिन की कब्र पर आग नहीं होनी चाहिये। और चिराग जलाना कब्रों के अदब व सम्मान के लिए भी होता है, इस वजह से भी मना है, जैसा कि सज्दे की जगह बनाना मना है।

मिरकात के लेखक ने यह जो फरमाया कि कब्र पर चिराग जलाने में किसी मय्यित को कुछ नफा नहीं है। इसकी तशरीह यह है कि अगर मय्यित अज़ाब में है और उसकी कब्र में अंधेरा है तो बाहर के उजाले से उसे कोई फायदा नहीं होगा। और अगर वह अल्लाह तआला के इनाम व इकराम में है तो उसकी कब्र नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के फरमान के मुताबिक खुद मुनव्वर (रोशन) है, और बाहर की रोशनी की उसे हाजत नहीं। और सब को मालूम है कि उमूमन जिन हज़रात को बुजुर्ग समझा जाता है उन्हीं की कब्रों पर चिराग जलाए जाते हैं, यह अक़्ल व नकल के खिलाफ नहीं तो और क्या है?Kabron Par Auraton Ka Jana,

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दर हकीकत हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जिस ख़तरे की रोक-थाम के लिए कब्रों को सज्दा-गाह बनाने और वहाँ चिराग़ जलाने से रोका था वह ख़तरा आज हकीकत बन गया है। उम्मत ने मनाही पर अमल नहीं किया। और मुसीबत पर मुसीबत यह है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की साफ़ और खुली मनाही के बावजूद जिसकी रिवायतें बुखारी व मुस्लिम और हदीस की दूसरी किताबों में मौजूद हैं, उल्टा उसे बेदीन बताते हैं जो कब्रों पर चिराग न जलाए।Kabron Par Auraton Ka Jana,

‘मुवत्ता इमाम मालिक’ हदीस की किताब में है कि हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल्लाह पाक से दुआ की किः

हदीसः ऐ अल्लाह! मेरी कब्र को बुत न बनाइयो जिसकी पूजा की जाए। उन लोगों पर अल्लाह का सख़्त गुस्सा हुआ जिन्होंने अपने नबियों की कब्रों को सज्दा-गाह बनाया।

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हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः

हदीसः अपने घरों को कब्रें न बनाओ। कब्रों की तरह घरों को अल्लाह के ज़िक्र से ख़ाली मत रखो बल्कि नफिल नमाज़, ज़िक्र, वज़ीफ़ा घरों में पढ़ा करो और मेरी कब्र को ईद न बनाओ, और मुझपर दुरूद भेजो क्योंकि तुम्हारा दुरूद मुझ तक पहुँचा दिया जाता है, तुम जहाँ कहीं भी हो।

ऊपर ज़िक्र हुई हदीसों से मालूम हुआ है कि कब्रों को बुत बनाना और वहाँ मेले के तरीके पर इस तरह जमा होना जैसे ईद में जमा होते हैं, अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त और उसके पाक नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नज़दीक सख़्त गुनाह है।Kabron Par Auraton Ka Jana

कब्रों पर उर्स के नाम से जो मेले लगते हैं, उनमें बेशुमार बुराइयाँ और गुनाह के काम होते हैं। कब्रों के चारों तरफ तवाफ़ करना जो सिर्फ बैतुल्लाह के लिए ख़ास है, मज़ारों पर चिराग जलाना, तवायफों का नाच होना, हारमोनियम और तबले पर गाना बजाना, और नमाज़ों को ग़ारत करना और कब्रों को गुस्ल दिलाना।Kabron Par Auraton Ka Jana,

और इसी तरह के बहुत-से बड़े-बड़े गुनाहों और बहुत-सी शिर्क व बिद्भुत की. बातों और बद्तरीन बुराइयों और खुराफात के काम किये जाते हैं। अल्लाह समझ दे।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और जवाब)

1. क्या औरतों का कब्रिस्तान जाना जायज़ है?

इस विषय में अलग-अलग फ़िक्ही राय मौजूद हैं। आपके लेख के अनुसार जिन हदीसों का ज़िक्र है, उनमें औरतों को कब्रों पर जाने से मना किया गया है। इसलिए इस मामले में अपने भरोसेमंद आलिम से भी रहनुमाई लेना चाहिए।Kabron Par Auraton Ka Jana,

2. क्या कब्रों पर सज्दा करना जायज़ है?

नहीं। सज्दा सिर्फ़ अल्लाह तआला के लिए है। किसी कब्र, मज़ार या इंसान को सज्दा करना जायज़ नहीं है।Kabron Par Auraton Ka Jana,

3. क्या कब्रों पर चिराग़ या मोमबत्ती जलाना सही है?

हदीस में कब्रों पर चिराग़ जलाने से मना किया गया है। इसलिए इस अमल से बचना चाहिए।Kabron Par Auraton Ka Jana,

4. कब्रों की ज़ियारत का सही मक़सद क्या है?

कब्रों की ज़ियारत का मक़सद मौत और आख़िरत को याद करना, मय्यित के लिए दुआ करना और इबरत हासिल करना है।Kabron Par Auraton Ka Jana,

5. क्या कब्र पर जाकर मुराद माँगना जायज़ है?

दुआ और मदद सिर्फ़ अल्लाह तआला से माँगनी चाहिए। हर मुसलमान को तौहीद पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए।Kabron Par Auraton Ka Jana,

6. कब्रिस्तान जाने पर कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?

कब्रिस्तान में दाख़िल होते समय नबी-ए-करीम ﷺ से साबित दुआ पढ़ना सुन्नत है और वहाँ दफ़्न मुसलमानों के लिए मग़फ़िरत की दुआ करनी चाहिए।Kabron Par Auraton Ka Jana,

7. क्या कब्रों पर मेले और उर्स लगाना ज़रूरी है?

इस बारे में उलेमा के अलग-अलग नज़रिए हैं। हर मुसलमान को अपने मस्लक के भरोसेमंद उलेमा से रहनुमाई लेकर शरीअत के मुताबिक़ अमल करना चाहिए।Kabron Par Auraton Ka Jana,

8. क्या कब्र पर फूल चढ़ाना या चादर चढ़ाना ज़रूरी है?

कब्र पर फूल या चादर चढ़ाना फ़र्ज़ या सुन्नत नहीं है। सबसे बेहतर काम मय्यित के लिए दुआ और इसाले सवाब करना है।Kabron Par Auraton Ka Jana,

9. कब्रिस्तान जाते समय किन बातों का ख़्याल रखना चाहिए?

अदब के साथ जाएँ, दुआ करें, फ़िज़ूल बातें न करें, शिर्क और बिदअत से बचें तथा कब्रिस्तान की हुरमत का ख़्याल रखें।Kabron Par Auraton Ka Jana,

10. कब्रों से हमें क्या नसीहत मिलती है?

कब्रिस्तान हमें याद दिलाता है कि हर इंसान को एक दिन दुनिया छोड़कर आख़िरत की तरफ़ जाना है। इसलिए नेक अमल करना, गुनाहों से तौबा करना और अल्लाह की इबादत में ज़िंदगी गुज़ारना ही सबसे बड़ी कामयाबी है।Kabron Par Auraton Ka Jana,

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Kabron Par Auraton Ka Jana,

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Kabron Par Auraton Ka Jana,

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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