ज़िन्दगी की बेहतरीन तरतीब
ज़िन्दगी में हमें आख़िरत को सामने रखकर अपनी ज़िन्दगी की तरतीब बनानी है। जहन्नम के अज़ाब को बरदाश्त करने का हौसला हममें से किसी आदमी को भी नहीं है।
हम तो इतने नाज़ और आराम के पले हुए बन्दे हैं कि धूप की गर्मी बरदाश्त नहीं होती, हमसे जहन्नम की गर्मी कहाँ बरदाश्त होगी।हम गर्मी के मौसम में बाहर से घर में आयें तो हमें जब तक बर्फ का ठंडा पानी न मिले या कोई और पीने की ठंडी चीज़ न मिले तो उस वक़्त तक सादा पानी पीने को जी नहीं चाहता।
जहन्नम के अन्दर तो और भी गर्म मश्रुबात यानी पीने की चीज़ें पिलाए जाएँगे। हम तो दो आदमियों के सामने ज़िल्लत और रुस्वाई बरदाश्त नहीं कर सकते, क़ियामत के दिन सब इनसानों के सामने ज़िल्लत व रुस्वाई कैसे बरदाश्त करेंगे।
सच्ची बात तो यही है कि हमें अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त से जन्नत को तलब करना चाहिए और जहन्नम से अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त की पनाह माँगनी चाहिए। यही दुआ है जो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सिखलाईः
अल्लाहुम्-म इन्नी अस्अलुकल्-जन्न-त व अञ्जु बि-क मिनन्नारि
तर्जुमाः ऐ अल्लाह! मैं आप से जन्नत को तलब करती हूँ और आप से मैं जहन्नम की आग से पनाह माँगती हूँ।
जब आप यह दुआ कसरत से माँगेगी तो फिर आपको अपनी ज़िन्दगी की तरतीब को देखना होगा। इसलिए हमने एक काग़ज़ पर उन गुनाहों की फेहरिस्त बना दी है जो कबीरा गुनाह इनसान करता है।
आप सब तन्हाई में बैठकर इस फेहरिस्त को अपने सामने रखें और सोचें कि मैं कौन से गुनाह करती हूँ कौन से गुनाह नहीं करती। जो नहीं करती उस पर अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त का शुक्र अदा करें और जो गुनाह कर बैठती हैं उन पर निशान लगाकर उनसे तौबा करें।
जब आप सब गुनाहों से बाकायदा तौबा कर लेंगी तो आपकी अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त के साथ सुलह हो जाएगी। परवर्दिगारे आलम आपके पिछले सारे गुनाहों को माफ फरमा देंगे और आईन्दा आपके आमाल का अज्र बढ़ा देंगे।
यह रास्ता है अल्लाह की रिज़ा वाला रास्ता, जिस तरह तन्हाईयों में छुप-छुपकर इनसान गुनाह करता है, उसको चाहिए कि उसी तरह तन्हाईयों में बैठकर अपने गुनाहों को याद करे और छुप-छुपकर अल्लाह के सामने रोये, माफियाँ माँगे कि ऐ परवर्दिगार ! मेरे गुनाहों को माफ फरमा दीजिए।
लिहाज़ा फेहरिस्त को सिर्फ एक काग़ज़ न समझना बल्कि यूँ समझना कि हमें एक तफसील बताई गई है, कि किस तरह हम जन्नत में जा सकती हैं और किस तरह जहन्नम से पनाह हासिल कर सकती हैं।
खूबसूरत वाक़िआ:आप कौन सा घर चुनेंगे? Aap kaun sa ghar chunenge.
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
