11/07/2026
1783601819757

आप कौन सा घर चुनेंगे? Aap kaun sa ghar chunenge.

Share now
Aap kaun sa ghar chunenge.
Aap kaun sa ghar chunenge.

दो मकानों में से बेहतरीन चयन

अब फैसला हमको करना है कि हमारी मन्ज़िल कौन सी होनी चाहिए। अगर किसी औरत से पूछा जाए कि दो मकान हैं और जो मकान ख़रीदने के लिए आप ज़ोर दे रही हैं तो बताओ उन दोनों में से कौन से मकान में आप जायेंगी।

एक मकान में गुलशन हैं, बाग़ात हैं, फल-फूल हैं, नौकर चाकर हैं, महल जैसे हीरे-मौती का मकान बना हुआ है, खुशबूएँ होंगी, नहरें होंगी, माँ-बाप, शौहर बच्चे, बहन भाई सबको तुम्हें साथ ले जाने का इख़्तियार होगा। नबियों का दीदार होगा, अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त का दीदार होगा, तुम्हारी हर ख़्वाहिश वहाँ पूरी होगी। मगर उसकी कीमत यह है कि तुम अपनी ज़िन्दगी में कोई गुनाह न करो।

और दूसरा मकान वह है जो अंधेरी कोठरी होगी, जिन्न भूत से ज़्यादा डरावने फरिश्ते होंगे, तन्हाई होगी, न शौहर पास, न बच्चे पास, न माँ-बाप पास, भूख होगी, प्यास होगी, पसीना होगा, बिजली के कड़कने की आवाजें होंगी। तुम्हारा रंग काला होगा, आँखें नीली होंगी, बदबूदार लिबास पहनोगी, और आग के अन्दर घूमती रहोगी।

अब दोनों मकानों में से तुम्हें कौन सा मकान चाहिए? इस दूसरे मकान के बारे में शर्त यह है कि तुम अपनी ख़्वाहिशों को दुनिया में पूरी कर लो, जी भर के अपनी हसरतें मिटा लो। लेकिन यह तीस पचास साल की बात है। फिर तुम्हें उस मकान में हमेशा-हमेशा रहना पड़ेगा।

तो कोई भी अक़्लमन्द औरत उस जहन्नम के मकान में जाना पसन्द नहीं करेगी। यही चाहेगी कि मैं तो जन्नत में जाऊँगी, मैं तो दुनिया में अपने बच्चों के बगैर रह नहीं सकती, शौहर से जुदाई का सोच नहीं सकती, माँ-बाप से दूर होने के बारे में ख़्याल ज़ेहन में नहीं ला सकती। मैं जहन्नम के मकान में हरगिज़ नहीं जाना चाहती कि मैं इन सब नेमतों से महरूम हो जाऊँगी।

मालूम हुआ कि इनसान का दिल यह चाहता है कि मुझे रब्बे रहमान के करीब जन्नत का मकान मिल जाए। और हमेशा-हमेशा मैं अपनी चाहतों को वहाँ जाकर पूरी कर लूँ।

खूबसूरत वाक़िआ:तौबा का दरवाज़ा आज भी खुला है | Tauba ka darwaza Aaj bhi khula hai.

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *