आख़िरत के दो मकान
अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त ने हर इनसान के लिए आख़िरत के दो मकान तैयार किये हैं। एक जन्नत में दूसरा जहन्नम में। अगर नेक आमाल करेगा ईमान के साथ दुनिया से जाएगा, अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त उसे जन्नत का मकान अता फरमायेंगे।
और अगर यह दुनिया के अन्दर ईमान से मेहरूम रहा या ईमान तो लाया मगर गफलत की वजह से गुनाहों में पड़ा रहा, घिरा रहा और बगैर तौबा के मर गया तो उन लोगों को जहन्नम का मकान दिया जाएगा।
जहन्नम वह जगह है जिसे अल्लाह तआला ने मुजरिम और ना-फ़रमानों की सज़ा के लिए बनाया। जन्नत वह जगह है जिसको अल्लाह ने अपने प्यारों के इनाम के तौर पर बनाया। अब यह हमारी ज़िन्दगी की तरतीब है कि हम जन्नत के रास्ते पर जा रहे हैं या जहन्नम के रास्ते पर जा रहे हैं।
खूबसूरत वाक़िआ:आप किस रास्ते पर चल रहे हैं? Aap kis raste per chal rahe hain
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
