किन वजहों से रोज़ा तोड़ देना जायज़ है उनका बयान
मस्अला 1:- अचानक ऐसी बीमारी पड़ गयी कि अगर रोज़ा न तोड़ेंगे, तो जान पर बन जायेगी या बीमारी बहुत बढ़ जायेगी, तो रोज़ा तोड़ देना दुरूस्त है, जैसे अचानक पेट में ऐसा दर्द उठा कि बेताब हो गयी या सांप ने काट खाया तो दवा पी लेना और रोज़ा तोड़ देना दुरूस्त है। ऐसे ही अगर ऐसी प्यास लगे कि हलाकत का डर है, तो भी रोज़ा तोड़ डालना दुरूस्त है।
मस्अला 2 :- हामिला औरत को कोई ऐसी बात पेश आ गयीं, जिससे अपनी जान का या बच्चे की जान का डर है, तो रोजा तोड़ डालना दुरूस्त है।
मस्अला 3 :- खाना पकाने की वजह से बेहद प्यास लग आयी और इतनी बेताबी हो गयी कि अब जान का डर है, तो रोज़ा खोल डालना दुरूस्त है, लेकिन अगर खुद उसने जान-बूझकर इतना काम किया, जिससे ऐसी हालत हो गयी, तो गुनाहगार होगी।
खूबसूरत बयान:सहरी खाने इफ़्तार और करने का बयान|Sehri khane aur Iftar karne ka bayan.
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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