28/01/2026
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हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ का कफ़न|Hazrat Abdurahman bin auf ka Kafan.

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Hazrat Abdurahman bin auf ka Kafan.
Hazrat Abdurahman bin auf ka Kafan.

हज़रत सहल बिन सअद फरमाते हैं कि एक मर्तबा एक औरत आंहज़रत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में एक चादर लेकर हाज़िर हुई और अर्ज़ किया कि ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम! यह चादर मैंने अपने हाथ से बुनी है और इसे मैं आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में लाई’ हूँ ताकि आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इसे पहन लें।

आंहज़रत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने बहुत शौक़ से वह चादर क़बूल फरमा ली। फिर उसी चादर को इज़ार की जगह पहनकर भीड़ में तशरीफ लाए। उसी वक़्त एक सहाबी हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने दरख्वास्त की कि या अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम! यह चादर मुझे इनायत फरमा दें, यह तो बहुत उम्दा है।

आंहज़रत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया बहुत अच्छा, फिर कुछ देर तशरीफ़ रखने के बाद आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अन्दर तशरीफ ले गये और दूसरी इज़ार बदलकर वह चादर सवाल करने वाले को भिजवा दी, यह माजिरा देखकर सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम ने उन सहाबी पर नकीर की कि जब तुम्हें मालूम था कि पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम किसी मांगने वाले को रद्द नहीं फरमाते तो तुमने यह चादर मांगकर अच्छा नहीं किया।

उन्होंने जवाब दिया कि “मैंने तो अपने कफ़न में इस्तेमाल करने के लिए यह दरख्वास्त पेश की थी”। हज़रत सहल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि वाक़ई वैसा ही हुआ जब अब्दुर्रहमान बिन औफ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का इन्तिक़ाल हुआ तो आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को उसी चादर में कफ़न दिया गया। (बुखारी शरीफ, हिस्सा 1, पेज 170, 381, हिस्सा 2, 864, 892,)

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….

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