29/08/2025
औरतों की नमाज़। 20250525 010314 0000

औरतों की नमाज़। Auraton ki Namaz.

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Auraton ki Namaz.
Auraton ki Namaz.

नमाज़ दीने इस्लाम का अहम रुक्न है। कलिमा पढ़ने के बाद हर बालिग मर्द और औरत पर रोज़ाना दिन रात में पांच नमाज़ें फ़र्ज़ हैं। अल्लाह तआला इसको उन बहनों के लिए मुफीद बनाए।

इस्लाम में सबसे अहम इबादत नमाज़ है जो बालिग होने के बाद से ज़िन्दगी की आखिरी सांस तक हर मर्द, औरत, बूढ़े, जवान, बीमार तनदुरूस्त, मुसाफिर और मुकीम पर रोज़ाना पांच मर्तबा फर्ज़ है, नमाज़ के एहकाम व मसाइल फ़िक़्ह की किताबों में बहुत तफ्सील से लिखे गए हैं, नमाज़ से पहले जिस्म का, लिबास का और नमाज़ की जगह का पाक होना ज़रूरी है इसलिए नमाज़ की किताबों से पाकी के मसाइल भी ज़रूर लिखे जाते हैं।

पाकी का बयान :-

नमाज़ पढ़ने के लिए बदन का (हैज़ व निफास वगैरह से) पाक होना ज़रूरी है और बदन की पाकी के लिए पानी का पाक होना भी ज़रूरी है, मगर दोनों के मसाइल बहुत ज़्यादा हैं। नमाज़ पढ़ने के लिए बदन का पाक होना ज़रूरी है। अगर नहाने की ज़रूरत न हो तो सिर्फ वुज़ू कर लीजिए। वुज़ू में चार चीजें फर्ज़ हैं:

1. पूरा चेहरा धोना।

2. कुहनियों से ऊपर तक दोनों हाथ धोना।

3. सर के चौथाई हिस्से का मसाह करना।

4. टखनों से ऊपर तक दोनों पांवों को धोना ।

चेहरा, हाथ और पांव, जहाँ से जहां तक धोना फर्ज़ है, अगर एक बाल बराबर भी सूखा रह गया तो वुज़ू नहीं होगा, और नमाज़ भी नहीं होगी। इसी तरह अगर चौथाई सर से भी कम का मसह किया, तो भी वुज़ू नहीं होगा।

सुन्नत के मुताबिक वुज़ू का तरीका :-

वुज़ू करते वक़्त बिस्मिल्लाह कहिए। पहले तीन बार दोनों हाथ पहुंचों तक धोइए, मिस्वाक वगैरह से दांत साफ कीजिए, मिस्वाक् न हो तो दाएं हाथ की उंगली से दांत मलिए, फिर तीन बार कुल्ली कीजिए, इसके बाद तीन बार नाक में पानी डालकर नाक साफ कीजिए।

फिर तीन बार चेहरा सर के बालों से लेकर ठोड़ी के नीचे तक और एक कनपटी से दूसरी कनपटी तक धोइए। इसके बाद तीन बार पहले दाहिना, फिर बायां हाथ कुहनियों समेत धोइए। अगर हाथ में अंगूठी या चूड़ी हो या नाक मे कील हो, तो उसे हिलाकर अंदर पानी पहुंचाइए, फिर एक बार पूरे सर का मसह कीजिए,

यानी भीगा हाथ पूरे सर पर पेशानी के बालों से गरदन के बालों तक फेरिए और हाथ को पीछे से आगे तक लौटा लीजिए और कानों और गरदन पर मसह कर लीजिए। इसके बाद तीन बार पहले दायां, फिर तीन बार बायां पांव टखनों से ऊपर तक धोइए और हाथ की उंगलियों से पांव की उंगलियों का ख़िलाल कर लीजिए कि कहीं सूखा न रह जाए। इसके बाद यह दुआ पढ़िएः अल्लाहुम्मज-अलनी मिनत्तव्वा बी-न वज-अलनी मिनल मु-त-तहूहिरीन०

तर्जुमा :- ऐ अल्लाह! मुझे तौबा और खूब पाकी नसीब कर । अगर सूरः इन्ना अन्ज़लना याद हो तो वह भी पढ़ लीजिए। याद रखिए! अगर नाखून में आटा लगकर सूख गया हो, तो पहले उसको छुड़ा लीजिए। अगर नाखून पर ‘नेल पॉलिश’ का रंग लगा हुआ हो तो उसको भी साफ कर लीजिए, क्योंकि उसके नीचे पानी नहीं पहुंचेगा, तो न वुज़ू होगा, न नमाज़ होगी। इन जैसी चीज़ों को चाकू वगैरह से साफ करना होगा, जब जाकर वुज़ू दुरुस्त होगा। अगर बदन पाक करने के लिए नहाने की ज़रूरत हो, तो पहले गुस्ल कर लेना चाहिए।

गुस्ल में तीन चीजें फर्ज़ हैं- अगर एक चीज़ भी छुट जाएगी तो गुस्ल नहीं होगा और नापाकी दूर नहीं होगी। वे तीन फर्ज़ ये हैंः

(1) इस तरह कुल्ली करना कि पानी हलक तक पहुंच जाए।

(2) नाक में इस तरह पानी डालना कि नरम हड्डी तक पहुंच जाए।

(3) सारे बदन पर इस तरह पानी डालना कि बाल बराबर भी कोई जगह सूखी न रहे।

सुन्नत के मुताबिक गुस्ल का तरीका :-

पहले दोनों हाथ पहुंचे तक धो लीजिए, इस्तिंजा कीजिए और जहाँ पर भी नापाकी लगी हुई हो, उस जगह को धो लीजिए, फिर वुज़ू कीजिए। वुज़ू के बाद एक बार सर पर पानी डालिए और सारे बदन पर अच्छी तरह हाथ फेरिए कि हर जगह अच्छी तरह पानी पहुंच जाए।

फिर दो बार और सर पर पानी इस तरह डालिए कि सारे बदन पर पानी बह जाए। अगर नाक में कील, कान में बाली या इयर-रिंग हो तो हिला लीजिए कि उन सुराख़ों में भी पानी पहुंच जाए। अगर पानी नहीं पहुंचा तो गुस्ल न होगा।

नमाज़ पढ़ने के लिए और ज़रूरी चीज़े :-

नमाज़ शुरू करने से पहले ये चीजें ज़रूरी हैं, इनके बगैर नमाज़ नहीं होगी।

(1) बदन पाक हो, बदन की पाकी के लिए गुस्ल और वुज़ू का तरीका बताया जा चुका है।

(2) बदन के कपड़े पाक हों। कुछ औरतें बच्चों के पेशाब, पाख़ाना की वजह से कपड़ों की नापाकी का बहाना करके नमाज़ छोड़ बैठती हैं। यह मजबूरी कोई मजबूरी नहीं है। नमाज़ के लिए दूसरा कपड़ा रखना चाहिए और नमाज़ पढ़ते वक़्त पाक कपडे बदल कर नमाज़ पढ़ें।

(3) जिस जगह या जिस कपड़े पर नमाज़ पढ़ी जाए, वह जगह या कपड़ा पाक हो।

(4) सारा बदन कपड़े से छुपा हुआ हो, सिर्फ चेहरा, पहुंचे तक हाथ और टखने तक पांव खुले रखने की इजाज़त है, लेकिन एहतियात इसमें है कि चेहरे के सिवा हाथ-पांव भी नमाज़ की हालत में छुपे रहें। कपड़ा इतना बारीक न हो कि अंदर से बदन का कोई हिस्सा या सर के बालों का कोई हिस्सा झलकता हो, ऐसे कपड़े में नमाज़ नहीं होती है।

नोट- अगर नमाज़ की हालत में चेहरे, पहुंचे और टखने के सिवा किसी अज़्ज़ (अंग) का चौथाई हिस्सा इतनी देर तक खुला रह गया, जितनी देर में तीन बार ‘सुब्हानअल्लाह’ कहा जा सकता है, तो नमाज़ टूट जाएगी, फिर से नमाज़ शुरू करनी होगी।

हाँ अगर इतनी देर तक खुला नहीं रहा, बल्कि खुलते ही फौरन छुपा लिया तो नमाज़ हो जाएगी। जैसेः पिंडुली, बांह- कलाई, सर, सर के बाल, कान या गरदन, किसी अंग का चौथाई हिस्सा इतनी देर खुला रह जाए, तो नमाज़ नहीं होगी।

पांच वक़्त की नमाजें :-

फज्र की नमाज़ :- पहले दो रक्अत्त सुन्नत, इसके बाद दो
रक्अत फर्ज़।

जुहर की नमाज़ :- पहले चार रक्अत सुन्नत, फिर चार रक्अत फर्ज़, इसके बाद दो रक्अत सुन्नत और खुदा तौफीक दे तो दो रक्अत नफ़्ल ।

अस्र की नमाज़ :- पहले चार रक्अत सुन्नत, इसके बाद चार रक्अत फ़र्ज़ ।

मगरिब की नमाज़ :- पहले तीन रक्अत फ़र्ज़, इसके बाद दो रक्अत सुन्नत, फिर दो रक्अत नफ़्ल ।

इशा की नमाज़ :- पहले चार रक्अत सुन्नत, फिर चार रक्अत फ़र्ज़, फिर दो रक्अत सुन्नत, फिर दो रक्अत नफ़्ल इसके बाद तीन रक्अत वित्र वाजिब, फिर दो रक्अत नफ़्ल ।

नोट – असर और इशा की फर्ज़ से पहले चार रक्अत सुन्नत की ताकीद नहीं है, अगर कोई पढ़ ले, तो बड़ा सवाब मिलेगा और न पढ़े तो कुछ गुनाह भी नहीं है। इसी तरह मग़रिब और इशा में नफ़्ल अगर कोई न पढ़े तो कोई हरज और गुनाह नहीं और पढ़ ले तो बड़ा सवाब मिलेगा ।। एक लड़की और शैतान।

अलबत्ता रमज़ान शरीफ के महीने में इशा के फ़र्ज़ और सुन्नत के बाद तरावीह की नमाज़ भी सुन्नत है और उसकी बड़ी ताकीद है, इसका छोड़ देना और न पढ़ना गुनाह है। नमाज़ वित्र तरावीह के बाद पढ़ी जाती है।

नफ़्ल नमाज़ें :-

इन पांच नमाज़ों के अलावा और वक़्त में भी नफ़्ल नमाज़ का बड़ा सवाब है। नफ़्ल नमाज़ दो-दो रक्अत की नियत करके ही पढ़ना चाहिए।

इश्राक की नमाज़ :- सुबह को जब सूरज अच्छी तरह निकल आए, तो चार रक्अत पढ़ी जाती है।

चाश्त की नमाज़ :- नौ दस बजे दिन के आठ रक्अत पढ़ी जाती है।

अव्वाबीन की नमाज़ :- मगरिब की नमाज़ के बाद कम से कम छः रक्अत पढ़ी जाती है।

तहज्जुद की नमाज़ :- रात के बाद से लेकर सुबह से पहले- पहले तक जिस वक़्त नींद टूट जाए, चार, छः या आठ रक्अत पढ़ी जाती है।

इन वक़्तों में कोई नमाज़ न पढ़ी जाए :-

(1) सूरज निकलते वक़्त,

(2) सूरज डूबते वक़्त, हाँ उस दिन की फर्ज़ नमाज़ असर कज़ा हो रही हो, तो सूरज डूबते वक़्त भी पढ़ी जा सकती है।

(3) ठीक दोपहर के वक़्त, जबकि सूरज बीच सर पर हो। इन तीनों वक़्तों में सज्दा-ए-तिलावत भी मना है।

(4) फज्र की नमाज़ पढ़ लेने के बाद जब तक सूरज अच्छी तरह न निकल जाए।

(5) असर और मग़रिब की नमाज़ों के बीच में। आख़िर के दोनों वक़्त में कोई नफ़्ल नमाज़ जायज़ नहीं है, हाँ फर्ज़ नमाज़ों की कज़ा पढ़ी जा सकती है और सज्दा-ए-तिलावत करना भी दुरुस्त है।

अल्लाह रब्बुल इज्ज़त हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे, हमे एक और नेक बनाए, सिरते मुस्तक़ीम पर चलाये, हम तमाम को नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और इताअत की तौफीक़ आता फरमाए, खात्मा हमारा ईमान पर हो। जब तक हमे ज़िन्दा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखे, आमीन ।

इस बयान को अपने दोस्तों और जानने वालों को शेयर करें। ताकि दूसरों को भी आपकी जात व माल से फायदा हो और यह आपके लिये सदका-ए-जारिया भी हो जाये।

क्या पता अल्लाह ताला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए । आमीन ।

खुदा हाफिज…

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