28/01/2026
क़ब्र में नेक लोगों के मुक़ामात। 20250511 014840 0000

क़ब्र में नेक लोगों के मुक़ामात। Kabr mein Nek logon ke mokamaat.

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Kabr mein Nek logon ke mokamaat.
Kabr mein Nek logon ke mokamaat.

क़ब्र में अच्छी हालत का होना :-

हज़रत मोहम्मद बिन मोखालिद से रिवायत है कि मेरी वालिदा का इन्तक़ाल हो गया तो मैं उनको क़ब्र में उतारने के लिये उतरा तो मैंने देखा कि पास वाली क़ब्र से कुछ हिस्सा खुल गया है तो मुझे एक शख़्स नज़र आया जो नया कफ़न पहने हुए था और उसके सीने पर चम्बेली के फूलों का एक गुल्दस्ता रखा था मैंने उसे उठाया तो वह बिलकुल तरो ताज़ा थे मेरे साथ दूसरे हज़रात ने भी सूंघा फिर हमने उसको वहीं रख दिया और इस सूराख को बन्द कर दिया। (शरहअस्सदूर)

मक़बूलाने बारगाहे हक़ में से बाज़ ने हुज़ूर समदियत में दुआ की कि मौला मौत के बाद की जगह मुझे दिखा दे चुनांचे एक शब उन्होंने ख़्वाब मे मनाज़िर मोलाहज़ा किये।

क़यामत क़ायम है क़ब्रे शक़ हैं इन क़ब्रों में कोई फर्श सुन्दस पर कोई हरीर पर, कोई फर्श दिबा पर, कोई शानदार तख़्त पर, कोई फूलों की सेज पर आराम कर रहा है। किसी का यह हाल है कि रो रहा है और कोई खुशी से हंस रहा है।

साहिब ख़्वाब बुजुर्ग ने अर्ज़ किया मौला! अगर तू चाहता तो सबको एक सां अज़ाज़ व एकराम से नवाज़ता उसी वक़्त अहले क़बूर में से एक ने चीख कर कहा ऐ फ्लॉ यह जो तू देख रहा है आमाल के दरजात हैं. अच्छे अख़लाक़ वाले और नेक हज़रात फर्श सुन्दस पर हैं हरीर व दीबा पर जिनको देख रहे हो वह शहीदाने मिल्लत हैं फूलों की सेज पर आराम फरमा रोज़हदार हज़रात हैं और तुम जिन्हें हंसते हुए देख रहे हो यह सच्ची तौबह वाले हैं और यह जो रो रहे हैं यह गुनहगार हैं और बुलन्द दरजात में वह लोग जो खुदा ही के लिये बाहम मोहब्बत रखने वाले हैं।

हज़रत अल्लाहमा याफी अलैहिर्रहमान ने इस वाक़िया की तौज़ीह में तवील और इल्मी तक़रीर फरमाई है इसी में है कि तिर्मिज़ी की हदीस में रब तआला का इरशाद है।

खुदा के वास्ते मोहब्बत करने वालों के लिये नूर के मिम्बर रखे जायेंगे जिस पर अंबिया और शोहदा रशक करेंगे और मूता में इरशाद रब्बुल आलमीन है।

जो लोग मेरे लिये मोहब्बत करते हैं मेरे लिये मिल बैठते हैं मेरे लिये एक दूसरे की जियारत करते हैं और मेरे लिये ख़र्च करते हैं इन पर मेरी मोहब्बत वाजिब है।हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की खिलाफत। Hazrat Ali Raziallahu anhu ki khilafat.

इन दोनों अहादीस से वाज़ि हुआ कि असहाबे मरातिब से मुराद तख़्त नशीन हज़रात है यह अज़ीम दर्जा है और इसी के साथ साथ खुश ऐशी और रब तअला का कुर्ब और जमाले रब्बानी की रूयत भी है जो यक़ीनन तमाम नेमतों से बड़ी नेमत है अल्लाह तआला उनकी नेमतें फजूंतर करे आमीन! और यह सवाल कि यहाँ मुतहाबीन का तख़्त पर होना और हदीस में मिम्बर नूर पर होना मजकूर है तो इसका जवाब यह है कि मिम्बर क़यामत में होंगे और तख़्त क़ब्र में इन्शाअल्लाहुल अज़ीज़ । (रौज़तुररियाहीन)

हज़रत मंसूर बिन अम्मार अलैहि रहमा ने एक जवाँसाल को नमाज़ पढ़ते हुए देखा वह ख़ौफ़ से लरज़ रहा था और उसकी नमाज़ का तरीक़ा अहले खुशू जैसा था। हज़रत मंसूर ने सोचा यकीनन यह कोई वली अल्लाह है जब वह नमाज़ ख़त्म कर चुका तो उन्होंने सलाम किया और कहाँ “तुम्हें मालूम है कि जहन्नम में एक वादी “लज़ा” है जो खाल खैच लेगी वह उस शख़्स को पकड़ लेगी जिसने रू-कशी की होगी, बे रूख़ी से पेश आया होगा और माल जमा करके उठा रखा होगा।”

यह बाते सुनकर नौजवान गश खाकर गिर पड़ा फिर कुछ देर बाद उसे होश आया और उसने कहा कुछ और भी सुनाओ। मंसूर बिन अम्मार ने यह आयात तिलावत कीं।

तर्जुमा :- ऐ ईमान वालों खुद को और अपने अहलो अयाल को उस आग से बचाओ जिसका ईंधन आदमी और पत्थर हैं इस पर सख्त मिज़ाज क़वी फरिश्ते मोतयीअन हैं वह अल्लाह का कोई हुक्म नहीं टालते जो हुक्म होता है बजा लाते हैं।(अत्तहरीम, 6)

यह आयात सुनकर वह शख़्स गिर पड़ा और इन्तक़ाल कर गया मैंने देखा कि उसके सीने पर क़लमे कुदरत से तहरीर है। तर्जुमा तो वह पसन्दीदा ऐश में होगा, आलीशान जन्नत में जिसके फलों के गुच्छे झुके हुए हैं।(अल्हाक़्क़ह 21)

इन्तक़ाल की तीसरी शब मंसूर बिन अम्मार ने उस नौजवान को ख़्वाब में देखा कि वह एक मुरस्सा तख़्त पर बैठा है और सर पर ताज चमक रहा है उन्होंने पूछा कि अल्लाह तआला ने तेरे साथ क्या मामला किया? जवाब दिया रब्बे करीम ने मुझे बख़्श दिया और अहले बद्र का सवाब अता किया बल्कि और ज़्यादा। इसलिये कि हज़रात अहले बद्र तो शमशीर कुफ़्फ़ार से शहीद हुए थे और मैं कलामे रब्बानी से शहीद हुआ। रहमतुल्लाह तआला अलैह ।(रौज़तुररियाहीन)

अल्लाह रब्बुल इज्ज़त हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे, हमे एक और नेक बनाए, सिरते मुस्तक़ीम पर चलाये, हम तमाम को नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और इताअत की तौफीक़ आता फरमाए, खात्मा हमारा ईमान पर हो। जब तक हमे ज़िन्दा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखे, आमीन ।

इस बयान को अपने दोस्तों और जानने वालों को शेयर करें। ताकि दूसरों को भी आपकी जात व माल से फायदा हो और यह आपके लिये सदका-ए-जारिया भी हो जाये।

क्या पता अल्लाह ताला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए । आमीन ।

खुदा हाफिज…

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