27/01/2026
Hambistari karne ka waqt

सोहबत हमबिस्तरी करने का वक़्त।Sohbat Hambistari karne ka Waqt.

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Hambistari karne ka waqt

शरीअते इस्लामी में सोहबत करने के लिए कोई ख़ास वक्त नहीं बताया गया है। शरीअत में दिन और रात के हर हिस्से में सोहबत करना जाइज़ है, लेकिन बुज़ुर्गों ने कुछ ऐसे अवकात ( वक्त) बताएं है जिन में सोहबत करना सेहत के लिए फायदेमन्द है।

हदीस :- हज़रत इमाम गज़ाली (र.ह)ने अपनी मशहूर किताब “इहयाउल उलूम” में उम्मूलमोमेनीन हज़रत आएशा रजि अल्लाहो तआला अन्हा से रिवायत किया है कि फरमाती है- रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम रात के आख़री हिस्से में तकरीबन रात के 2:30 बजे से लेकर फजर की अज़ान से पहेले में जब वित्र की नमाज़ पढ़ चुके होते तो अगर आप (स.व)को अपनी बीवी की हाजत होती यानी बीवी से सोहबत का इरादा होता तो उन से सोहबत फ़रमाते । (इहयाउल उलूम)Sohbat(Hambistari) karne ka Waqt.

हदीसों में है कि सरकार सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम, ईशा की नमाज़ पढ़ते और सिर्फ ईशा की वित्र नहीं पढ़ते फिर आप आराम फ़रमाते थे फिर कुछ घंटों के बाद आप उठ बैठते और “तहज्जुद” की नमाज पढ़ते, और कुछ नफिल नमाज़े अदा फ़रमाते और आख़िर में ईशा की वित्र पढ़ते उसके बाद अगर आप (स.व)को अपनी किसी बीवी की हाजत होती तो उन से सोहबत फ़रमाते या अगर हाजत नहीं होती तो आप(स.व)आराम फरमाते,

यहाँ तक कि हज़रत बिलाल रजि अल्लाहो तआला अन्हो नमाज़े फ़जर के लिए आजान के वक्त आप को जगा देते । इस हदीस के तहेत इमाम गजाली (र.अ)फरमाते हैं-

रात के पहले हिस्से (तकरीबन रात 9 से 12 बजे के बीच ) में सोहबत करना मकरूह है कि सोहबत करने के बाद पूरी रात ना पाकी की हालत में सोना पड़ेगा ” । (इहयाउल उलूम)Sohbat(Hambistari) karne ka Waqt.

फकीहे अबूललैस रजि अल्लाहो तआला अन्हो, अपनी मशहूर किताब “बुस्तान शरीफ” में नकल फरमाते हैं कि–

सोहबत के लिए सब से बेहतर (अच्छा ) वक़्त रात का आख़री हिस्सा है यानी तकरीबन रात 2:30 बजे से 4:30 बजे के बीच क्योंकि रात के पहले हिस्से में पेंट गिजा (खाने) से भरा होता है और भरे पेट सोहबत करने से सेहत को नुकसान है ।

जब कि रात के आखरी हिस्से में सोहबत करने से फायदा है जैसे आदमी दिन भर का थका हुआ होता है और रात के पहले और दूसरे हिस्से में उसकी नींद हो जाती है जिस की वजह से उस की दिन भर की थकावट दूर हो जाती है

और वोह ताज़ा दम हो जाता है इस के अलावा दूसरा एक यह भी फायदा है कि रात के आखरी हिस्से तक खाना अच्छी तरह हज़म हो जाता है ।
(दुस्तान शरीफ)Sohbat(Hambistari) karne ka Waqt.

नोट :- येह तमाम बातें हिकमत के मुताबिक है शरीअत में सोहबत करने का कोई ख़ास वक्त नहीं बताया गया है शरीअत में हर वक्त सोहबत की इजाज़त है। सरकारे मदीना सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम का अपनी बीवीयों से दिन और रात के दिगर वक्तों में सोहबत करना साबित है ।

इन रातों में सोहबत न करें :- हज़रत इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली(र.अ)नक्ल फरमाते है कि अमीरूलमोमेनिन हज़रत अली और हज़रत अबूहुरैरा और हज़रत अमीर मआविया रजि अल्लाहो तआला अन्हुम ने रिवायत किया है कि– ” हर महीने की चाँद रात और चाँद की पंद्रहवी शब और चाँद के महीने की आखिर रात सोहबत करना मकरूह है कि इन रातों में सोहबत करने के वक़्त शैतान मौजूद होते है । (वल्लाहो आलम) (कीम्या-ए-सआदत, सफा नं 266)

नोट :- तहकीक येह है कि इन रातों में सोहबत करना जाइज हैं लेकिन अहतियात इसी में है कि सोहबत करने से बचे ।

इन हदीसों को अपने दोस्तों और जानने वालों को शेयर करें।ताकि दूसरों को भी आपकी जात व माल से फायदा हो और यह आपके लिये सदका-ए-जारिया भी हो जाये।

क्या पता अल्लाह ताला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए ।आमीन।

खुदा हाफिज…

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