सहरी खाने इफ़्तार और करने का बयान|Sehri khane aur Iftar karne ka bayan.
सहरी खाने इफ़्तार और करने का बयान मस्अला 1:- सहरी खाना सुन्नत है और भूख न हो और खाना न खाये, तो कम से कम …
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सहरी खाने इफ़्तार और करने का बयान मस्अला 1:- सहरी खाना सुन्नत है और भूख न हो और खाना न खाये, तो कम से कम …
नफ़्ल रोज़े का बयान मस्अला 1:- नफ़्ल रोज़े की नीयत अगर यह तै करके करे कि मैं नफ़्ल का रोज़ा रखती हूं, तो भी सही …
नजर के रोज़े का बयान मस्अला 1:- जब कोई नजर माने, तो उसका पूरा करना वाजिब है। अगर न रखेगी, तो गुनाहगार होगी। मस्अला 2 …
कज़ा रोज़े :- मस्अला 1:- हैज़ की वजह से या और किसी वजह से जो रोज़े जाते रहे हों, रमज़ान के बाद जहां तक जल्दी …