यह एक खतरनाक और मूज़ी बिमारी है, जो आदमी के हुस्नो जमाल को बिल्कुल नेस्तो नाबूद कर देता है। यह खून की खराबी की वजह से हुआ करता है। अकसर यह मर्ज़ मौरूसी भी हुआ करता है। इस सिलसिले में बहुत से नुस्खे लिखे जाते हैं। आप अपनी तबीयत और हालत के एतबार से इस्तेमाल करें।
नुस्खाः- चाकसू दो तोला, इन्जीर दो तोला, बुकची दो तोला, तुख्मे पिन्दार दो तोला, सबको एक मिट्टी के बर्तन में आध पाव पानी में डालकर भिगो दें। सुबह को बगैर मले हुए निथार कर शहदे खलिस दो तोला मिलाकर पी लिया करें और उसका फोकस पीस कर सफेद दाग़ों पर मल लें, कुछ दिनों तक इस्तेमाल करें। (शमा शबिस्ताने रज़ा हिस्सा 3, पेज 107)
नुस्खाः – शहद और लस्सन मिलाकर खाया करें, बहुत ही मुफीद है।
नुस्खाः- ज़रनीख, तूतिया, तुख्मे मूली सब हमवज़न लेकर बारीक पीस लें, फिर उसमें जैतून का तेल मिला दें और बर्स की जगह को रगड़ कर तिला करें। इन्शा अल्लाह सिर्फ तीन रोज़ में आराम हो जायगा।
नुस्खाः- जंगार, शहद, जंगार को शहद में हल करके बर्स की जगह गर्म पानी से धो कर तिला करें। इन्शा अल्लाह आराम हो जायगा।
नुस्खाः- ज़ाफ़रान पीस कर उसे कूटे हुए गन्धक में शामिल करें और बर्स की जगह पर तिला करें, उसी दिन आराम हो जायगा।
नुस्खाः- जंगार, तुख्मे मूली, तुख्मे बाबची, सब हमवज़न बारीक पीस कर तेज़ सिरके में मिला दें और बर्स की जगह को किसी कपड़े वगैरह सख़्त चीज़ से रगड़ कर तिला करें। ब्लड प्रेशर और डाइबिटीज का इलाज और नुस्खे I
नुस्खाः- तुख्मे पनवाड़ को सियाह गाय के पेशाब में डिबो दें और चालीस दिन तक किसी घड़े में दफन कर दें। फिर निकाल कर खूब बारीक करके पीस लें। फिर उसमें शहद मिला कर बर्स पर तिला करें। इन्शा अल्लाह सिर्फ सात दिन में आराम हो जायगा।Safed Daag ka ilaj aur Nuskhe.
नुस्खाः- जंगली चम्बेली की जड़, अकासन बेल, हनज़ल की जड़, सबको खुश्क करके बारीक पीस लें, फिर शहदे खालिस में गून्ध लें और हर रोज़ एक दरहम की मिकदार खाया करें। (मुजर्रबाते सुपूती पेज 181)
नुस्खाः – खरगोश के खून को सफेद दाग़ों और छाइयों में लगाने से यह मर्ज़ खत्म हो जाता है। (हयातुल हैवान जिल्द 1, पेज 116)
नुस्खाः – भैंस की चर्बी को इन्दरानी नमक के साथ मिलाकर बर्स पर मल देने से बहुत जल्द इस बीमारी से नजात मिल जाती है।(हयातुल हैवान जिल्द 2, पेज 31)
नुस्खाः – अगर बर्स की शिकायत अभी कम हो तो रिसवत तीन माशा, चाकसू तीन माशा, नरकचुआ तीन माशा, कत्था सफेद तीन माशा रात को गर्म पानी में भिगो कर सुबह को उसका जुलाल निथार कर पिलायें।
नुस्खाः- गेरू तीन माशा, रिसवत तीन माशा, सियाह मिर्च 5 दाने, पानी में पीस कर पिलाना और पिलास पापड़ा सिरके में पीस कर ज़िमाद करना भी मुफीद है। (हाज़िक पेज 557)
नुस्खाः- नीम का फल, फूल, पत्तियां सब मुसावी पीस कर दो माशे से खाना शुरू करके छः माशे तक पहुंचाकर चालीस दिन तक इस्तेमाल करें।
नुस्खाः- मुण्डी एक हिस्सा, समुन्द्र सूख निस्फ हिस्सा, कूट छान कर सफूफ बना लें। एक माशे से नो माशे तक खायें।
नुस्खाः- अजमुद पहले दिन 4 माशा, फिर एक-एक माशा रोज़ ज़्यादा करके सुबह को ठण्डे पानी से फांकें, यहाँ तक कि आठ माशे तक पुहंचाकर, दो माह में भी फायदा ज़ाहिर न हो तो तीसरे माह में बाबरंग एक माशा मिलाकर खायें।Safed Daag ka ilaj aur Nuskhe.
नुस्खाः- बाबची, पनवार, गेरू मसावी लेकर कूट छानकर अदरक के अर्क में गोलियां बनाकर दो हफ्ते तक तिला कर के धूप में बैठा करें।
नुस्खाः- मालकंगनी गाय के पेशाब में इक्कीस रोज़ भिगो कर इसका तेल निकाल कर बर्स पर लगायें।
नुस्खाः- कलोंजी नो दरहम, बाबची तीन दरहम, धतूरे का बीज डेढ़ दरहम, मदार के पत्ते आठ अदद पीस कर सफेद दाग़ों पर लगायें।
नुस्खाः- जंगली इन्जीर की जड़, बाबची, सुहागा, इमली ताज़ा पानी में पीस कर ज़िमाद करें। लक़वा का इलाज और नुस्खे।
नुस्खाः- केचुआ पकड़ कर एक माह तक किसी बोतल में बन्द करके रखें कि इस अर्से में सब राख हो जायगा। इसको लेकर बर्स पर लगायें।
नुस्खाः- बिच्छू मार कर खुश्क करके सिरके में पीस कर बर्स पर लगायें।
नुस्खाः- बैंगन पानी में पकायें, जब गल जाए, इसका साफ पानी लेकर मीठे तेल में मिला कर जोश दें, जब पानी जल जाये, तेल रह जाये, मकामे दाग़ पर लगायें। (इलाजुल गुरबा पेज 168/170)
नुस्खाः- तुख्मे सुर्स गाय के दूध में डाल कर खोया तैयार करें। खोया तैयार हो जाने पर बीज अलग निकाल लें, फिर धोकर सुखा लें। फिर इसका सफूफ बना लें। एक माशा गाय के दूध के साथ खायें।
नुस्खाः – पोस्त दरख्त सरफूका पीस कर छान लें और हर रोज़ दो तोला करके खायें। कुछ दिनों में मर्ज़ दूर हो जायेगा।
नुस्खाः- बाबची, तुख्मे पनवाड़, इन्जीर ज़र्द, चाकसू हर एक एक तोला कूट कर सफूफ बनायें और एक तोला सफूफ लेकर पोटली में बांधें और रात को गर्म पानी में भिगो दें। सुबह के वक़्त आबे जुलाल लेकर पिला दें और फोकस को पीस कर मकामे बर्स पर लगायें और शाम के वक़्त यह नुस्खा दें। गेरू 3 माशा, रिसवत 3 माशा, सियाह मिर्च 7 अदद पानी में पीस कर पिलायें। (बयाज़े कबीर जिल्द 1, पेज 239)
नुस्खाः- त्रिफला, मालकंगनी, बाबवना, ज़र्द चोब, बाबची दो तीन रोज़ भंगरा के पानी में खरल कर के जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। सुबह व शाम एक-एक गोली दें और सिरके में घिस कर दाग़ों पर भी लगायें।
नुस्खाः- तुख्मे मूली, गन्धक, आमला सार, बाबची, हर एक दो तोला तीनों को कूट कर मिला लें। एक तोला रोज़ाना रात को तीन छटांक पानी में भिगोयें। सुबह पानी निथार कर पी लें और फोकस को गाय के घी में खूब खरल करके दाग़ों पर लेप करें। इन्शा अल्लाह अल्लाह का फज़्ल होगा। (कंजुल मुजर्रबात पेज 769)Safed Daag ka ilaj aur Nuskhe
परहेज़ः- मछली, गुड़, खटाई, चावल, दूध, दही, माश की दाल, आलू, कदू वगैरह।
अल्लाह रबबूल इज्ज़त हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे,हमे एक और नेक बनाए, सिरते मुस्तक़ीम पर चलाये, हम तमाम को रसूल-ए-करीम (स.व) से सच्ची मोहब्बत और इताअत की तौफीक आता फरमाए, खात्मा हमारा ईमान पर हो। जब तक हमे जिन्दा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखे,आमीन।
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क्या पता अल्लाह ताला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए ।आमीन।
खुदा हाफिज…
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