एक गांव में एक औरत रहा करती थी। वह पाबन्दी से पांचो वक़्त की नमाज़ पढ़ती थी, और मोहल्ले वालो को दीन की बातें बताया करती थी।
एक दिन वह रात को कब्रिस्तान के करीब से गुज़री तो उसने कब्रिस्तान की निगरानी करने वाले आदमी को देखा की वह किसी मुर्दे का कफ़न चुरा कर ला रहा था।
यह देख कर वह दंग रह गयी और सोचने लगी की जब मै मरूंगी तो यह आदमी मेरा कफ़न भी चुरा लेगा। यह सोच कर वह अपने घर गयी और अगले दिन पांच रुपये लेकर वापिस उसी जगह लौटी।
उसने कब्रिस्तान की निगरानी करने वाले आदमी को पांच रूपए देते हुए कहने लगी! की देखो यह रूपए रख लो और मेरे मरने के बाद मेरा कफ़न मत चुराना।
यह सुनकर वह आदमी चौंक गया और बड़ा शर्मिंदा हुआ की उसका पर्दाफाश हो गया। औरत ने कहा तुम इत्मीनान रखो मै इस बारे में किसी से नहीं कहूँगी।
क्यूंकि किसी का ऐब छुपाना भी एक इबादत हैं। यह सुनकर उस आदमी को बड़ा अफ़सोस हुआ। उसने तौबा की और इक़रार किया की वह अब किसी का कफ़न नहीं चुरायेगा।
कुछ दिनों तक वह अपने वादे का पाबंद रहा लेकिन फिर उसने कफ़न चुराने वाला पुराना धंधा शुरू कर दिया। इसके कुछ दिनों बाद उस औरत का भी इंतेक़ाल हो गया।
लोग जब उसे दफ़न करके कब्रिस्तान से चले गए तब रात को वही कब्रिस्तान की निगरानी करने वाला आदमी उस औरत की कब्र की ओर आया और आकर सोचने लगा की इस औरत का कफ़न निकालू या न निकालू।
सोचते सोचते काफी देर हो गयी। आखिरकार उस आदमी को उसकी लालच ने फिर मजबूर कर दिया और वह उस औरत का कफ़न चुराने के लिए कब्र के और करीब पहुंचा।
उसने उसी वक़्त उस औरत की कब्र खोदी कब्र खोदने के बाद जैसे ही उस औरत की लाश नज़र आयी तो वह डर के मारे काँप गया। उसने देखा की उस औरत के सीने पर एक काला खतरनाक साँप बैठा हुआ हैं।
उसकी घबराहट देख कर एक आवाज़ आयी ! ऐ इंसान तूने वादे के बावजूद फिर ऐसी हरकत की एक साँप देख कर तू डर गया। क्या तुझे मालूम है की यह साँप मेरे सीने पर क्यों बैठा हैं?
सुन एक बार मैंने अपने दाँत साफ़ करने के लिए बिना पूछे अपने पड़ोसी के घर पर लगे एक पेड़ से एक छोटी लकड़ी तोड़ ली थी। ज़िन्दगी में कभी यह ख्याल भी न आया की यह भी कोई गुनाह हैं।
लेकिन आज उस चोरी की मुझे यह सज़ा मिल रही हैं। ज़रा तुम सोचो तुमने अपनी ज़िन्दगी में न जाने कितनी चोरियां की हैं। तुम्हारा क्या हाल होगा। इतना सुनते ही उसने उस औरत की कब्र बंद कर दी और सच्चे दिल से अपने गुनाहो से तौबा कर ली।
आज हम भी कुछ चीज़ो को मामूली गुनाह समझ कर उसे कर लेते हैं और उसका एहसास भी नहीं करते की हमने कुछ गलत किया हैं। आज का मुसलमान ग़ीबत कर रहा हैं,
बेवजह नमाज़ छोड़ रहा हैं, लड़ाई झगडे कर रहा हैं, दीन की बातें कम, फिल्मो गानो की बातें ज़्यादा कर रहा हैं। आज की पीढ़ी यह सोचती हैं की गुनाह कर लेते हैं जब हिसाब होगा तब देखा जायेगा और उसे मज़ाक में ले लेते हैं।
आज हमे बड़े से बड़ा गुनाह करने पर रद्दी भर भी अफ़सोस नहीं होता तो फिर कब्र में हमारा क्या होगा ये सोचने वाली बात हैं। बहरहाल अल्लाह से हर वक़्त अपने किये गुनाहो की माफ़ी मांगे और कोई भी गुनाह चाहे छोटा हो या बड़ा वह करने से बचो।
इस हिदायत को अपने दोस्तों और जानने वालों को शेयर करें।ताकि दूसरों को भी आपकी जात व माल से फायदा हो और यह आपके लिये सदका-ए-जारिया भी हो जाये।
क्या पता अल्लाह तआला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए ।आमीन।
खुदा हाफिज…
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