क़ब्रिस्तान जाने के आदाब। Qabristan Jane ke Aadab.
जनाजे के साथ क़ब्रिस्तान भी जाइए और मैय्यत के दफ़नाने में शरीक रहिए और कभी वैसे भी क़ब्रिस्तान जाया कीजिए, इससे आख़िरत की याद ताज़ा …
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जनाजे के साथ क़ब्रिस्तान भी जाइए और मैय्यत के दफ़नाने में शरीक रहिए और कभी वैसे भी क़ब्रिस्तान जाया कीजिए, इससे आख़िरत की याद ताज़ा …
जब किसी ऐसे आदमी के पास जाएँ जो मरने के क़रीब हो तो जरा ऊँची आवाज से कलिमा ‘ला इला-ह इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह’ पढ़ते रहें । …
खुशी के मौक़ों पर खुशी जरूर मनाइए । खुशी इनसान का फ़ितरी तक़ाज़ा और जरूरत है। दीन फ़ितरी जरूरतों की अहमियत को महसूस करता है …
हज़रत अबू अय्यूब अन्सारी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि जिसने दस मर्तबा यूँ …
जब रात का आख़िरी पहर होता है तो अल्लाह तआला फरिश्तों की तीन जमातें बना देते हैं। (1) थपकियाँ देकर सुलाने वाले फरिश्ते :- एक …
मज़हबे इस्लाम में एक “अल्लाह” की इबादत ज़रूरी है साथ ही साथ उसके नेक बन्दों से मुहब्बत व अकीदत भी ज़रूरी है अल्लाह के नेक …
इस्लाम जिस ऊँची तहजीब और रहन-सहन की दावत देता है, वह उसी वक़्त वजूद में आ सकता है जब हम एक साफ़-सुथरा समाज कायम करने …
जुमा के दिन के आदाब। जुमा के दिन सफ़ाई-सुथराई, नहाने-धोने और सजने-सँवरने का पूरा-पूरा एहतिमाम कीजिए । हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर रजियल्लाहु तआला अन्हु कहते …
खुदा ने उन लोगों को अपना महबूब क़रार दिया है जो पाकी और सफ़ाई पर पूरा-पूरा ध्यान देते हैं और नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम …
किसी के यहाँ मेहमान जाएँ तो हैसियत के मुताबिक़ मेज़बान या मेजबान के बच्चों के लिए कुछ तोहफे तहाइफ़ लेते जाएँ और तोहफे में मेजबान …