अच्छे अख़्लाक से मुताल्लिक एक जामे हदीस
हदीसः- हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि आपस में हसद न करो, और एक दूसरे के भाव पर भाव मत बढ़ाओ, और आपस में बुग्ज़ न रखो, और एक दूसरे से मुँह न मोड़ो, और एक शख़्स दूसरे की बै पर बै न करे, और अल्लाह के बन्दे भाई-भाई बनकर रहो।
फिर फरमाया मुसलमान मुसलमान का भाई है, न उस पर जुल्म करे और न उसको बेकसी की हालत में छोड़े, न उसे हकीर जाने। इसके बाद तीन बार अपने मुबारक सीने की तरफ इशारा करते हुए फरमाया कि तक़्वा यानी परहेज़गारी यहाँ है। फिर फरमाया कि इनसान के बुरा होने के लिये काफी है कि अपने मुसलमान भाई को हकीर जाने। मुसलमान के लिये मुसलमान का सब कुछ हराम है, उसका ख़ून भी, माल भी, आबरू भी। (मुस्लिम शरीफ 317 जिल्द 2)
तशरीहः- यह मुबारक हदीस बड़े फायदों, अहकाम और जामे नसीहतों पर आधारित है। पहली नसीहत यह फ़रमायी कि आपस में हसद न करो।
हसद का वबाल :- हसद बड़ी बुरी बला है। जो हासिद होगा वह ज़रूर ही अपने दिल व दिमाग़ का नास करके रहेगा। कुरआन मजीद में हासिद के हसद से पनाह माँगने की तालीम दी गयी है: तर्जुमाः और हसद करने वाले के शर से जब वह हसद करे।
(सूरः फलक आयत 5)
एक हदीस में है कि सरवरे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि हसद से बचो क्योंकि वह नेकियों को इस तरह खा जाता है जैसे लकड़ियों को आग खा जाती है। (मिश्कात)
आलिमों ने फरमाया है कि हसद हराम है। हसद हराम होने की एक सबसे बड़ी वजह यह है कि जिसको अल्लाह तआला ने जो कुछ दिया है हिक्मत यानी मस्लेहत के बगैर नहीं दिया है। अब जो हसद करने वाला यह चाहता है कि यह नेमत फलाँ शख़्स के पास न रहे तो दर हक़ीक़त यह अल्लाह पर एतिराज़ है कि उसने उसको क्यों नवाज़ा? खिलाफ उसको दूसरे हाल में क्यों न रखा।
ज़ाहिर है कि 645/873 रु के काम में दखल देने का कुछ हक नहीं है, और न मख़्लूक इस लायक ह कि उसको यह हक दिया जाये। हम अपने दुनियावी इन्तिज़ाम में और घरेलू मामलात में रोज़ाना ऐसे काम कर गुज़रते हैं जो हमारे बच्चों की समझ से बाहर होते हैं। अगर हमारे बच्चे हमारे काम में दखल दें तो हमको किस कद्र बुरा मालूम होता है, फिर अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तो कुल मुख़्तार हैं जो चाहें करें, उनकी तकसीम में किसी को दखल देने का क्या हक है?
जब किसी को हसद हो जाता है तो जिससे हसद करता है उसको नुकसान पहुँचाने के पीछे लग जाता है। उसकी ग़ीबत करता है और उसको जानी व माली नुकसान पहुँचाने की फिक्र में लगा रहता है। जिसकी वजह से बड़े-बड़े गुनाहों में घिर जाता है। फिर ऐसे शख़्स को अव्वल तो नेकी करने का मौका ही नहीं मिलता, और अगर कोई नेकी कर गुज़रता है तो चूँकि वह आखिरत में उसे मिलेगी जिससे हसद किया है, तो नेकी करना न करना बराबर हो गया।
इरशाद फ़रमाया नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कि पहली उम्मतों की बीमारी यानी हसद तुम तक आ पहुँची है, और बुग्ज़ तो मूँड देने वाला है। मैं नहीं कहता कि वह बालों को मूंडता है, वह दीन को मूँड देता है। (मिश्कात)
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम ने बुग्ज़ को दीन का मूँडने वाला फरमाया। मूँडने से तश्बीह देने की वजह यह है कि जिस तरह उस्तुरा बाल को मूंडता चला जाता है और हर छोटे बड़े बाल को अलग कर देता है, इसी तरह बुग्ज़ की वजह से सब नेकियाँ ख़त्म होती चली जाती हैं।
हज़रत शीस अलैहिस्सलाम | Hazrat Shis Alehissalam
पहसद करने वाला दुनिया व आख़िरत में अपना बुरा करता है, नेकियों से भी मेहरूम रहता है, और कोई नेकी हो भी जाती है तो हसद की आग उसे राख बनाकर रख देती है। दुनिया में हसद करने वाले के लिये हसद एक अज़ाब है जिसकी आग हासिद (हसद करने वाले) के सीने में भड़कती है, और जिससे हसद किया जाता है उसका कुछ नहीं बिगड़ता।
क्या ही अच्छी बात किसी ने कही है
तर्जुमाः हासिद से इन्तिकाम लेने के ख़्याल में पड़ने की ज़रूरत नहीं, यही इन्तिकाम यानी बदला काफी है कि तुमको खुशी होती है तो उस खुशी की वजह से उसे रंज पहुँचता है।
बाज़ हज़रात ने फरमायाः तर्जुमाः हसद एक काँटा है, जिसने इसे पकड़ा हलाक हुआ।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
🤲 Support Sunnat-e-Islam
Agar aapko hamara Islamic content pasand aata hai aur aap is khidmat ko support karna chahte hain,
to aap apni marzi se donation kar sakte hain.
Allah Ta‘ala aapko iska ajr ata farmaye. Aameen.
