19/08/2026
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शरई पर्दे के 3 दर्जे क्या हैं? | औरतों के लिए इस्लामी पर्दे का सही तरीका | Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain? | Auraton Ke Liye Islami Parde Ka Sahi Tarika amazing story

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Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?
Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

इस्लाम ने औरत को पर्दे और हया की बहुत अहम तालीम दी है। पर्दा सिर्फ़ एक लिबास का नाम नहीं, बल्कि हया, पाकीज़गी और फ़ित्ने से बचने का एक ज़रिया भी है। कुरआन मजीद की आयतों और शरीअत की तालीमात पर गौर करें तो पर्दे के अलग-अलग दर्जे और हालात का पता चलता है।

हर औरत के हालात एक जैसे नहीं होते, इसलिए शरीअत ने मजबूरी और ज़रूरत को भी सामने रखा है। किसी के लिए घर में रहकर पर्दा करना आसान हो सकता है, तो किसी को इलाज, रोज़गार, तालीम या दूसरी ज़रूरत के लिए बाहर निकलना पड़ सकता है। ऐसे में शरई हदों, हया और एहतियात का लिहाज़ रखना बेहद ज़रूरी है।

इस पोस्ट में हम आसान अंदाज़ में जानेंगे कि शरई पर्दे के 3 दर्जे कौन-कौन से हैं, औरत के लिए पर्दे का बेहतर तरीका क्या है और बाहर निकलने की सूरत में किन बातों का ख्याल रखना चाहिए। साथ ही कुरआन मजीद की आयतों की रोशनी में पर्दे की अहमियत को समझने की कोशिश करेंगे।

अल्लाह तआला हमें दीन की सही समझ अता फरमाए और हम सभी को हया, पाकदामनी और शरीअत की हदों पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

शरई पर्दे के तीन दर्जे

कुरआन मजीद फुरक़ाने हमीद की मुख्तलिफ़ आयतों पर गौर करने से यह बात वाज़ेह होती है कि शरई पर्दे के तीन दर्जे हैं। एक सबसे बेहतर दर्जा, दूसरा दर्मियान दर्जा और तीसरा निचला दर्जा है।

मुख्तलिफ़ औरतों के मुख्तलिफ़ हालात की सूरत में हर औरत किसी-न-किसी दर्जे पर अमल ज़रूर कर सकती है। शरअ शरीफ़ ने इनसानी हालात की वजह से इसमें वुसअत रखी है। पर्दे का मदार फ़ित्ने पर है और फित्ने से बचने के लिए जितनी एहतियात हो सके उतना ही ज़्यादा बेहतर है।

1- बेहतरीन दर्जा घर में रहकर पर्दा करना

इरशाद बारी तआला है : और तुम अपने घरों में क़रार पकड़ो।

लिहाज़ा औरत के लिए पर्दे की सबसे आला सूरत यही है कि घर की चारदिवारी में वक़्त गुज़ारे। अपने घर को अपनी जन्नत समझे। औरत काम-काज और ज़िक्र व इबादत से फ़ारिग हो तो घर के सहन में खेलकूद सकती है।

लड़कियाँ आपस में आँख मिचौली खेलें, रस्सी फलांगे, पेंगे चढ़ाएँ, हल्की-फुलकी वरज़िश करें, ट्रेडमल मशीन पर दौड़ लगाए, सहन छोटा हो तो पर्दे वाली छत इस्तेमाल की जा सकती है ताकि वरज़िश हो जाए और गैर मर्दो की नज़रों से दूर अपने घरों में छिपी औरतें दुनिया में मस्त रहें।

न डर न ख़ौफ़ न फ़िक्र न ग़म और शरई हदों में रहते हुए जिस्मीन वरज़िश की ज़रूरत पूरी हो गई। अक्सर औरतें घर में झाड़-फूंक, कपड़े धोने, इस्तरी करने, खाने-पकाना, सफ़ाई सुथराई वगैरह के काम करके थक जाती हैं। मज़ीद वरजिश की ज़रूरत ही महसूस नहीं होती।

लिहाज़ा घर में रहते हुए औरत की हर ज़रूरत पूरी हो जाती है। इस दर्जे पर अमल करने वाली औरत विलायत के दर्जात पाने वाली और कुर्ब इलाही को हासिल करनेवाली होती है।

2- दर्मियान दर्जा यानी बुर्के का पर्दा

अगर मजबूरी में बाहर निकलना ही पड़े तो बुर्का या चादर में खूब अच्छी तरह लिपटकर निकलें। इरशाद बारी तआला है :

अपने ऊपर चादर ओढ़ लें।

आजकल पर्देदार औरतें बुर्का पहनकर जिस्म को छिपा लेती हैं जबकि दस्ताने और मोज़े पहनकर हाथ पाँव की ज़ीनत को छिपा लेती हैं। जबकि बाज़ इलाक़ों शिटिल-कॉक का बुर्का इस्तेमाल होता है। ये सब कुछ जलबाब ही क़िस्म है। इसी तरह देखने वाले गैर-मर्दों को क़द व क्रामत और जसामत का अंदाज़ा हो भी जाए तो भी जीनत छिपी रहने की वजह से फ़ित्ने का अंदेशा कम होता है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

यह एहतियात करनी ज़रूरी है कि बुर्का इतना नक़्श व निगार वाला न हो कि देखनेवाला समझे कि अन्दर कोई हूर की बच्ची मौजूद है। आजकल मर्दों के लालची निगाहें औरत के बकिया जिस्म पर न भी पड़े तो हाथ पाँव पर नज़र डालते ही औरत के हुस्न व जमाल का अंदाजा लगा लेते हैं। इसलिए हाथ पाँव भी छिपाने ज़रूरी है। यह पर्दे का दर्मियानी दर्जा है। इस दर्जे पर अमल करनेवाली औरत तक़्वे पर अमल करने वालों में शुमार होती है।

3- आखिरी दर्जा यानी (मजबूरी का पर्दा)

पर्दे का आखिरी दर्जा यह है कि औरत मजबूरी की वजह से घर से निकले और चादर या बुर्का इस तरह पहने कि उसके हाथ पाँव आँखें वगैरह खुली हों।
इरशाद बारी तआला है : अपना सिंगार न दिखलाए मगर वह जो खुद ज़ाहिर हो जाए।

औरत के लिए अपनी ज़ीनत की किसी चीज़ को मर्दो के सामने ज़ाहिर करना जाएज़ नहीं सिवा इसके जो अपने आप ज़ाहिर हो ही जाती हैं यानी काम-काज और नक़ल व हरकत के वक़्त जो चीजें आदतन खुल ही जाती हैं और उनका छिपाना बहुत मुश्किल होता है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

उनके इज़्हार में कोई गुनाह नहीं। हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने फ़रमाया कि इससे मुराद हथेलियाँ और चेहरा है मगर यह उस वक़्त है जब फ़ित्ने का ख़ौफ़ न हो। अगर फ़ित्ने का डर है तो फुक़्हाए उम्मत का (इज्मा) (इत्तिफ़ाक्न) है कि औरत के लिए चेहरा और हथेलियों खोलना भी जाएज़ नहीं ।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

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बस इस आयत से यह बात साबित हुई कि अगर लेन-देन की ज़रूरत में औरत के हाथ पाँव और आँखे खुली हों तो कोई गुनाह नहीं होगा। मगर इस आयत से यह बात कहीं साबित नहीं होती कि मर्दों को उनके आज़ा की तरफ़ देखना जाएज़ हैं मर्दो के लिए तो हुक्म वही है कि अपनी निगाहें पस्त रखें। शरई ज़रूरत के बगैर औरत के हाथ पाँव और चेहरे को न देखें। Donate Now 

FAQ – शरई पर्दे के 3 दर्जे

सवाल 1: शरई पर्दे के कितने दर्जे बताए गए हैं?
जवाब: इस लेख में शरई पर्दे के तीन दर्जे बताए गए हैं—घर में रहकर पर्दा करना, ज़रूरत के वक्त बुर्के या चादर के साथ बाहर निकलना और मजबूरी की हालत में शरई हदों के मुताबिक पर्दा करना।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 2: पर्दे का सबसे बेहतर दर्जा कौन-सा है?
जवाब: इस लेख के मुताबिक औरत के लिए घर की चारदीवारी में रहकर पर्दा करना सबसे बेहतर दर्जा बताया गया है, बशर्ते घर में रहना उसकी परिस्थितियों और ज़रूरतों के अनुकूल हो।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 3: क्या औरत ज़रूरत के लिए घर से बाहर निकल सकती है?
जवाब: जी हाँ, शरई ज़रूरत जैसे इलाज, ज़रूरी काम या दूसरी वास्तविक आवश्यकता की सूरत में बाहर निकलने की गुंजाइश है। बाहर निकलते समय हया, शरई लिबास और फ़ित्ने से बचने का ख्याल रखना चाहिए।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 4: बाहर निकलते समय पर्दे का क्या ख्याल रखना चाहिए?
जवाब: औरत को ऐसा लिबास पहनना चाहिए जो जिस्म और ज़ीनत को अच्छी तरह ढाँकता हो और गैर-महरम की निगाहों से बचने में मदद करे। लिबास सादा और हया वाला होना बेहतर है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 5: क्या सिर्फ़ बुर्का पहन लेना ही पर्दा है?
जवाब: पर्दा सिर्फ़ बुर्के का नाम नहीं है। इसमें लिबास के साथ हया, ज़ीनत की हिफाज़त, बातचीत और गैर-महरम से ताल्लुक़ात में शरई हदों की पाबंदी भी शामिल है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 6: क्या चेहरे और हाथों का पर्दा ज़रूरी है?
जवाब: इस मसले में फ़ुक़हा के बीच तफ़सीली बहस मौजूद है। कुछ हालात में चेहरा और हाथ खुले रहने की गुंजाइश बयान की गई है, लेकिन अगर फ़ित्ने का अंदेशा हो तो ज़्यादा एहतियात करना ज़रूरी बताया गया है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 7: क्या पुरुषों के लिए भी पर्दे की तालीम है?
जवाब: जी हाँ। इस्लाम में सिर्फ़ औरतों को ही नहीं, बल्कि मर्दों को भी अपनी निगाहों की हिफाज़त और हया की तालीम दी गई है। कुरआन मजीद में मोमिन मर्दों को भी निगाहें नीची रखने का हुक्म दिया गया है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 8: शरई पर्दे का असल मकसद क्या है?
जवाब: पर्दे का मकसद हया और पाकदामनी की हिफाज़त करना और फ़ित्ने से बचना है। इसलिए पर्दे के साथ अख़लाक़ और निगाहों की हिफाज़त भी ज़रूरी है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 9: क्या पर्दा सिर्फ़ कपड़ों से पूरा हो जाता है?
जवाब: नहीं। सही पर्दे में लिबास के साथ हया, निगाह, बातचीत और गैर-महरम के साथ व्यवहार में भी शरई हदों का लिहाज़ शामिल है।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

सवाल 10: पर्दे के बारे में सबसे अहम बात क्या याद रखनी चाहिए?
जवाब: सबसे अहम बात यह है कि पर्दे का मकसद अल्लाह तआला की रज़ा, हया की हिफाज़त और फ़ित्ने से बचना है। हर मुसलमान को अपनी परिस्थिति के मुताबिक़ शरीअत के अहकाम को समझकर उन पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Sharai Parde Ke 3 Darje Kya Hain?
खुदा हाफिज़…..

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