Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
ज़िंदगी में कुछ दुख ऐसे होते हैं जिन्हें शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता, और औलाद का बिछड़ जाना उन्हीं में से एक है। लेकिन इस्लाम ऐसे मुश्किल वक्त में भी मोमिन को उम्मीद, सब्र और अल्लाह की रहमत का पैगाम देता है। हदीस शरीफ में ऐसी बड़ी खुशखबरी दी गई है कि अगर किसी का अधूरा (गिरा हुआ) बच्चा भी दुनिया से चला जाए और माँ-बाप सब्र करें, तो वही बच्चा क़ियामत के दिन अपने माँ-बाप की जन्नत में दाख़िले का ज़रिया बन सकता है।
इस आर्टिकल में हम हदीस की रोशनी में जानेंगे कि अधूरे बच्चे के बारे में इस्लाम क्या सिखाता है, सब्र करने वालों के लिए क्या इनाम है, और मुश्किल हालात में एक मोमिन को कैसा रवैया अपनाना चाहिए। अल्लाह तआला हम सभी को हर हाल में सब्र करने और उसकी रहमत पर भरोसा रखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
अधूरा बच्चा माँ-बाप को जन्नत में लेजाने के लिए झगड़ा करेगा
हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि बेशक अधूरा गिरा हुआ बच्चा भी अपने रब से झगड़ा करेगा जबकि उसके माँ-बाप दोज़ख़ में दाखिल कर दिये गये हों। उस बच्चे से कहा जायेगा कि ऐ अधूरे बच्चे ! जो अपने रब से झगड़ रहा है, अपने माँ-बाप को जन्नत में दाखिल कर दे, लिहाज़ा अपनी नाफ के ज़रिये खींचता हुआ उनको जन्नत में दाखिल कर देगा। (इब्ने माजा)
अपने किसी अज़ीज़ और रिश्तेदार की मौत पर सब्र कर लेना और अल्लाह से सवाब की उम्मीद कर लेना तो बड़े दरजे वाला काम है, लेकिन किसी मुसीबत में फंसे को तसल्ली देना भी बड़े दरजे की बात है। हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद हैः
जिसने किसी ऐसी औरत को तसल्ली दी जिसका बच्चा गुम हो गया हो या मर गया हो तो उसको जन्नत में चादरें पहनाई जायेंगी, यानी जन्नत में दाखिल होकर यह शख़्स वहाँ के लिबास से फायदा उठाने वाला होगा।(तिर्मिज़ी शरीफ)
फायदाः यहाँ तक जो तमाम हदीसों का तर्जुमा लिखा गया है इससे मालूम हुआ कि मुसलमानों के लिए दुनियावी तकलीफ और मुसीबतें, बीमारियाँ और परेशानियाँ सब नेमतें हैं। इनके ज़रिये गुनाह माफ होते हैं, दरजे बुलन्द होते हैं और गुनाहों का कफ़्फ़ारा हो जाने की वजह से ‘बरज़ख’ (मरने के बाद से कियामत के बीच के समय और ज़िन्दगी को बरज़ख़ कहते हैं) और कियामत के दिन के अज़ाब से हिफाज़त हो जाती है।
मोमिन बन्दों पर लाज़िम है कि सब्र व शुक्र के साथ हर हाल को बरदाश्त करते चलें और अल्लाह तआला से सवाब की बहुत ज़्यादा और पुख्ता उम्मीद रखें और यकीन जानें कि हमारे लिए सेहत व आफियत भी खैर है और दुख-तकलीफ भी बेहतर है।
असल तकलीफ़ तो काफिर की तकलीफ़ है। तकलीफ भी पहुँची और सवाब भी न मिला। मोमिन की तकलीफ़, तकलीफ नहीं है। इसका यह मतलब भी नहीं कि मुसीबत व तकलीफ और बीमारी की दुआ किया करें, या शिफा का दुआ न मागे, क्योंकि जिस तरह सब्र में सवाब है इसी तरह शुक्र में भी सवाब है। सवाल आफियत चैन-सुकून ही का करें और करते रहें, और तकलीफ़ पहुँच जाये तो सब्र करें।
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बहुत-से लोग जो आराम और राहत और दुख-तकलीफ की हिक्मत (मस्लेहत) और इस बारे में अल्लाह के कानून को नहीं जानते, बेतुकी बातें करते हैं। कहते हैं कि दुनिया की सारी मुसीबतें मुसलमान कौम ही पर आ पड़ती हैं। कभी कहते हैं कि काफिरों को तो महल और दुनियावी राहत व आराम और मुसलमान को सिर्फ आख़िरत की नेमतों का वयदा।
कभी कहते हैं कि अल्लाह तआला ने गैरों को खूब नवाज़ा है और अपनों को तंगदस्ती व फाके और दूसरी मुसीबतों में रखा है, हालाँकि अपना होने की ही वजह से मुसलमानों को तकलीफ़ में मुब्तला फरमाया जाता हैं ताकि इनके गुनाह माफ हों, दरजे बुलन्द हों और आख़िरत में गुनाहों पर सज़ा न हो।
दर हक़ीक़त यह बहुत बड़ी मेहरबानी है कि दुनिया की थोड़ी-बहुत तकलीफ में मुब्तला करके आख़िरत के सख़्त अज़ाब से बचा दिया जाये। और काफिरों को चूँकि आख़िरत में कोई नेमत नहीं मिलनी, कोई आराम नसीब नहीं होना, बल्कि उनके लिए सिर्फ अज़ाब ही अज़ाब है, इसलिए उनको दुनिया ज़्यादा दे दी जाती है और उनपर मुसीबतें कम आती हैं।
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अगर किसी काफिर ने मख़्लूक की खिदमत वगैरह का कोई काम किया है तो उसका बदला इसी दुनिया में दे दिया जाता है ताकि आख़िरत में उसे ज़रा-सी खैर और मामूली-सा आराम भी न मिले, और हमेशा-हमेशा के लिए दोज़ख़ में रहे।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
FAQ (सवाल व जवाब)
1. क्या अधूरा (गिरा हुआ) बच्चा भी अपने माँ-बाप के लिए सिफारिश करेगा?
जी हाँ, हदीस शरीफ़ में आता है कि अधूरा (गिरा हुआ) बच्चा भी अल्लाह की बारगाह में अपने माँ-बाप के लिए सिफारिश करेगा और उन्हें जन्नत में ले जाने का ज़रिया बनेगा।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
2. अगर बच्चे की मौत पर माँ-बाप सब्र करें तो उन्हें क्या सवाब मिलेगा?
अगर माँ-बाप अल्लाह की रज़ा के लिए सब्र करें और अज्र की उम्मीद रखें, तो उन्हें बड़ा सवाब मिलता है और जन्नत की खुशखबरी भी दी गई है।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
3. क्या गर्भपात (Miscarriage) होने पर भी सब्र का सवाब मिलता है?
अगर यह हादसा इंसान के इख्तियार के बिना हुआ हो और वह सब्र करे, तो इंशाअल्लाह उसे भी अज्र और सवाब मिलता है।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
4. बच्चे की मौत पर क्या पढ़ना चाहिए?
“इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन” पढ़ना चाहिए और अल्लाह से सब्र, मग़फिरत और बेहतर बदला माँगना चाहिए।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
5. क्या किसी दुखी माँ या बाप को तसल्ली देना भी सवाब का काम है?
जी हाँ, हदीस के मुताबिक जिसने अपने बच्चे को खो चुके माँ-बाप को तसल्ली दी, उसके लिए भी बड़ा अज्र और जन्नत की खुशखबरी है।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
6. मुसलमानों पर मुसीबतें क्यों आती हैं?
मुसीबतें मोमिन के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बनती हैं, उसके दर्जे बुलंद करती हैं और आखिरत के अज़ाब से बचने का ज़रिया बनती हैं।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
7. क्या बीमारी और परेशानियाँ भी अल्लाह की रहमत हो सकती हैं?
जी हाँ, अगर इंसान सब्र करे और अल्लाह पर भरोसा रखे, तो बीमारी और परेशानी भी उसके लिए रहमत और सवाब का कारण बन जाती हैं।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
8. क्या हमें मुसीबत की दुआ करनी चाहिए?
नहीं। हमें हमेशा अल्लाह से सेहत, आफियत और आसानी की दुआ करनी चाहिए। लेकिन अगर मुसीबत आ जाए तो सब्र करना चाहिए।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
9. क्या सिर्फ मुसलमानों पर ही ज़्यादा आज़माइश आती है?
मोमिन की आज़माइश उसके ईमान, गुनाहों की माफी और दर्जे की बुलंदी के लिए होती है। इसलिए हर मुश्किल में अल्लाह की हिकमत होती है।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
10. इस हदीस से हमें सबसे बड़ा सबक क्या मिलता है?
सबसे बड़ा सबक यह है कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें, सब्र करें, उसकी रज़ा पर राज़ी रहें और यक़ीन रखें कि अल्लाह अपने सब्र करने वाले बंदों के लिए दुनिया और आखिरत दोनों में बेहतरीन बदला तैयार रखता है।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Adhura Bachcha Bhi Maa-Baap Ko Jannat Me Le Jayega
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
